Jamshedpur Protest: मुआवजे की मांग पर 8 घंटे ठप रही सड़क, आखिर कैसे टूटा ग्रामीणों का गुस्सा?
जमशेदपुर के पटमदा थाना क्षेत्र में सड़क हादसे के बाद ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर आठ घंटे तक मुख्य मार्ग जाम रखा। जानिए कैसे प्रशासन, जनप्रतिनिधि और वाहन मालिक के बीच हुई त्रिपक्षीय वार्ता से समाधान निकला।
जमशेदपुर : झारखंड का पटमदा इलाका सोमवार को उस समय उबाल पर आ गया जब एक सड़क हादसे में गंगा सागहर टुडू की मौत हो गई। हादसा सुबह हुआ और दोपहर तक पूरा इलाका आक्रोश से भर उठा। गुस्साए ग्रामीणों ने शव के साथ टाटा–पटमदा मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया, जो पूरे आठ घंटे तक जारी रहा।
हादसा कैसे हुआ?
सुबह जलडहर पेट्रोल पंप के पास एक डंपर ने गंगा सागहर टुडू को अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। यह खबर आग की तरह फैली और देखते-देखते ग्रामीण बड़ी संख्या में जमा हो गए। गुस्सा इतना था कि लोगों ने तत्काल मुआवजे की मांग करते हुए सड़क पर धरना शुरू कर दिया।
मुआवजे की मांग और जाम
ग्रामीण शुरुआत में 10 लाख रुपये मुआवजे पर अड़े रहे। उनका कहना था कि सड़क हादसे लगातार हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन और वाहन मालिक जिम्मेदारी से बच निकलते हैं। कई बार चेतावनी देने के बावजूद हादसों पर रोक लगाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
त्रिपक्षीय वार्ता का ड्रामाई मोड़
जाम खुलवाने के लिए पटमदा थाना परिसर में त्रिपक्षीय वार्ता बुलाई गई। इसमें पीड़ित परिवार, प्रशासन और वाहन मालिक शामिल हुए।
-
परिवार और ग्रामीण पक्ष से: मुखिया कानूराम बेसरा, जिला पार्षद प्रदीप बेसरा, झामुमो नेता सुभाष कर्मकार, ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष बृंदावन दास सहित कई लोग मौजूद थे।
-
प्रशासन की ओर से: बीडीओ शशि नीलिमा डुंगडुंग, डीएसपी वचनदेव कुजूर और थाना प्रभारी करमपाल भगत समेत अन्य अधिकारी आए।
-
वाहन मालिक: टिंकू बेसरा।
वार्ता में शुरू में टकराव दिखा। ग्रामीण 10 लाख रुपये से कम पर तैयार नहीं थे, जबकि वाहन मालिक और प्रशासन इतने बड़े मुआवजे को संभव नहीं मान रहे थे। अंततः समझौते के तहत मृतक के भाई हेमसागर टुडू को डेढ़ लाख रुपये तुरंत नकद और दो लाख रुपये 10 दिन में देने पर सहमति बनी।
आखिर क्यों उभरते हैं ऐसे आंदोलन?
यह पहली बार नहीं है जब पटमदा क्षेत्र में सड़क हादसे के बाद ग्रामीणों ने जाम का सहारा लिया हो। झारखंड में सड़क सुरक्षा लंबे समय से गंभीर मुद्दा रही है। तेज़ रफ्तार डंपर, सड़क की खराब हालत और निगरानी की कमी अक्सर हादसों का कारण बनते हैं।
इतिहास उठाकर देखें तो, 2018 और 2021 में भी इसी इलाके में हादसों के बाद लोगों ने मुआवजे और सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर सड़क जाम किया था। उस समय भी सरकार और वाहन मालिकों के बीच मुआवजे को लेकर खींचतान हुई थी।
राहत की सांस और राजनीति का रंग
शाम चार बजे जब सड़क जाम खुला तो यात्रियों और प्रशासन ने राहत की सांस ली। घंटों तक एंबुलेंस और आम वाहन फंसे रहे थे। वहीं मौके पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के पूर्व प्रत्याशी विनोद स्वांसी भी पहुंचे और ग्रामीणों का समर्थन किया।
बड़ा सवाल
ग्रामीणों का आंदोलन खत्म तो हो गया, लेकिन बड़ा सवाल अब भी बरकरार है – क्या हर हादसे के बाद इसी तरह सड़क जाम कर मुआवजे की लड़ाई लड़नी होगी? या फिर सरकार कोई स्थायी समाधान निकालेगी?
जमशेदपुर का यह मामला सिर्फ एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं है। यह झारखंड में सड़क सुरक्षा और मुआवजा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़ा करता है। बार-बार के आंदोलनों ने साफ कर दिया है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक हर हादसा सड़क जाम और मुआवजे की राजनीति में बदलता रहेगा।
What's Your Reaction?


