Chaibasa Raid: पोडाहाट के जंगलों में वन विभाग की सर्जिकल स्ट्राइक, झाड़ियों में छिपाकर रखे गए साल के कीमती बोटे जब्त
पश्चिमी सिंहभूम के पोडाहाट वन क्षेत्र में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आनंदपुर रेंज से 50 हजार की अवैध साल की लकड़ियां जब्त की हैं। रेंजर की विशेष टीम की छापेमारी और सारंडा-पोडाहाट के जंगलों में बढ़े हाई-अलर्ट की पूरी लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
चाईबासा/आनंदपुर, 19 मई 2026 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत पोडाहाट वन क्षेत्र से पर्यावरण के दुश्मनों और लकड़ी तस्करों के खिलाफ वन विभाग की एक बहुत बड़ी कामयाबी सामने आई है। आनंदपुर वन रेंज के मेरमेंडा से गुड़ी जाने वाले घने जंगली रास्ते पर वन विभाग की एक विशेष टीम ने तड़के सुबह सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए अवैध रूप से काटे गए कीमती 'साल' (सखुआ) वृक्ष के 10 विशालकाय बोटे (लकड़ी के कुंदे) बरामद किए हैं। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस अचानक कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के वन माफियाओं और तस्करों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। जब्त की गई लकड़ियों की बाजार में अनुमानित कीमत करीब 50 हजार रुपये आंकी गई है, जिसे जब्त कर वन कार्यालय परिसर लाया गया है।
वारदात की दास्तां: झाड़ियों में सीक्रेट डंपयार्ड, रविवार की घेराबंदी और रेंजर का स्पेशल इनपुट
यह पूरी जब्ती वन विभाग की मुस्तैदी और सटीक मुखबिर तंत्र की बदौलत संभव हो पाई है, जिसने तस्करों के मंसूबों पर पूरी तरह पानी फेर दिया।
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झाड़ियों के पीछे छिपा था 'काला सोना': वन विभाग को एक बेहद गोपनीय इनपुट मिला था कि मेरमेंडा से गुड़ी मार्ग पर घने जंगल के भीतर अज्ञात लकड़ी चोरों ने साल के हरे-भरे और संरक्षित पेड़ों पर आरी चलाई है। तस्कर इन लकड़ियों को काटने के बाद जंगल किनारे झाड़ियों और पत्तों के नीचे छिपाकर रखे हुए थे, ताकि रात के अंधेरे में इन्हें ट्रकों के जरिए राज्य से बाहर खपाया जा सके।
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रविवार का सघन सर्च ऑपरेशन: सूचना की संवेदनशीलता को देखते हुए आनंदपुर रेंजर के निर्देश पर बिना वक्त गंवाए एक त्वरित रिस्पांस टीम (QRT) का गठन किया गया। वन कर्मियों की इस विशेष टीम ने रविवार को पूरे मेरमेंडा जंगल को चारों तरफ से घेरकर एक सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाया।
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आनंदपुर रेंज ऑफिस शिफ्ट हुई खेप: घंटों की मशक्कत के बाद टीम ने झाड़ियों में छिपाई गई साल की 10 भारी लकड़ियों को खोज निकाला। वन कर्मियों ने तुरंत सभी बोटों को अपने कब्जे में लिया और एक बड़े सरकारी वाहन में लादकर आनंदपुर वन कार्यालय परिसर पहुंचाया। वहां विधिवत जब्ती सूची (Seizure List) तैयार कर अज्ञात अपराधियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया गया है।
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मुखबिर एक्टिव और गश्त हुई दोगुनी: वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने बताया कि इस कटाई के पीछे शामिल स्थानीय और अंतरराज्यीय तस्करों की कुंडली खंगाली जा रही है। जंगल के भीतर गश्त (हाईवे पैट्रोलिंग) को दोगुना कर दिया गया है और सुदूरवर्ती गांवों में नए मुखबिरों को सीक्रेट कोड पर एक्टिव किया गया है।
प्रशासनिक रुख: वन अधिनियम के तहत केस दर्ज, अवैध कटाई पर जीरो टॉलरेंस
पोडाहाट वन प्रभाग इस कार्रवाई के बाद से पूरी तरह सख्त और आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
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अज्ञात माफियाओं पर FIR: वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम (Forest Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और कटे हुए पेड़ों के ठूंठ से उनके व्यास (Diameter) का मिलान किया जा रहा है।
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आर-पार की जंग का एलान: वन अधिकारियों ने कड़े शब्दों में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पोडाहाट और आनंदपुर के जंगलों में 'साल' जैसे राजकीय और कीमती वृक्षों की अवैध कटाई किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों को सीधे जेल भेजा जाएगा।
नाका व्यवस्था और स्थानीय इको-विकास समितियों को पुनर्जीवित करने की जरूरत
पोडाहाट वन क्षेत्र के आनंदपुर रेंज में 10 पीस साल के बोटों की जब्ती वन विभाग की एक सराहनीय सफलता है, लेकिन यह घटना इस कड़वे सच को भी बयां करती है कि जंगलों के भीतर अब भी तस्करों की कुल्हाड़ी बेखौफ चल रही है। सारंडा और पोडाहाट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में केवल औचक छापेमारी काफी नहीं है। वन विभाग को ब्रिटिश काल के पुराने वन नाकों को आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन और वायरलेस ट्रैकिंग) से लैस करना होगा। साथ ही, जब तक स्थानीय ग्रामीणों और वन प्रबंधन समितियों को इस जंग में सीधे साझीदार नहीं बनाया जाएगा, तब तक पोडाहाट के इस 'हरे सोने' को कासिम जैसे लकड़ी चोरों और सिंडिकेट माफियाओं से बचा पाना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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