Chatra Tragedy: चतरा में कोयला लदे हाईवा ने स्कूटी को रौंदा, दो युवकों की दर्दनाक मौत, सड़क पर उतरा आक्रोश
चतरा के टंडवा में अनियंत्रित कोयला हाईवा ने दो युवकों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। 50 मीटर तक घसीटे जाने और गुस्साए ग्रामीणों द्वारा किए गए सड़क जाम की पूरी घटना और प्रशासन की विफलता की रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
चतरा/झारखंड, 06 मई 2026 – झारखंड के चतरा जिले के टंडवा प्रखंड में बुधवार की सुबह एक ऐसी चीख गूंजी जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। कोयला ढुलाई में लगे एक अनियंत्रित हाईवा ने स्कूटी सवार दो सगे रिश्तेदारों को इतनी बेरहमी से कुचला कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहन ने दोनों युवकों को करीब 50 मीटर तक घसीटा, जिससे सड़क लहूलुहान हो गई। इस घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
हादसे का मंजर: पिता की मदद करने जा रहे थे युवक
हादसा टंडवा के मजराही इलाके में ब्लॉक मोड़ के पास हुआ। मृतकों की पहचान 30 वर्षीय शशिकांत और 32 वर्षीय सौरभ कुमार के रूप में हुई है।
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मदद का जज्बा बना काल: शशिकांत के पिता शंकर महतो एक ट्रक चालक हैं, जो पिछले तीन दिनों से 'ब्रेकडाउन' ट्रक के साथ भूखे-प्यासे फंसे हुए थे। दोनों युवक उनके लिए नई बैटरी लेकर जा रहे थे ताकि ट्रक ठीक हो सके, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
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रौंदता हुआ निकल गया हाईवा: खाली होकर लौट रहे एक तेज रफ्तार कोल हाईवा ने उनकी स्कूटी को चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कूटी के परखच्चे उड़ गए और हाईवा युवकों को घसीटते हुए आगे बढ़ गया।
ग्रामीणों का आक्रोश: 'कोयला हाईवा का आतंक अब बर्दाश्त नहीं'
घटना के बाद स्थानीय मुखिया महेश मुण्डा के नेतृत्व में सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए।
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मुआवजे की मांग: ग्रामीणों ने मृतकों के परिजनों के लिए तत्काल उचित मुआवजे और दोषी चालक की गिरफ्तारी की मांग की है।
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नियमों की धज्जियां: आरोप है कि बड़कागांव से कोयला लेकर मिश्रोल प्लांट जाने वाले ये भारी वाहन घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी 80-90 की रफ्तार से चलते हैं।
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प्रशासन की चुप्पी: स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोयला परिवहन के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता या गति सीमा तय नहीं की गई है।
सड़कों पर दहशत: क्या थमेगी ये रफ्तार?
हादसे में शामिल हाईवा बड़कागांव से कोयला खाली कर लौट रहा था। इस रूट पर बरवाडीह, सिमरिया और टंडवा जैसे घने इलाके पड़ते हैं।
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अंधाधुंध ड्राइविंग: स्थानीय लोगों का कहना है कि ड्राइवर ट्रिप बढ़ाने के चक्कर में अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं।
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मातम का माहौल: शशिकांत और सौरभ, जो अपने परिवार का सहारा थे, उनके जाने से गांव में मातम पसरा है। तीलीर और कुजू गांव के लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, जाम नहीं हटेगा।
चतरा की यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि उस सिस्टम की नाकामी है जो कोयले के मुनाफे के आगे इंसानी जान की कीमत भूल गया है। क्या प्रशासन अब भी नींद से जागेगा या फिर किसी और घर का चिराग बुझने का इंतजार करेगा? टंडवा के लोगों की मांग जायज है—हमें विकास चाहिए, विनाश नहीं।
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