Gorakhpur Drone Survey: अब शहरी इलाकों में भी मिलेगा ‘घरौनी’ का हक! जानिए कैसे मिलेगा मालिकाना अधिकार?
गोरखपुर में अब ड्रोन सर्वेक्षण के जरिए शहरी इलाकों में भी घरौनी प्रमाण पत्र दिया जाएगा। जानिए कैसे मिलेगा मकान का मालिकाना हक और क्या होंगे नियम?

गोरखपुर: अब सिर्फ ग्रामीण नहीं, बल्कि शहरों में रहने वाले लोगों को भी उनके घरों का मालिकाना हक मिलने वाला है। ड्रोन सर्वेक्षण के जरिए नगर निगम क्षेत्र में भी घरौनी वितरण की तैयारी हो चुकी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस योजना की घोषणा की। उन्होंने बताया कि जिस तरह ग्रामीण इलाकों में ड्रोन सर्वे कराकर मकान मालिकों को घरौनी दी गई थी, अब वही प्रक्रिया शहरी क्षेत्रों में भी लागू की जाएगी।
नगर निगम क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों को अपने घर का कानूनी अधिकार पाने के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ड्रोन मैपिंग से हर मकान की सटीक जानकारी दर्ज की जाएगी, जिससे कर चोरी, अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर भी लगाम लगेगी। इस योजना के तहत जिन लोगों ने आवासीय नक्शा पास कराकर मकान के निचले हिस्से का व्यावसायिक उपयोग किया है, उन्हें भी पूरा कमर्शियल टैक्स देना होगा।
ड्रोन सर्वे से कैसे मिलेगा मालिकाना हक?
शहर के कई हिस्सों में वर्षों से ऐसे लोग रह रहे हैं जिनके पास उनके मकान का कानूनी प्रमाण पत्र (घरौनी) नहीं है। अब ड्रोन सर्वेक्षण के जरिए मकानों की मैपिंग की जाएगी और मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू होगी। नगर निगम के अधिकारी इस पूरे सर्वेक्षण की निगरानी करेंगे।
इस योजना के तहत—
ड्रोन सर्वे कराकर हर मकान का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
हर घर के कानूनी दस्तावेज अपडेट किए जाएंगे।
अवैध निर्माण पर तुरंत नगर निगम की कार्रवाई होगी।
टैक्स चोरी रोकने के लिए मकान के उपयोग के आधार पर सही टैक्स निर्धारित किया जाएगा।
अतिक्रमण करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
अवैध निर्माण और टैक्स चोरी पर कसेगा शिकंजा!
ड्रोन सर्वे के बाद अगर कोई नक्शे से अलग निर्माण करता है, तो उसके हिसाब से नया टैक्स लगाया जाएगा। अगर किसी ने दो मंजिल का नक्शा पास कराकर तीन मंजिल का निर्माण कर लिया है, तो उसे तीन मंजिल के टैक्स के हिसाब से भुगतान करना होगा।
इसके अलावा, अगर किसी ने आवासीय नक्शे पर मकान बनाकर नीचे दुकान चला रखी है, तो उस पूरे मकान का टैक्स कमर्शियल दरों पर वसूला जाएगा। नगर निगम के अधिकारी ड्रोन कैमरों से अतिक्रमण का भी पता लगाएंगे, और यदि किसी ने नाली या सरकारी जमीन पर कब्जा किया है, तो उसे हटाने के साथ-साथ जुर्माना भी वसूला जाएगा।
ग्रामीण मॉडल से शहरी क्षेत्रों तक: क्या है इतिहास?
ग्रामीण इलाकों में कई सालों तक लोगों के पास उनके घरों का कोई कानूनी हक नहीं था। सरकार ने ‘स्वामित्व योजना’ के तहत ड्रोन सर्वेक्षण कराकर घरौनी प्रमाण पत्र दिए, जिससे लाखों लोगों को उनके घर का मालिकाना हक मिला। अब यही प्रक्रिया शहरी क्षेत्रों में भी लागू की जा रही है।
गोरखपुर नगर निगम सदन में इस योजना को लेकर एक बैठक हुई, जिसमें महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, एडीएम प्रशासन पुरुषोत्तम दास गुप्ता, एसडीएम सदर मृणाली अविनाश जोशी, अपर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
शहरी नागरिकों को जल्द मिलेगा उनका कानूनी अधिकार!
शहरी क्षेत्रों में वर्षों से बसे नागरिकों को उनके घर का मालिकाना हक दिलाने की यह ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। सरकार की इस योजना से शहर में प्रॉपर्टी रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा, जिससे फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी के मामले भी कम होंगे।
अब सवाल ये है कि इस योजना का फायदा आम जनता तक कब पहुंचेगा? सरकार जल्द ही इसे लागू करने की तैयारी में है। अगर आप भी गोरखपुर नगर निगम क्षेत्र में रहते हैं और आपके पास अपने घर का कानूनी दस्तावेज नहीं है, तो यह योजना आपके लिए सुनहरा मौका साबित हो सकती है!
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