Chatra Liquor: इटखोरी में नकली शराब की फैक्ट्री का पर्दाफाश, दो लग्जरी कारों से मौत की खेप बरामद, 6 तस्करों के साथ 'जहरीले साम्राज्य' का अंत
चतरा पुलिस ने इटखोरी में छापेमारी कर भारी मात्रा में नकली अंग्रेजी शराब और स्प्रिट का जखीरा बरामद किया है। लग्जरी कारों में तस्करी और घर के भीतर चल रही मिनी शराब फैक्ट्री के इस खौफनाक सच की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप भी ब्रांडेड बोतलों में छिपे इस 'जहरीले खेल' की हकीकत जानने से चूक जाएंगे।
चतरा/इटखोरी, 24 जनवरी 2026 – झारखंड के चतरा जिले में 'मौत के सौदागरों' के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी स्ट्राइक की है। इटखोरी थाना क्षेत्र में ब्रांडेड बोतलों के भीतर नकली शराब भरकर लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। डीएसपी अमिता लकड़ा और थाना प्रभारी अभिषेक सिंह की जांबाज टीम ने न केवल सड़कों पर तस्करों की घेराबंदी की, बल्कि उनके गुप्त ठिकानों तक पहुँचकर उस 'जहरीली प्रयोगशाला' को भी ध्वस्त कर दिया जहाँ स्प्रिट से शराब तैयार की जा रही थी। इस कार्रवाई में 6 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसके बाद पूरे इलाके के शराब माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
नगवां पुल पर 'ऑपरेशन चेकमेट': काली कार और सफेद राज
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि नकली शराब की एक बड़ी खेप बिहार सीमा की ओर ले जाई जा रही है।
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ट्रैप: नगवां पुल के पास घेराबंदी की गई।
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बरामदगी: एक काली हुंडई कार और एक बिना नंबर वाली सफेद कार को जब रोका गया, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। दोनों कारों के भीतर 21 पेटी नकली अंग्रेजी शराब ठूंस-ठूंस कर भरी गई थी।
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डिजिटल सबूत: तस्करों के पास से 6 मोबाइल फोन भी मिले हैं, जिनमें इस सिंडिकेट के कई और सफेदपोशों के राज छिपे हो सकते हैं।
नीतीश के घर में मिली 'मौत की भट्टी'
पकड़े गए तस्करों की निशानदेही पर पुलिस ने जब गुल्ली पारगढ़ा टोला निवासी नीतीश यादव के घर पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देख अधिकारी सन्न रह गए।
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कच्चा माल: वहां से 60 लीटर स्प्रिट बरामद किया गया।
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पैकेजिंग यूनिट: हजारों की संख्या में खाली बोतलें, ढक्कन और नामी कंपनियों के नकली रैपर मिले।
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मैन्युफैक्चरिंग: यहाँ शराब सप्लाई ही नहीं होती थी, बल्कि ब्रांडेड बोतलों में नकली मिलावट कर उसे नया रूप दिया जाता था।
चतरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: एक नजर में (Seizure List)
| विवरण | जब्त सामान और गिरफ्तारियां (Details) |
| नकली शराब | 21 पेटी (ब्रांडेड लेबल के साथ) |
| कच्चा माल | 60 लीटर स्प्रिट और हजारों ढक्कन |
| वाहन | 2 लग्जरी कारें (हुंडई और सफेद कार) |
| गिरफ्तार तस्कर | नीतीश, संजय, सौरभ, अभिषेक, सतीश और टिंकू |
| टीम लीडर | DSP अमिता लकड़ा एवं SHO अभिषेक सिंह |
इतिहास का पन्ना: इटखोरी और 'सिल्क रूट' पर शराब की तस्करी का भूगोल
चतरा का इटखोरी इलाका ऐतिहासिक रूप से बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित होने के कारण हमेशा से व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। 1990 के दशक में जब झारखंड (तत्कालीन बिहार) के इस क्षेत्र में वन संपदा का दोहन बढ़ा, तब तस्करों ने इन गुप्त रास्तों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए शुरू किया। इतिहास गवाह है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद चतरा के सीमावर्ती इलाके 'सप्लाई हब' बन गए। पुराने समय में महुआ की कच्ची शराब का प्रचलन था, लेकिन 2010 के बाद 'नकली अंग्रेजी शराब' बनाने का ट्रेंड बढ़ा क्योंकि इसमें मुनाफा ज्यादा और पकड़े जाने का जोखिम कम माना जाता था। आज 2026 में, नीतीश यादव जैसे तस्करों ने जिस तरह आधुनिक तकनीक और लग्जरी कारों का इस्तेमाल शुरू किया है, वह चतरा के इस 'तस्करी इतिहास' का सबसे खतरनाक मोड़ है। पुलिस की यह कार्रवाई उसी ऐतिहासिक अपराध चक्र को तोड़ने की एक बड़ी कोशिश है।
पुलिस की चेतावनी: "जान से खिलवाड़ करने वाले नहीं बचेंगे"
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीएसपी अमिता लकड़ा ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि नकली शराब पीना धीमी मौत के बराबर है।
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नेटवर्क पर नजर: पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस नकली शराब के लेबल और ढक्कन कहाँ छापे जा रहे थे।
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मयूरहंड कनेक्शन: इस पूरे अभियान में मयूरहंड थाना प्रभारी आशीष कुमार की टीम ने भी बैकअप के रूप में अहम भूमिका निभाई, जिससे तस्करों को भागने का मौका नहीं मिला।
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न्यायिक हिरासत: गिरफ्तार किए गए सभी 6 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और उनके पुराने आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है।
ब्रांड के पीछे छिपा 'जहर'
इटखोरी की इस रेड ने साफ कर दिया है कि हर चमकती बोतल में असली शराब नहीं होती। पुलिस की मुस्तैदी ने सैकड़ों लोगों को जहरीली शराब का शिकार होने से बचा लिया है।
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