Ranchi Tragedy: रांची में 11 हजार वोल्ट के तार ने दूल्हे को निगला, 12 दिन पहले हुई थी शादी
रांची के छोटा तालाब में हाई वोल्टेज तार की चपेट में आने से एक नवविवाहित युवक की दर्दनाक मौत हो गई। 25 अप्रैल को हुई शादी की खुशियां कैसे मातम में बदलीं और बिजली विभाग पर भड़के परिजनों की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/झारखंड, 07 मई 2026 – झारखंड की राजधानी रांची के छोटा तालाब इलाके में गुरुवार को एक ऐसा हृदयविदारक हादसा हुआ, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। महज 12 दिन पहले जिस घर में शहनाइयां गूंजी थीं, वहां आज चीख-पुकार मची है। 11 हजार वोल्ट के हाई-टेंशन बिजली तार की चपेट में आने से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है और परिजनों ने बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
हादसे का मंजर: 12 दिन में उजड़ गया सिंदूर
मृतक की पहचान मो. समीर के रूप में हुई है। समीर की जिंदगी में खुशियों ने अभी दस्तक दी ही थी, लेकिन काल बनकर दौड़ रहे बिजली के तारों ने सब कुछ खत्म कर दिया।
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शादी की खुशियां बनीं मातम: मो. समीर का निकाह इसी साल 25 अप्रैल को हुआ था। घर में अभी शादी की मिठाइयां भी खत्म नहीं हुई थीं और दुल्हन के हाथों की मेहंदी का रंग भी गहरा था, कि इस करंट ने हँसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया।
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लापरवाही की इंतहा: स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में 11 हजार वोल्ट के तार काफी नीचे झूल रहे हैं और नंगे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद विभाग ने इन्हें ठीक नहीं किया, जिसका नतीजा आज समीर की मौत के रूप में सामने आया है।
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परिजनों की मांग: आक्रोशित परिजनों ने शव के साथ विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि विभाग अपनी गलती स्वीकार करे और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने के साथ-साथ एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
पुलिस की कार्रवाई: जांच में जुटा प्रशासन
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची और आक्रोशित भीड़ को समझाने का प्रयास किया।
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शव का पोस्टमार्टम: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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विभागीय जांच: पुलिस ने बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JE) से संपर्क किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि तार इतने नीचे क्यों थे और क्या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हुआ है।
सड़कों पर आक्रोश: 'समीर को न्याय दो'
हादसे के बाद छोटा तालाब इलाके में सन्नाटा है, लेकिन लोगों के दिलों में गुस्सा भरा है।
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खुले मौत के फंदे: स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे बिजली विभाग के लिए केवल 'उपभोक्ता' हैं, इंसान नहीं। बार-बार गुहार लगाने पर भी नंगे तारों को कवर नहीं किया जाता।
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दुल्हन का हाल: समीर की पत्नी और माँ का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे मोहल्ले की आँखें नम हैं क्योंकि समीर एक मिलनसार और मेहनती युवक था।
रांची की यह घटना एक प्रशासनिक हत्या है। जब तक बिजली विभाग अपनी लापरवाही को 'हादसा' कहता रहेगा, तब तक समीर जैसे मासूम अपनी जान गंवाते रहेंगे। 25 अप्रैल को बंधा सेहरा 7 मई को कफन में बदल गया, इसका जिम्मेदार कौन है? प्रशासन को चाहिए कि वह केवल जांच का आश्वासन न दे, बल्कि पूरे शहर के उन 'डेथ जोन' को चिह्नित करे जहाँ मौत के तार खुलेआम लटक रहे हैं।
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