Sarjamda Inferno: सरजमदा में आधी रात को 'अग्नि तांडव', शॉर्ट सर्किट से सुशीला का आशियाना खाक, दमकल के न पहुंचने पर मोहल्ले वालों ने खुद संभाली कमान
जमशेदपुर के परसुडीह में देर रात शॉर्ट सर्किट ने एक हंसते-खेलते घर को राख के ढेर में बदल दिया। दमकल की देरी और स्थानीय लोगों के जांबाज संघर्ष की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी शहर की लचर इमरजेंसी सेवाओं और बिजली की एक छोटी सी चूक से होने वाली इस बड़ी तबाही की हकीकत जानने से चूक जाएंगे।
जमशेदपुर/परसुडीह, 23 जनवरी 2026 – लौहनगरी के परसुडीह थाना अंतर्गत सरजमदा इलाके में बीती रात दहशत का माहौल रहा। एक साधारण से घर में उठी बिजली की चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। सरजमदा निवासी सुशीला पूर्ति के घर में लगी इस भीषण आग ने न केवल उनकी जीवन भर की जमा पूंजी को जलाकर राख कर दिया, बल्कि दमकल विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शॉर्ट सर्किट और आधी रात का सन्नाटा
घटना देर रात की है जब पूरा इलाका गहरी नींद में सो रहा था। अचानक सुशीला पूर्ति के बंद घर से धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं।
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चिंगारी बनी काल: शुरुआती जांच में आग लगने का कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।
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बाल-बाल बची जान: गनीमत यह रही कि जिस समय आग लगी, घर के अंदर कोई मौजूद नहीं था। घर खाली होने के कारण एक बड़ा जानी नुकसान टल गया, लेकिन सामान को नहीं बचाया जा सका।
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तबाही का मंजर: आग इतनी तेजी से फैली कि जब तक लोग कुछ समझ पाते, घर के भीतर रखा राशन, कपड़े, फर्नीचर और जरूरी दस्तावेज जलकर कोयला बन चुके थे।
जब सिस्टम फेल हुआ, तो जनता बनी 'फायर फाइटर'
इस हादसे के दौरान सरकारी तंत्र की पोल खुल गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आग लगने के तुरंत बाद परसुडीह थाना और दमकल विभाग (Fire Brigade) को लगातार कई बार फोन किए गए।
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घंटों का इंतजार: लोगों का दावा है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद दमकल की गाड़ी समय पर मौके पर नहीं पहुँची।
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जनता का साहस: मदद न मिलते देख सरजमदा के स्थानीय युवकों और पड़ोसियों ने खुद मोर्चा संभाला। घरों से पाइप खींचे गए और बाल्टियों से पानी डाल-डालकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
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नाराजगी: समय पर मदद नहीं मिलने को लेकर इलाके के लोगों में प्रशासन के प्रति भारी रोष देखा जा रहा है।
सरजमदा अग्निकांड: घटना का पूरा ब्यौरा (Incident Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| पीड़ित मकान मालिक | सुशीला पूर्ति (सरजमदा) |
| आग लगने का कारण | शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) |
| नुकसान का आकलन | घर का समस्त घरेलू सामान खाक |
| बचाव कार्य | स्थानीय निवासियों द्वारा (Self-Rescue) |
| प्रशासनिक विफलता | दमकल की गाड़ी समय पर नहीं पहुँची |
इतिहास का पन्ना: परसुडीह और सरजमदा में बढ़ते बिजली हादसे
जमशेदपुर का परसुडीह और सरजमदा इलाका ऐतिहासिक रूप से शहर का एक महत्वपूर्ण आवासीय विस्तार रहा है। 1960 और 70 के दशक में जब जमशेदपुर की आबादी बढ़ी, तब इन इलाकों में बस्तियां बसीं। लेकिन इतिहास गवाह है कि यहाँ का बुनियादी ढांचा, विशेषकर बिजली के तारों का जाल, समय के साथ अपडेट नहीं हुआ। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि 90 के दशक में भी यहाँ जर्जर तारों के कारण आग लगने की घटनाएं होती थीं। दुखद यह है कि 2026 में भी, जब शहर स्मार्ट बनने की राह पर है, सरजमदा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में फायर स्टेशन की पहुंच एक बड़ी समस्या बनी हुई है। दमकल केंद्रों का गोलमुरी या अन्य दूरदराज इलाकों में होना और संकरी गलियों के कारण समय पर न पहुंच पाना एक ऐसी ऐतिहासिक समस्या है जिसका समाधान आज तक नहीं निकाला जा सका।
सावधानी ही बचाव: एक्सपर्ट्स की राय
इस घटना ने एक बार फिर बिजली के उपकरणों के प्रति सावधानी बरतने की याद दिलाई है।
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पुराने तार बदलें: घर के पुराने वायरिंग को समय-समय पर चेक करवाएं।
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मेन स्विच: घर से बाहर जाते समय मेन स्विच बंद करने की आदत डालें।
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स्थानीय नाराजगी: सरजमदा के लोगों का कहना है कि अगर वे खुद हिम्मत नहीं दिखाते, तो आग आसपास के घरों को भी अपनी चपेट में ले लेती।
सुशीला के आशियाने में अब केवल राख
सुशीला पूर्ति के लिए यह एक बड़ी आर्थिक क्षति है। प्रशासन को चाहिए कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दे और भविष्य में ऐसी घटनाओं के लिए रिस्पांस टाइम (Response Time) को बेहतर करे ताकि किसी और का घर इस तरह न जले।
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