Jamshedpur Theft : स्कूटी चोरी, सीतारामडेरा में शातिर चोरों का तांडव, केदार साव की एक्टिवा गायब
जमशेदपुर के सीतारामडेरा में शातिर चोरों ने केदार साव की कीमती एक्टिवा पर हाथ साफ कर दिया। घर के बाहर खड़ी स्कूटी रातों-रात गायब होने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। कहीं अगला नंबर आपका तो नहीं, पूरी वारदात और पुलिसिया कार्रवाई की सच्चाई यहाँ जानें।
जमशेदपुर : लौहनगरी की सड़कों पर अब सिर्फ रफ्तार नहीं, बल्कि खौफ भी दौड़ रहा है। जमशेदपुर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र में चोरों ने एक ऐसी दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया है, जिसने पुलिसिया गश्त और मोहल्ले की सुरक्षा पर गंभीर चोट की है। इंद्रा टावर मुंगी पाड़ा इलाके में रहने वाले केदार साव के घर के बाहर से उनकी कीमती एक्टिवा स्कूटी रातों-रात गायब हो गई। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चोरों के हौसले बुलंद हैं और आम आदमी की मेहनत की कमाई सुरक्षित नहीं है।
आधी रात का सन्नाटा और चोरों का खेल
वारदात की शुरुआत 24 मार्च की रात करीब 11 बजे हुई। पीड़ित केदार साव ने रोज की तरह अपनी सफेद रंग की एक्टिवा स्कूटी (जो उनकी पत्नी कंचन देवी के नाम पर पंजीकृत है) को घर के दरवाजे के ठीक बाहर खड़ा किया था। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि अंधेरे का फायदा उठाकर कोई उनके घर की दहलीज तक पहुँच जाएगा। अगली सुबह करीब 7 बजे जब केदार साव सोकर उठे और घर के बाहर निकले, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जहाँ रात को स्कूटी खड़ी थी, वहाँ अब सिर्फ खाली सड़क और सन्नाटा था।
70 हजार की चपत और हताश परिवार
केदार साव ने आनन-फानन में आस-पड़ोस के लोगों से पूछताछ की। मुंगी पाड़ा की गलियों में काफी खोजबीन की गई, लेकिन चोर इतने शातिर थे कि उन्होंने कोई सुराग पीछे नहीं छोड़ा। बाजार में इस स्कूटी की कीमत करीब 70 हजार रुपये बताई जा रही है। एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। थक-हारकर पीड़ित ने सीतारामडेरा थाने की शरण ली और अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
जमशेदपुर में चोरी का पुराना 'इतिहास' और बढ़ता ग्राफ
जमशेदपुर, जिसे टाटा समूह की दूरदर्शिता ने बसाया, वह कभी अपनी शांति और सुरक्षा के लिए जाना जाता था। 1900 के शुरुआती दशक में जब साकची के जंगलों को काटकर इस शहर की नींव रखी गई थी, तब यहाँ अपराध न के बराबर थे। साकची, बिष्टुपुर और सीतारामडेरा जैसे इलाके रिहायशी और सुरक्षित माने जाते थे।
लेकिन समय के साथ बढ़ती आबादी और बेरोजगारी ने शहर की सूरत बदल दी। पिछले कुछ वर्षों में जमशेदपुर के सीतारामडेरा, सिदगोड़ा और बारीडीह जैसे इलाकों में 'बाइक लिफ्टर गैंग' का आतंक बढ़ा है। जानकारों की मानें तो इन चोरियों के पीछे अक्सर नशे के आदी युवा या अंतरराज्यीय गिरोह का हाथ होता है, जो मिनटों में मास्टर की (Master Key) के जरिए लॉक खोलकर रफूचक्कर हो जाते हैं। केदार साव की घटना उसी कड़वी सच्चाई का एक नया अध्याय है।
पुलिस के सामने खड़ी बड़ी चुनौती
सीतारामडेरा पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन सवाल वही है—क्या स्कूटी वापस मिल पाएगी? अक्सर देखा गया है कि चोरी के बाद वाहनों को काटकर उनके पार्ट्स बेच दिए जाते हैं या फिर नंबर प्लेट बदलकर दूसरे जिलों में खपा दिया जाता है। पुलिस अब इंद्रा टावर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालने की योजना बना रही है ताकि चोरों का हुलिया साफ हो सके।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें
मुंगी पाड़ा निकासी इलाके के निवासियों में इस घटना के बाद काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि रात के समय पुलिस पीसीआर की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। अगर आप भी अपने वाहन घर के बाहर खड़े करते हैं, तो अतिरिक्त सुरक्षा के लिए डिस्क लॉक या जीपीएस ट्रैकर का इस्तेमाल जरूर करें, क्योंकि जमशेदपुर के इन शातिर चोरों की नजर अब हर गली और हर दरवाजे पर है।
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