Hazaribagh Havoc : बड़कागांव में एनटीपीसी डंपर ने महिला को रौंदा, तेतरी देवी की मौत से भड़का गुस्सा, शव के साथ चक्का जाम

हजारीबाग के बड़कागांव में एनटीपीसी से जुड़े एक भारी वाहन ने तेतरी देवी को कुचल दिया है। 'तेल बेचने' के अवैध खेल और इस भीषण हादसे के बाद सड़क पर उतरे आक्रोशित ग्रामीणों की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी कोयलांचल के रास्तों पर दौड़ती इस 'मौत' की खौफनाक हकीकत को जानने से चूक जाएंगे।

Jan 17, 2026 - 14:23
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Hazaribagh Havoc :  बड़कागांव में एनटीपीसी डंपर ने महिला को रौंदा, तेतरी देवी की मौत से भड़का गुस्सा, शव के साथ चक्का जाम
Hazaribagh Havoc : बड़कागांव में एनटीपीसी डंपर ने महिला को रौंदा, तेतरी देवी की मौत से भड़का गुस्सा, शव के साथ चक्का जाम

हजारीबाग, 17 जनवरी 2026 – झारखंड के हजारीबाग जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बड़कागांव प्रखंड के बरवाडीह इलाके में शनिवार की सुबह एनटीपीसी (NTPC) के एक अनियंत्रित डंपर ने एक महिला को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतका की पहचान तेतरी देवी के रूप में हुई है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में ज्वालामुखी की तरह गुस्सा फूट पड़ा है। परिजनों और ग्रामीणों ने शव को मुख्य सड़क पर रखकर बड़कागांव-हजारीबाग मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया है। हवा में धूल और आंखों में आंसू लिए ग्रामीण अब सीधे तौर पर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से जवाब मांग रहे हैं।

तेल का खेल और मौत का तांडव: कैसे हुआ हादसा?

हादसे के पीछे की कहानी केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक संदिग्ध गतिविधि की ओर भी इशारा कर रही है।

  • अवैध तेल बिक्री का आरोप: स्थानीय लोगों के मुताबिक, एनटीपीसी का यह डंपर वाहन बरवाडीह इलाके में कथित तौर पर 'तेल बेचने' आया था।

  • रफ्तार का कहर: तेल बेचकर लौटने की हड़बड़ी में चालक ने वाहन की रफ्तार इतनी बढ़ा दी कि वह सड़क किनारे खड़ी तेतरी देवी को देख नहीं पाया और उन्हें बेरहमी से रौंदते हुए निकल गया।

  • मौके पर ही मौत: टक्कर इतनी भीषण थी कि तेतरी देवी को अस्पताल ले जाने तक का मौका नहीं मिला। उनकी घटनास्थल पर ही सांसें थम गईं।

सड़क पर संग्राम: मुआवजे की मांग पर अड़े परिजन

हादसे के बाद बरवाडीह युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया है।

  1. शव के साथ प्रदर्शन: आक्रोशित परिजनों ने तेतरी देवी के शव को बीच सड़क पर रख दिया है। उनकी मांग है कि जब तक कंपनी प्रबंधन और प्रशासन मौके पर आकर मुआवजे का ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक जाम नहीं खुलेगा।

  2. यातायात ठप: बड़कागांव मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। कोयला ढुलाई में लगे सैकड़ों ट्रक और राहगीर इस भीषण जाम में फंसे हुए हैं।

  3. तनावपूर्ण माहौल: मौके पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।

हजारीबाग सड़क हादसा: मुख्य विवरण (Incident Snapshot)

विवरण जानकारी (Details)
मृतका का नाम तेतरी देवी (बरवाडीह निवासी)
वाहन का प्रकार एनटीपीसी डंपर (भारी वाहन)
स्थान बरवाडीह, बड़कागांव (हजारीबाग)
मुख्य मांग उचित मुआवजा और चालक की गिरफ्तारी
वर्तमान स्थिति सड़क जाम, यातायात पूरी तरह बाधित

इतिहास का पन्ना: बड़कागांव का विस्थापन संघर्ष और 'हाईवा' का खूनी रिकॉर्ड

हजारीबाग का बड़कागांव क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से अपनी उपजाऊ भूमि और बाद में कोयला खनन के लिए प्रसिद्ध हुआ। वर्ष 2004 में जब एनटीपीसी ने यहाँ अपनी खनन परियोजनाओं की शुरुआत की, तब से स्थानीय ग्रामीणों और कंपनी के बीच संघर्ष का एक लंबा इतिहास रहा है। इतिहास गवाह है कि बड़कागांव में अक्टूबर 2016 का चिरूडीह कांड आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जहाँ विस्थापन और हक की लड़ाई में गोलियां चली थीं। पिछले दो दशकों में कृषि प्रधान क्षेत्र से 'माइनिंग हब' बनने के सफर में यहाँ की सड़कें संकरी होती गईं और भारी वाहनों का दबाव बढ़ता गया। रिपोर्ट बताती है कि बड़कागांव-केरेडारी मार्ग पर होने वाले 80% हादसों में एनटीपीसी की परियोजनाओं में लगे हाईवा और डंपर शामिल होते हैं। आज की घटना ने उस पुराने जख्म को फिर से हरा कर दिया है, जहाँ विकास की कीमत स्थानीय लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।

कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी: "इंसान नहीं, डंपर चलते हैं यहाँ"

ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप एनटीपीसी के वाहनों के बढ़ते दबाव और उनके चालकों की मनमानी पर है।

  • असुरक्षित सड़कें: ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों के लिए अलग कॉरिडोर बनाने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है।

  • लापरवाही: आए दिन हो रही मौतों के बावजूद कंपनी प्रबंधन सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहा है।

  • प्रशासन का रुख: स्थानीय पुलिस और अंचलाधिकारी लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि "आश्वासन से पेट नहीं भरता, सुरक्षा की गारंटी चाहिए।"

न्याय की पुकार

तेतरी देवी की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता है। हजारीबाग का यह जाम तब तक शायद ही खुले, जब तक कि प्रशासन इस 'तेल के खेल' और 'मौत की रफ्तार' पर लगाम लगाने का कोई स्थायी रास्ता नहीं निकाल लेता।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।