Khunti Shut: चक्का जाम, सोमा मुंडा हत्याकांड पर भड़का आक्रोश, खूंटी में दिखा झारखंड बंद का रौद्र रूप, सड़कों पर पसरा सन्नाटा

आदिवासी नेता सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में बुलाए गए झारखंड बंद से खूंटी जिला पूरी तरह थम गया है। पुलिस की 'लीपापोती' के आरोपों और बंद समर्थकों के उग्र प्रदर्शन की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस बड़े जनांदोलन और बंद के कारण ठप हुए रास्तों की हकीकत जानने से चूक जाएंगे।

Jan 17, 2026 - 14:42
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Khunti Shut: चक्का जाम, सोमा मुंडा हत्याकांड पर भड़का आक्रोश, खूंटी में दिखा झारखंड बंद का रौद्र रूप, सड़कों पर पसरा सन्नाटा
Khunti Shut: चक्का जाम, सोमा मुंडा हत्याकांड पर भड़का आक्रोश, खूंटी में दिखा झारखंड बंद का रौद्र रूप, सड़कों पर पसरा सन्नाटा

खूंटी, 17 जनवरी 2026 – झारखंड आंदोलनकारी और एदेल सांगा पड़हा राजा सोमा मुंडा की निर्मम हत्या के खिलाफ शनिवार को आदिवासी संगठनों द्वारा आहूत 'झारखंड बंद' का खूंटी जिले में ऐतिहासिक असर देखा गया। सुबह से ही बंद समर्थकों ने जिले की धमनियों (प्रमुख मार्गों) को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। अबुआ झारखंड पार्टी के नेता की हत्या से उपजा गुस्सा अब सड़कों पर सैलाब बनकर उमड़ पड़ा है। तोरपा से लेकर अड़की तक और कर्रा से लेकर रनिया तक, पूरा जिला मानो थम सा गया है। प्रशासन की भारी तैनाती के बावजूद बंद समर्थकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक "असली कातिल" सलाखों के पीछे नहीं होंगे, खूंटी की सड़कों पर शांति केवल एक सपना होगी।

सड़कों पर संग्राम: तोरपा और मारचा में खड़ी हुईं वाहनों की कतारें

बंद का असर खूंटी जिला मुख्यालय से कहीं ज्यादा ग्रामीण और प्रखंड क्षेत्रों में देखने को मिला।

  • प्रमुख मार्ग जाम: बंद समर्थकों ने खूंटी-तोरपा मार्ग, मारचा और कर्रा के मुख्य चौराहों पर टायर जलाकर और मानव श्रृंखला बनाकर आवागमन ठप कर दिया।

  • यात्री परेशान: बसों और छोटी गाड़ियों का परिचालन बंद होने से सैकड़ों यात्री बीच रास्ते में फंसे रहे। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए कड़ाके की ठंड के बीच यह सफर एक परीक्षा बन गया।

  • व्यापारिक बंदी: खूंटी, मुरहू, तपकरा और अड़की के बाजारों में सन्नाटा रहा। दवा दुकानों जैसी आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक के शटर नहीं उठे।

7 गिरफ्तार, फिर भी असंतोष: पुलिस पर 'स्क्रिप्ट' लिखने का आरोप

7 जनवरी की शाम को सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस अब तक 7 लोगों को जेल भेज चुकी है, लेकिन आदिवासी संगठन इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं।

  1. लीपापोती का आरोप: संगठनों का दावा है कि पुलिस जनदबाव कम करने के लिए केवल प्यादों को पकड़ रही है, जबकि हत्याकांड के पीछे के 'मास्टरमाइंड' और 'असली शूटर' अब भी खुलेआम घूम रहे हैं।

  2. निर्दोषों की गिरफ्तारी: आंदोलनकारियों ने गंभीर आरोप लगाया कि पुलिस अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए निर्दोष लोगों को बलि का बकरा बना रही है।

  3. मशाल जुलूस की गूँज: शुक्रवार शाम को निकाले गए मशाल जुलूस ने ही शनिवार के बंद की रूपरेखा तय कर दी थी, जिसमें हजारों हाथों में मशालें न्याय की मांग कर रही थीं।

खूंटी झारखंड बंद: ताजा स्थिति (Bandh Status at a Glance)

प्रभावित क्षेत्र स्थिति (Status) मुख्य गतिविधि
खूंटी शहर पूरी तरह बंद बाजार बंद, सड़कों पर सन्नाटा
तोरपा-रनिया चक्का जाम मुख्य हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार
कर्रा-मुरहू आंशिक असर ग्रामीण सड़कों पर विरोध प्रदर्शन
प्रशासनिक रुख हाई अलर्ट संवेदनशील इलाकों में पुलिस फ्लैग मार्च

इतिहास का पन्ना: खूंटी का विद्रोही स्वभाव और 'पड़हा राजा' की परंपरा

खूंटी जिला केवल झारखंड का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि यह भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली है, जिसने हमेशा अन्याय के खिलाफ 'उलगुलान' (विद्रोह) का रास्ता चुना है। इतिहास गवाह है कि यहाँ की 'पड़हा' शासन व्यवस्था सदियों पुरानी है, जहाँ सोमा मुंडा जैसे 'पड़हा राजा' सामाजिक और सांस्कृतिक न्याय के प्रतीक माने जाते रहे हैं। 19वीं शताब्दी के अंत में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में हुए आंदोलन से लेकर आज 2026 के इस बंद तक, खूंटी की मिट्टी का स्वभाव नहीं बदला है। आदिवासी समाज में 'पड़हा राजा' की हत्या को केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था और परंपरा पर हमला माना जाता है। यही कारण है कि यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक पार्टी तक सीमित न रहकर एक जनभावना बन गया है।

प्रशासन की मुस्तैदी: शांतिपूर्ण रहा विरोध

समाचार लिखे जाने तक, खूंटी के किसी भी हिस्से से हिंसा की कोई बड़ी खबर नहीं आई है।

  • सीसीटीवी निगरानी: पुलिस प्रशासन ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए बंद समर्थकों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है।

  • अपील: संगठनों ने घोषणा की है कि अगर पुलिस ने अपनी जांच की दिशा नहीं बदली और असली साजिशकर्ताओं को बेनकाब नहीं किया, तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले लेगा।

न्याय की सुलगती आग

सोमा मुंडा हत्याकांड के बाद बुलाए गए इस बंद ने यह साबित कर दिया है कि खूंटी की जनता अब 'फाइल बंद' करने वाली पुलिसिया कार्रवाई को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। न्याय की यह मांग आने वाले दिनों में और कितनी तेज होगी, यह पुलिस के अगले कदम पर निर्भर करेगा।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।