Jamshedpur Battle: कुड़मी मांग के खिलाफ आदिवासी समाज का विशाल प्रदर्शन, डीसी ऑफिस का घेराव, पारंपरिक हथियारों से संसद को सीधा संदेश

कुड़मी समुदाय को ST सूची में शामिल करने की मांग के विरोध में जमशेदपुर में आदिवासी समुदाय ने जोरदार प्रदर्शन किया। हजारों की संख्या में आदिवासी पारंपरिक पोशाक और हथियारों के साथ साकची स्थित डीसी ऑफिस पहुंचे। आदिवासी नेता राज हांसदा ने इसे संवैधानिक रूप से गलत बताया।

Oct 9, 2025 - 15:24
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Jamshedpur Battle: कुड़मी मांग के खिलाफ आदिवासी समाज का विशाल प्रदर्शन, डीसी ऑफिस का घेराव, पारंपरिक हथियारों से संसद को सीधा संदेश
Jamshedpur Battle: कुड़मी मांग के खिलाफ आदिवासी समाज का विशाल प्रदर्शन, डीसी ऑफिस का घेराव, पारंपरिक हथियारों से संसद को सीधा संदेश

जमशेदपुर की शांत सी सड़कें आज उस वक्त हजारों आदिवासियों की गर्जती आवाज से गूंज उठीं, जब कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने की लंबे समय से चल रही मांग के खिलाफ एक विशाल विरोध प्रदर्शन (Adivasi Protest) आयोजित किया गयायह प्रदर्शन केवल विरोध नहीं था, बल्कि यह झारखंड के मूल निवासियों द्वारा अपने ऐतिहासिक अधिकारों और पहचान को बचाने के लिए किया गया शक्ति प्रदर्शन था

इतिहास गवाह है कि आदिवासी समुदाय ने हमेशा अपनी जल, जंगल, जमीन और पहचान के लिए संघर्ष किया है। आज का प्रदर्शन उसी संघर्ष की एक और कड़ी है, जहाँ हजारों की संख्या में आदिवासी पारंपरिक पोशाक, नृत्य और अपने पारंपरिक हथियारों (तीर-कमान आदि) से लैस होकर सड़कों पर उतरे और डीसी ऑफिस का घेराव किया

ST सूची में शामिल होने की मांग क्यों है 'असंवैधानिक'?

यह प्रदर्शन जिले के विभिन्न इलाकों से आए आदिवासियों का केंद्र रहा, जिनमें पटमदा, बोड़ाम, घाटशिला, पोटका, परसूडीह, सुंदरनगर, बिरसानगर और करनडीह जैसे क्षेत्र शामिल थेप्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि कुड़मी समुदाय को एसटी सूची में शामिल करना आदिवासी समाज के अधिकारों पर एक सीधा हमला होगा

  • कड़ी चेतावनी: आदिवासी नेता राज हांसदा ने सख्त शब्दों में कहा, “कुड़मी समाज आदिवासी नहीं है। उनकी एसटी में शामिल होने की मांग जायज नहीं है। यह संवैधानिक रूप से गलत है।

  • बर्दाश्त नहीं: उन्होंने साफ किया कि आदिवासी समाज इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा और इसके खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी

प्रदर्शनकारियों के पारंपरिक गीतों और गगनभेदी नारों से पूरे डीसी ऑफिस का माहौल गूंज उठायह आक्रोश केवल आरक्षण का नहीं, बल्कि उस पहचान और संस्कृति को बचाने का है, जो सदियों से आदिवासी समाज की मूल आधारशिला रही है

सुरक्षा कड़ी, लेकिन संदेश स्पष्ट

इतनी बड़ी संख्या में आदिवासियों के इकट्ठा होने के कारण प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र साकची और डीसी ऑफिस पर भारी पुलिस बल की तैनाती की थीस्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही, लेकिन पारंपरिक हथियारों के साथ प्रदर्शन ने प्रशासन और सरकार को यह संदेश देने का काम किया कि यह मुद्दा कितना संवेदनशील है

कुड़मी समुदाय की मांग और आदिवासी समुदाय का कड़ा विरोध अब झारखंड की राजनीति का एक अहम अंग बन गया है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए यह मामला एक बड़ी पहेली बन गया है, क्योंकि किसी भी फैसले से राज्य के एक बड़े हिस्से में असंतोष पैदा हो सकता है।

आपकी राय में, कुड़मी समुदाय और आदिवासी समुदाय के बीच इस विवाद को सुलझाने के लिए सरकार को कौन से दो निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार उपयोग करने चाहिए?

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।