Vasant Utsav: बसंत पंचमी पर पीला रंग पहनने का रहस्य, मां सरस्वती की कृपा और खुशियों का 'हार्मोन' कनेक्शन, जानें इस दिन पीले वस्त्रों का असली महत्व
बसंत पंचमी पर पीले रंग के कपड़ों और व्यंजनों के पीछे छिपे आध्यात्मिक व वैज्ञानिक कारणों की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है। मां सरस्वती की कृपा पाने और शरीर में खुशी बढ़ाने वाले सेरोटोनिन हार्मोन के इस अनोखे 'येलो कनेक्शन' को विस्तार से पढ़िए वरना आप भी इस पावन पर्व की असली शक्ति को जानने से चूक जाएंगे।
नई दिल्ली, 23 जनवरी 2026 – शुक्रवार को देशभर में ज्ञान, बुद्धि और संगीत की देवी मां सरस्वती की उपासना का महापर्व 'बसंत पंचमी' हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। चारों ओर खिली सरसों की पीली चादर और प्रकृति में आते बदलाव के बीच यह पर्व नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन हर तरफ केवल पीला रंग ही क्यों नजर आता है? क्या यह महज एक परंपरा है या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक रहस्य छिपा है? आज हम बसंत पंचमी के उन अनछुए पहलुओं को उजागर करेंगे जो आपकी जीवनशैली को सकारात्मक ऊर्जा से भर देंगे।
पीला रंग: ज्ञान और पवित्रता का ईश्वरीय प्रतीक
सनातन धर्म में रंगों का अपना एक शास्त्र है, जिसमें पीला रंग सर्वोच्च स्थान रखता है।
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सरस्वती और विष्णु का प्रिय: मां सरस्वती को विद्या की देवी माना जाता है और पीला रंग मन की शुद्धता और बुद्धि की ज्योति का प्रतीक है। भगवान विष्णु को भी 'पीतांबर' प्रिय है, जो समृद्धि और आध्यात्मिक विकास को दर्शाता है।
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बृहस्पति का प्रभाव: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पीला रंग 'गुरु' यानी बृहस्पति ग्रह से जुड़ा है। गुरु ज्ञान और विवेक का कारक है। बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने से एकाग्रता बढ़ती है और छात्रों को विद्या प्राप्ति में अलौकिक मदद मिलती है।
मनोविज्ञान का सच: क्यों खुश कर देता है पीला रंग?
आधुनिक मनोविज्ञान (Psychology) भी बसंत पंचमी के इस 'येलो कोड' पर अपनी मुहर लगाता है।
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सेरोटोनिन का बूस्टर: पीला रंग सूर्य की रोशनी की तरह चमकदार होता है। यह हमारे दिमाग में सेरोटोनिन (Serotonin) नामक हार्मोन को बढ़ावा देता है, जिसे 'हैप्पी हार्मोन' कहा जाता है। यही कारण है कि बसंत के आगमन पर लोग अधिक उत्साहित और ऊर्जावान महसूस करते हैं।
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रचनात्मकता का विकास: पीला रंग मस्तिष्क को उत्तेजित करता है, जिससे नए विचार और समस्या समाधान की क्षमता सक्रिय होती है। छात्रों के लिए इस दिन पीले कपड़े पहनकर पढ़ाई करना मानसिक स्पष्टता और आत्मविश्वास लाता है।
बसंत पंचमी: शुभ मुहूर्त और पीले व्यंजनों का महत्व (Festival Snapshot)
| विवरण | विशेष जानकारी (Significance) |
| मुख्य तिथि | शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 |
| प्रमुख रंग | पीला (ज्ञान, शांति और ऊर्जा का प्रतीक) |
| पसंदीदा भोग | केसरिया हलवा, बेसन के लड्डू, पीले मीठे चावल |
| वैज्ञानिक लाभ | मूड को बेहतर बनाता है और एकाग्रता बढ़ाता है |
| पूजा का केंद्र | मां सरस्वती, पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र |
इतिहास का पन्ना: बसंत और 'पीत' क्रांति का सदियों पुराना सफर
बसंत पंचमी का इतिहास हजारों साल पुराना है। ऋग्वेद के काल में बसंत को ऋतुओं का राजा (ऋतुराज) माना गया। प्राचीन भारत में इस दिन को 'मदनोत्सव' के रूप में भी मनाया जाता था, जहाँ लोग प्रकृति की उर्वरता का जश्न मनाते थे। इतिहास गवाह है कि मध्यकाल में, जब भारत में मुगल सत्ता थी, तब भी बसंत पंचमी का पर्व हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक था। अमीर खुसरो जैसे कवियों ने 'बसंत' पर अपनी रचनाएं लिखीं और निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर आज भी पीली चादर चढ़ाने की परंपरा है। पीले रंग का ऐतिहासिक महत्व सरसों की खेती से भी जुड़ा है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जब सरसों के फूल खिलते थे, तो पूरा इलाका 'स्वर्णमयी' दिखता था, जिसे हमारे पूर्वजों ने नई शुरुआत और नई फसल के उत्सव के रूप में अपनाया।
कैसे मनाएं इस बार की बसंत पंचमी?
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सरस्वती पूजन: सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा को पीले फूल अर्पित करें और बच्चों की पाटी-कलम की पूजा करें।
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पीले व्यंजनों का भोग: घर में केसरिया हलवा या पीले चावल (मीठा भात) बनाएं। यह न केवल परंपरा है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बसंत ऋतु में 'केसर' का सेवन शरीर को संतुलित रखता है।
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संगीत और कला: चूंकि मां सरस्वती वीणावादिनी हैं, इसलिए इस दिन संगीत का अभ्यास करना या कोई नई कला सीखना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सकारात्मक बदलाव का समय
बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान का एक खूबसूरत संगम है। पीला रंग हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर जाने की प्रेरणा देता है। इस शुक्रवार जब आप पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की वंदना करेंगे, तो याद रखें कि आप केवल एक परंपरा नहीं निभा रहे, बल्कि अपनी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति को पुनर्जीवित कर रहे हैं।
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