Garhwa Shocker: पिता ने बेटी और नवजात को बेरहमी से मारा! मेराल थाना क्षेत्र में खूनी साजिश, शव को नदी किनारे गाड़ा, प्रेमी ने खोला राज
गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र के औरैया गांव में अनिल चौधरी नामक एक पिता ने अपनी अविवाहित नाबालिग बेटी और नवजात बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी और शव को नदी किनारे गाड़ दिया। प्रेमी की शिकायत पर पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शवों को बाहर निकाला और आरोपी पिता को गिरफ्तार किया।
झारखंड के गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र स्थित औरैया गांव आज एक ऐसी शर्मनाक और दिल दहला देने वाली घटना का गवाह बना है, जिसने पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया है। यहां एक निर्मम पिता ने अविवाहित नाबालिग बेटी और उसके नवजात बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी। क्रूरता की हद तो तब पार हो गई जब इस हत्या को छिपाने के लिए उसने दोनों शवों को चुपके से नदी किनारे गाड़ दिया। यह सनसनीखेज मामला सामाजिक शर्म के साथ-साथ मानवीय मूल्यों के पतन को दर्शाता है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब नाबालिग बेटी के प्रेमी ने जेल से छूटकर लौटने के बाद अपने बच्चे और प्रेमिका की हत्या की साजिश की जानकारी पुलिस को दी।
प्रेमी को भेजा जेल, फिर रची हत्या की साजिश
आरोपी पिता, जिसकी पहचान अनिल चौधरी के रूप में हुई है, ने पहले समाज और परिवार की इज्जत को बचाने के लिए एक पेचीदा चाल चली थी।
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2 अक्टूबर की घटना: 2 अक्टूबर को अनिल चौधरी की नाबालिग बेटी ने एक बच्चे को जन्म दिया।
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बहला-फुसलाकर जेल: पुलिस सूत्रों के अनुसार, इसके तुरंत बाद आरोपी पिता ने बेटी के प्रेमी को बहला-फुसलाकर किसी अन्य मामले में जेल भिजवा दिया था।
लेकिन बेटी और नवजात की उपस्थिति से आरोपी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इलाके में इज्जत बचने की झूठी शान के लिए उसने अपने ही खून को खत्म करने की भयानक साजिश रची और बेटी व उसके बच्चे को बेरहमी से मार डाला।
प्रेमी की शिकायत से खुला राज
प्रेमी जब जेल से छूटकर अपने घर लौटा, तो उसे पूरे घटनाक्रम और उसके बच्चे की हत्या की साजिश की भनक लगी।
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तत्काल शिकायत: प्रेमी ने बिना देर किए मेराल थाना में इसकी लिखित शिकायत दर्ज करवाई।
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पुलिस की कार्रवाई: सूचना मिलते ही सोमवार को थाना प्रभारी विष्णुकांत और उनकी टीम तुरंत मौके पर गांव पहुंची और तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता अनिल चौधरी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी ने पूछताछ में दोनों हत्याओं और शवों को नदी किनारे दफनाने की बात कबूल कर ली।
मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव निकाले गए
घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी ने अत्यधिक सावधानी बरती। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही के आधार पर मिट्टी खोदकर दोनों शवों को बाहर निकाला।
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कानूनी प्रक्रिया: मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में दोनों शवों को निकाला गया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए गढ़वा सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
थाना प्रभारी विष्णुकांत ने आश्वासन दिया है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस इस जघन्य मामले में दोषियों (आरोपी पिता) के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और सजा दिलाना सुनिश्चित करेगी।
आपकी राय में, झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में इज्जत के नाम पर होने वाली हत्याओं (ऑनर किलिंग) को रोकने के लिए केवल पुलिस की सजा के अलावा कौन सा सामाजिक/शैक्षणिक कदम उठाना सबसे जरूरी है?
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