Baharagora Terror: हाथी का तांडव, बहरागोड़ा के सालदोहा में बेखौफ गजराज का हमला, खेतों को रौंदा, जान बचाकर भागे ग्रामीण
बहरागोड़ा के पाथरा पंचायत में एक जंगली हाथी ने पिछले कई दिनों से मौत का तांडव मचा रखा है। सालदोहा गांव में फसलों को बर्बाद करने और मुख्य सड़क पर अचानक आ धमकने से फैले खौफ की पूरी जमीनी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी शाम के वक्त बहरागोड़ा के इन रास्तों पर निकलने की बड़ी गलती कर बैठेंगे।
बहरागोड़ा/जमशेदपुर, 15 जनवरी 2026 – झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले का सीमावर्ती इलाका बहरागोड़ा इस वक्त एक 'अघोषित कर्फ्यू' के साये में है। पाथरा पंचायत के सालदोहा गांव में पिछले कई दिनों से एक विशालकाय जंगली हाथी ने ऐसा उत्पात मचाया है कि ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। हाथी न केवल खेतों को उजाड़ रहा है, बल्कि अब सीधे बस्तियों और मुख्य सड़कों पर आ धमका है। बुधवार की रात सालदोहा बस्ती में जो मंजर देखा गया, उसने रोंगटे खड़े कर दिए। बेखौफ गजराज के डर से लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने को मजबूर हैं। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद यह हाथी इलाके से जाने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
आधी रात का कोहराम: जब सड़क पर आ गया 'यमराज'
बुधवार की रात पाथरा जंगल से निकलकर हाथी सीधे सालदोहा बस्ती में दाखिल हो गया।
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मुख्य पथ पर कब्जा: बस्ती से होते हुए हाथी अचानक मानुषमुड़िया मुख्य पथ पर आ गया। यह वह समय था जब लोग अपने घरों की ओर लौट रहे थे। सड़क के बीचोबीच हाथी को देख राहगीरों के हाथ-पांव फूल गए।
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अफरा-तफरी का माहौल: हाथी के चिंघाड़ने की आवाज सुनते ही गांव में भगदड़ मच गई। लोग अपने बच्चों को लेकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागे।
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खदेड़ने की मशक्कत: घंटों की कड़ी मशक्कत और मशालों के शोर के बाद हाथी को वापस पाथरा जंगल की ओर धकेला गया, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।
किसानों की मेहनत पर फिरा पानी: सब्जियां चट कर गया गजराज
हाथी का सबसे ज्यादा गुस्सा स्थानीय किसानों की फसलों पर निकल रहा है।
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सब्जियों की बर्बादी: सालदोहा और आसपास के किसानों ने हाड़ कंपाने वाली ठंड में खून-पसीना एक कर सब्जियों की खेती की थी। हाथी ने एक ही रात में कई एकड़ में लगी फसल को पैरों तले रौंद दिया।
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आर्थिक संकट: फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने अब भूखों मरने की नौबत आ गई है। कई किसानों ने कर्ज लेकर बीज खरीदे थे, जो अब मिट्टी में मिल चुके हैं।
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शाम होते ही सन्नाटा: हाथी के डर से सालदोहा और पाथरा इलाके में शाम 5 बजे के बाद सन्नाटा पसर जाता है। लोग घरों के दरवाजे बंद कर अंदर दुबक जाते हैं।
बहरागोड़ा हाथी उत्पात: मुख्य विवरण (Elephant Terror Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| प्रभावित क्षेत्र | सालदोहा गांव, पाथरा पंचायत (बहरागोड़ा) |
| हाथी की वर्तमान लोकेशन | पाथरा जंगल (रह-रहकर बस्तियों में प्रवेश) |
| नुकसान | कई एकड़ सब्जियों की फसल और किसानों की बाड़ |
| मुख्य खतरा | मानुषमुड़िया मुख्य पथ पर आवागमन बाधित |
| प्रशासनिक निर्देश | हाथी के नजदीक न जाएं, छेड़छाड़ न करें |
इतिहास का पन्ना: दलमा से बहरागोड़ा तक 'हाथियों का कॉरिडोर'
बहरागोड़ा और चाकुलिया का इलाका ऐतिहासिक रूप से हाथियों के प्रवास मार्ग (Migration Corridor) का हिस्सा रहा है। 18वीं और 19वीं शताब्दी के ब्रिटिश रिकॉर्ड्स बताते हैं कि मयूरभंज (ओडिशा) और पश्चिम बंगाल के जंगलों से हाथियों का झुंड इसी रास्ते से दलमा की पहाड़ियों तक जाता था। इतिहास गवाह है कि जंगलों की कटाई और इंसानी बस्तियों के विस्तार ने इन 'गजराजों' के रास्तों को रोक दिया है। साल 2012 और 2019 में भी बहरागोड़ा में हाथियों के हमले में कई ग्रामीणों की जान गई थी। जानकारों का कहना है कि जब कोई अकेला हाथी (लोनर) अपने झुंड से बिछड़ जाता है, तो वह ज्यादा आक्रामक और बेखौफ हो जाता है। सालदोहा का यह हाथी भी उसी 'लोनर' व्यवहार का प्रदर्शन कर रहा है, जो इंसानी गंध पाकर सीधे बस्तियों का रुख कर रहा है।
प्रशासन की लाचारी और ग्रामीणों की गुहार
वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे हाथी के साथ सेल्फी लेने या उसे छेड़ने की कोशिश न करें।
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टॉर्च और पटाखों का सहारा: वन विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं, लेकिन विशालकाय जंगली हाथी के सामने वे भी बेबस नजर आ रहे हैं।
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मुआवजे की मांग: ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि बर्बाद हुई फसलों का उचित मुआवजा दिया जाए और हाथी को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर दूर के जंगलों में छोड़ा जाए।
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दहशत का साया: पाथरा जंगल के पास रहने वाले लोगों का कहना है कि वे रात भर जागकर पहरा दे रहे हैं, क्योंकि हाथी कभी भी उनके कच्चे घरों को ढहा सकता है।
मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष
बहरागोड़ा में इंसान और जानवर के बीच का यह संघर्ष अब चरम पर है। जब तक इस 'बेखौफ' हाथी का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक सालदोहा के ग्रामीणों के लिए हर रात एक खौफनाक सपना बनी रहेगी।
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