Jugsalai Medicine: दवा दुकानदार की मनमानी, मरीजों को हो रही परेशानी!
जुगसलाई में एक दवा दुकानदार ने मरीज को जरूरत से ज्यादा दवा लेने के लिए मजबूर किया। मरीज के पास डॉक्टर की पर्ची होने के बावजूद आधी दवा नहीं दी गई। जानिए पूरा मामला!

जुगसलाई: दवा विवाद – क्या आपने कभी सोचा है कि डॉक्टर ने जितनी दवा लिखी हो, उससे अधिक दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जाए? कुछ ऐसा ही हुआ जुगसलाई स्टेशन रोड स्थित मेडिसिन पॉइंट यूनिट 2 में, जहां एक मरीज को सिर्फ 6 टैबलेट की जरूरत थी, लेकिन दुकानदार ने पूरी पत्ता (10 टैबलेट) लेने की मजबूरी डाल दी।
दवा के नाम पर जबरदस्ती? क्या है पूरा मामला?
बीते दिन एक मरीज अपने डॉक्टर आई.पी. मित्तल के पर्चे के साथ जुगसलाई के इस दवा दुकान पर दवा खरीदने गया। डॉक्टर ने तीन दवाइयां लिखी थीं, जिनमें से एक दवा की सिर्फ 6 टैबलेट ही लेनी थीं। जब मरीज ने दुकानदार से कहा कि उसे पूरी स्ट्रिप नहीं चाहिए, सिर्फ 6 टैबलेट चाहिए, तो दुकानदार ने साफ मना कर दिया।
दुकानदार का कहना था कि वह "दवा काटकर नहीं देगा, चाहे ग्राहक को जितनी जरूरत हो"। मरीज ने काफी मिन्नतें कीं, लेकिन दुकानवाले ने "पूरी स्ट्रिप लो या मत लो" कहकर उसे मजबूर कर दिया।
क्या यह नियम के खिलाफ है?
भारत में दवाओं की बिक्री के लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 लागू है, जिसके तहत मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखकर दवा की बिक्री होनी चाहिए। यदि किसी मरीज को सिर्फ 6 टैबलेट की जरूरत है, तो उसे पूरी स्ट्रिप लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
लेकिन कई दवा दुकानदार अधिक लाभ कमाने के लिए ग्राहकों को पूरी पत्ता लेने की मजबूरी डालते हैं, जिससे जरूरत से अधिक दवा खरीदनी पड़ती है। यह न सिर्फ आर्थिक नुकसान है बल्कि अनावश्यक दवा जमा होने से मरीजों को भी परेशानी होती है।
मरीजों के लिए क्यों खतरनाक है यह प्रथा?
- अनावश्यक खर्च – जरूरत से ज्यादा दवा लेने से मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
- मेडिकल वेस्ट बढ़ता है – कई बार बची हुई दवाइयाँ फेंकनी पड़ती हैं, जिससे मेडिकल वेस्ट बढ़ता है।
- गलत उपयोग का खतरा – अतिरिक्त दवा होने से लोग बिना डॉक्टर की सलाह के खुद ही दवा लेने लगते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
इतिहास: क्या पहले भी ऐसा हुआ है?
यह समस्या सिर्फ जुगसलाई तक सीमित नहीं है। भारत में कई बार मरीजों को दवा की आधी मात्रा देने से इनकार करने के मामले सामने आए हैं।
- 2019 में दिल्ली के एक मेडिकल स्टोर पर ऐसा ही मामला सामने आया था, जब एक बुजुर्ग मरीज को आधी दवा देने से मना कर दिया गया।
- 2022 में मुंबई में भी ऐसा मामला चर्चा में आया था, जहां मरीजों को जबरन पूरी स्ट्रिप खरीदनी पड़ी।
प्रशासन को उठाने होंगे कदम!
मरीज ने स्थानीय प्रशासन से शिकायत करते हुए मांग की है कि इस दवा दुकान की जाँच कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई और मरीज इस तरह की परेशानी का शिकार न हो।
क्या कहता है कानून?
भारतीय ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट के नियमों के अनुसार, किसी भी दवा की कम मात्रा में बिक्री करने से दुकानदार को मना नहीं करना चाहिए। यदि कोई दवा खुली बेचना गैरकानूनी होती, तो डॉक्टर इसे पर्चे पर नहीं लिखते।
समाधान क्या हो सकता है?
स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।
यदि कोई दुकानदार मनमानी करे, तो इसकी शिकायत ड्रग इंस्पेक्टर से करनी चाहिए।
मरीजों को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होनी चाहिए, ताकि वे अनावश्यक खर्च से बच सकें।
जुगसलाई में हुआ यह मामला दवा दुकानों की मनमानी को उजागर करता है। जरूरत से ज्यादा दवा खरीदने की मजबूरी सिर्फ पैसे की लूट नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकती है। प्रशासन को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और मरीज मनमानी का शिकार न बने।
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