Jharkhand Regulation: झारखंड में कोचिंग माफिया पर नकेल, राज्यपाल ने नए कानून को दी मंजूरी, अब मनमानी फीस और झूठे विज्ञापनों का खेल खत्म

झारखंड के शिक्षा जगत में अब कोचिंग सेंटरों की तानाशाही नहीं चलेगी। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार द्वारा मंजूर किए गए 'कोचिंग सेंटर नियंत्रण विधेयक-2025' के कड़े नियमों, भारी जुर्माने और रजिस्ट्रेशन की अनिवार्य शर्तों की पूरी जानकारी यहाँ दी गई है वरना आप भी छात्रों के अधिकारों से जुड़े इस ऐतिहासिक बदलाव को जानने से चूक जाएंगे।

Jan 21, 2026 - 13:48
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Jharkhand Regulation: झारखंड में कोचिंग माफिया पर नकेल, राज्यपाल ने नए कानून को दी मंजूरी, अब मनमानी फीस और झूठे विज्ञापनों का खेल खत्म
Jharkhand Regulation: झारखंड में कोचिंग माफिया पर नकेल, राज्यपाल ने नए कानून को दी मंजूरी, अब मनमानी फीस और झूठे विज्ञापनों का खेल खत्म

रांची, 21 जनवरी 2026 – झारखंड के शिक्षा जगत में पारदर्शिता और अनुशासन लाने के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बहुप्रतीक्षित ‘झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक-2025’ को अपनी आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस कानून के लागू होते ही अब राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर कानूनी चाबुक चलना तय है। रजिस्ट्रेशन से लेकर फीस वापसी और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य तक, सरकार ने अब हर पहलू पर कड़े पहरे लगा दिए हैं।

अनिवार्य पंजीकरण: 6 महीने में बदल जाएगा पूरा ढांचा

नए कानून के तहत अब कोई भी संस्थान छिपकर या बिना रिकॉर्ड के कोचिंग नहीं चला पाएगा।

  • सरकारी वेब पोर्टल: सभी संस्थानों को सरकार के विशेष पोर्टल पर अपना पूरा ब्यौरा दर्ज कर पंजीकरण कराना होगा।

  • डेडलाइन: कानून लागू होने के मात्र 6 महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करनी अनिवार्य है।

  • कैंपस नियम: यदि किसी कोचिंग की अलग-अलग जिलों में शाखाएं हैं, तो हर कैंपस का अलग रजिस्ट्रेशन कराना होगा। अब एक ही लाइसेंस पर पूरे राज्य में धंधा चमकाना नामुमकिन होगा।

  • त्रिस्तरीय निगरानी: जिला स्तर पर उपायुक्त (DC) इसकी कमान संभालेंगे, जबकि राज्य स्तर पर सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों का एक विशेष प्राधिकरण शिकायतों का निपटारा करेगा।

छात्रों की सुरक्षा: मानसिक स्वास्थ्य अब प्राथमिकता

कोटा और अन्य शहरों में छात्रों के बढ़ते दबाव को देखते हुए झारखंड सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाए हैं।

  1. काउंसलर की नियुक्ति: अब हर 1000 छात्रों पर एक मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर रखना अनिवार्य होगा।

  2. 200 दिनों की सेवा: साल में कम से कम 200 दिनों तक छात्रों को मुफ्त काउंसलिंग और मानसिक सहायता देनी होगी।

  3. नाइट कर्फ्यू: कोचिंग संस्थान केवल सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक ही अपनी क्लास लगा सकेंगे। देर रात तक छात्रों को बिठाकर उन पर दबाव डालना अब कानूनन अपराध होगा।

झारखंड कोचिंग कानून: मुख्य प्रावधान और दंड (Regulation Table)

श्रेणी नियम और शर्तें (Rules & Conditions)
बैंक गारंटी नगर निगम: ₹5 लाख
पहली बार उल्लंघन ₹5 लाख तक का भारी जुर्माना
दूसरी बार उल्लंघन ₹10 लाख तक का जुर्माना
तीसरी बार उल्लंघन पंजीकरण रद्द (Cancel) और संस्थान ब्लैकलिस्ट
समय सीमा सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक संचालन

इतिहास का पन्ना: झारखंड में शिक्षा का बाजारीकरण और नियमन का सफर

झारखंड (पूर्व में दक्षिण बिहार) का इतिहास हमेशा से 'नेतरहाट' जैसे उत्कृष्ट सरकारी संस्थानों के लिए जाना जाता था। 1990 के दशक तक शिक्षा का व्यवसायीकरण यहाँ न के बराबर था। लेकिन साल 2000 में राज्य गठन के बाद जब रांची, जमशेदपुर और हजारीबाग 'एजुकेशन हब' के रूप में उभरे, तब निजी कोचिंग संस्थानों की बाढ़ आ गई। इतिहास गवाह है कि 2010 के बाद जब प्रतियोगी परीक्षाओं की होड़ बढ़ी, तब कई संस्थानों ने 'रैंक' खरीदने और 'भ्रामक विज्ञापनों' के जरिए करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया। 2021-22 के दौरान कोचिंग से जुड़ी कई शिकायतें विधानसभा तक पहुँची थीं। आज का यह विधेयक उसी ऐतिहासिक अराजकता को खत्म करने की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा कदम है। यह कानून उन गरीब मेधावी छात्रों के लिए ढाल बनेगा जो अक्सर लुभावने वादों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते थे।

भ्रामक विज्ञापनों और फीस पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'

अक्सर देखा जाता है कि कोचिंग संस्थान सफलता के गलत दावे कर छात्रों को लुभाते हैं, अब ऐसा करना भारी पड़ेगा।

  • रिफंड पॉलिसी: अब हर संस्थान को अपनी वेबसाइट पर स्पष्ट 'रिफंड पॉलिसी' (फीस वापसी के नियम) सार्वजनिक करनी होगी।

  • झूठे दावे: टॉपर्स की फोटो लगाकर सफलता दर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने पर सीधा पंजीकरण रद्द हो सकता है।

  • पारदर्शिता: फीस का पूरा ढांचा नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना होगा ताकि अभिभावकों से कोई 'छिपा हुआ चार्ज' न वसूला जा सके।

छात्रों के अधिकारों की जीत

राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद अब यह बिल कानून बन चुका है। यह झारखंड के लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर है, जो भारी भरकम फीस और मानसिक तनाव के बीच पिस रहे थे। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस कानून को जमीनी स्तर पर कितनी कड़ाई से लागू करता है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।