River Tragedy: स्वर्णरेखा नदी में डूबे मासूम अंकुश का शव 48 घंटे बाद बरामद, प्रशासन की 'सुस्ती' पर भड़का जमशेदपुर, एनडीआरएफ की देरी ने ली जान!
जमशेदपुर के सिदगोड़ा में स्वर्णरेखा नदी के डोंगा घाट पर डूबे 12 वर्षीय अंकुश कालिंदी का शव मिलने की पूरी दर्दनाक रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। एनडीआरएफ की टीम पहुँचने में हुई 48 घंटे की देरी और परिजनों के भारी गुस्से का पूरा विवरण विस्तार से पढ़िए वरना आप शहर की इस बड़ी प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा के दावों की पोल खोलने वाली खबर से चूक जाएंगे।
जमशेदपुर/सिदगोड़ा, 28 जनवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर से आज एक बेहद दुखद और प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा करने वाली खबर सामने आई है। स्वर्णरेखा नदी के डोंगा घाट पर नहाने के दौरान डूबे 12 वर्षीय अंकुश कालिंदी का शव आखिरकार बुधवार को बरामद कर लिया गया। 26 जनवरी की दोपहर से लापता अंकुश की तलाश में प्रशासन की सुस्ती ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। परिजनों का आरोप है कि अगर सिस्टम ने फुर्ती दिखाई होती, तो शायद बिरसानगर का यह चिराग आज सलामत होता।
26 जनवरी की वो मनहूस दोपहर: क्या हुआ था?
गणतंत्र दिवस के जश्न के बीच दोपहर करीब 2:30 बजे बिरसानगर निवासी अंकुश अपने दोस्तों के साथ सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के डोंगा घाट पर नहाने पहुँचा था।
-
गहरे पानी का जाल: नहाने के दौरान अंकुश अनजाने में नदी के गहरे हिस्से में चला गया और देखते ही देखते लहरों के बीच समा गया।
-
सिस्टम की विफलता: घटना के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन आरोप है कि घंटों तक कोई ठोस रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हुआ।
-
48 घंटे का इंतजार: स्थानीय लोग तत्काल गोताखोरों की मांग करते रहे, लेकिन एनडीआरएफ (NDRF) की टीम को रांची से जमशेदपुर पहुँचने में लगभग दो दिन लग गए।
विधायक की पहल और एनडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन
मामला बढ़ता देख स्थानीय विधायक पूर्णिमा दास ने कड़ा संज्ञान लिया और राज्य स्तर पर वार्ता कर एनडीआरएफ की टीम को जल्द से जल्द भेजने का दबाव बनाया।
-
सुबह की तलाश: बुधवार सुबह रांची से आई टीम ने डोंगा घाट पर मोर्चा संभाला।
-
शव बरामद: गोताखोरों की कड़ी मशक्कत के बाद नदी की गहराई से अंकुश का शव निकाल लिया गया।
-
परिजन बेहाल: जैसे ही शव किनारे आया, घाट पर मौजूद परिजनों की चीत्कारों से पूरा इलाका दहल उठा। माँ-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्वर्णरेखा नदी हादसा: घटना का घटनाक्रम (Case Timeline)
| तारीख/समय | घटना (Status) | प्रशासनिक एक्शन |
| 26 जनवरी, दोपहर | अंकुश नदी में डूबा | सूचना के बाद केवल खानापूर्ति |
| 27 जनवरी | दिनभर परिजनों का इंतजार | एसडीआरएफ/एनडीआरएफ नदारद |
| 28 जनवरी, सुबह | एनडीआरएफ की एंट्री | सघन तलाशी अभियान शुरू |
| 28 जनवरी, दोपहर | शव बरामद | पोस्टमार्टम हेतु एमजीएम रेफर |
इतिहास का पन्ना: स्वर्णरेखा के घाट और 'किलर जोन' का आतंक
स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम पर बसा जमशेदपुर जितना खूबसूरत है, इसके घाट उतने ही खतरनाक साबित हुए हैं। इतिहास गवाह है कि 1980 के दशक से ही स्वर्णरेखा नदी के किनारे बसे इलाकों में डूबने की घटनाएं आम रही हैं। विशेषकर 'डोंगा घाट' और 'बाबूडीह घाट' को प्रशासन ने कई बार 'डेंजर ज़ोन' घोषित किया है। 2014-15 में भी इसी तरह की आधा दर्जन से अधिक घटनाएं हुई थीं, जिसके बाद लाइफगार्ड तैनात करने का वादा किया गया था। लेकिन 2026 की यह घटना बताती है कि इतिहास से कोई सबक नहीं लिया गया। जमशेदपुर में आपदा प्रबंधन का तंत्र आज भी उतना ही 'लाचार' है जितना दशकों पहले था।
प्रशासनिक संवेदनशीलता पर उठते सवाल
स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि औद्योगिक शहर होने के बावजूद जमशेदपुर के पास अपनी कोई त्वरित एनडीआरएफ यूनिट क्यों नहीं है?
-
देरी की वजह: रांची से टीम मंगाने में लगने वाले 48 घंटों ने सिस्टम की पोल खोल दी है।
-
जांच की मांग: लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं के लिए हर घाट पर चेतावनी बोर्ड और प्रशिक्षित गोताखोरों की 24×7 तैनाती की जाए।
एक और मासूम की बलि
अंकुश कालिंदी का शव मिलना केवल एक हादसे का अंत नहीं है, बल्कि यह शहर के सुरक्षा इंतजामों पर लगा एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम अस्पताल भेज दिया है, लेकिन परिजनों के मन में जो टीस है, उसे शायद ही कोई जांच भर पाए।
What's Your Reaction?


