Shattila Mystery: भूलकर भी न खाएं चावल, एकादशी पर एक गलती ले जाएगी नरक की ओर, जानें महर्षि मेधा के त्याग की अनसुनी कहानी

षटतिला एकादशी 2026 पर चावल खाना आपके पुण्यों को राख कर सकता है। महर्षि मेधा के शरीर त्याग और चावल के सजीव होने के पीछे छिपे उस रोंगटे खड़े कर देने वाले पौराणिक सच की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी अनजाने में किए गए इस महापाप के भयानक परिणाम से कभी बच नहीं पाएंगे।

Jan 13, 2026 - 18:50
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Shattila Mystery: भूलकर भी न खाएं चावल, एकादशी पर एक गलती ले जाएगी नरक की ओर, जानें महर्षि मेधा के त्याग की अनसुनी कहानी
Shattila Mystery: भूलकर भी न खाएं चावल, एकादशी पर एक गलती ले जाएगी नरक की ओर, जानें महर्षि मेधा के त्याग की अनसुनी कहानी

जमशेदपुर/वाराणसी, 13 जनवरी 2026 – साल 2026 की माघ कृष्ण पक्ष की 'षटतिला एकादशी' बस आने ही वाली है। भगवान विष्णु की भक्ति के इस पावन दिन पर व्रत और दान का विशेष महत्व है, लेकिन एक ऐसी वर्जना है जिसे लेकर हर श्रद्धालु के मन में डर और जिज्ञासा दोनों रहती है— एकादशी के दिन चावल का सेवन। हिंदू धर्मशास्त्रों और वैष्णव परंपरा में एकादशी पर चावल खाना 'महापाप' की श्रेणी में रखा गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक साधारण अनाज का संबंध किसी ऋषि के रक्त और मांस से कैसे जुड़ गया? आज हम उस प्राचीन रहस्य से पर्दा उठाएंगे जो आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्यों इस दिन चावल की एक कटोरी आपके पूरे जीवन के संचित पुण्यों को नष्ट कर सकती है।

महर्षि मेधा का बलिदान: चावल में बसती है 'जान'

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी पर चावल न खाने का कारण एक अत्यंत प्राचीन और भावुक कथा से जुड़ा है।

  • माता शक्ति का क्रोध: महर्षि मेधा एक महान तपस्वी थे। एक बार माता शक्ति अपने परम उग्र रूप में उनके समक्ष प्रकट हुईं। माता का वह प्रलयंकारी तेज महर्षि सहन नहीं कर सके और उनके प्राण शरीर से निकल गए।

  • धरती में समाए अंश: जिस क्षण महर्षि का देहांत हुआ, उनके शरीर के पवित्र अंश पृथ्वी के भीतर समा गए। समय के चक्र के साथ, उन्हीं अंशों से 'धान' (चावल) और 'जौ' की उत्पत्ति हुई।

  • एकादशी का संयोग: जिस दिन महर्षि मेधा का शरीर पृथ्वी में विलीन हुआ था, वह 'एकादशी तिथि' थी। यही वजह है कि शास्त्रों में चावल को महर्षि मेधा का जीव स्वरूप माना गया है।

क्यों माना जाता है इसे 'मांस' का सेवन?

धार्मिक मान्यताओं में एकादशी के दिन चावल खाना किसी अनाज को खाना नहीं, बल्कि एक जीवित ऋषि के मांस और रक्त का सेवन करने के समान बताया गया है।

  1. रेंगने वाले जीव की योनि: पद्म पुराण और अन्य शास्त्रों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति एकादशी को चावल खाता है, उसे अगले जन्म में 'रेंगने वाले जीव' (सरीसृप) के रूप में पैदा होना पड़ता है।

  2. चंद्रमा का प्रभाव: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी एकादशी पर चावल वर्जित है। चावल में जल की मात्रा अधिक होती है और एकादशी के दिन चंद्रमा का प्रभाव जल पर सर्वाधिक होता है। चावल खाने से शरीर में जल बढ़ता है, जिससे मन विचलित होता है और व्रत में एकाग्रता भंग होती है।

एकादशी व्रत नियम: क्या खाएं और क्या नहीं? (Vrat Guidelines)

क्या न खाएं (Strictly Forbidden) क्या खाएं (Vrat Special Foods)
चावल (Rice) - किसी भी रूप में कुट्टू का आटा (Buckwheat)
जौ (Barley) - महर्षि मेधा का अंश साबूदाना (Sago)
लहसुन-प्याज (Tamasc Food) सिंघाड़ा आटा (Water Chestnut)
मसूर की दाल ताजे फल और मेवे
शहद दूध और दही

षटतिला एकादशी का विशेष महत्व

माघ महीने की इस एकादशी को 'षटतिला' इसलिए कहते हैं क्योंकि इस दिन 'तिल' का 6 प्रकार से उपयोग किया जाता है।

  • पापमुक्ति का मार्ग: तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल का तर्पण, तिल का भोजन और तिल का दान—ये 6 कर्म व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पापों को धो देते हैं।

  • पूजा का विधान: इस दिन भगवान विष्णु को तिल के लड्डू का भोग लगाया जाता है। याद रखें, भोग में तुलसी दल तो होगा, लेकिन अक्षत (चावल) की जगह तिल का ही प्रयोग किया जाएगा।

श्रद्धा और विज्ञान का संगम

एकादशी पर चावल न खाना केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि संयम और अनुशासन का प्रतीक है। महर्षि मेधा के सम्मान और अपने आध्यात्मिक कल्याण के लिए इस एक दिन का त्याग आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकता है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।