Sahibganj Strike: साहिबगंज में गन फैक्ट्री का भंडाफोड़, बिहार एसटीएफ और रांगा पुलिस की छापेमारी, बरामद हुए आधुनिक हथियार
साहिबगंज के रांगा थाना क्षेत्र में सालों से चल रही अवैध गन फैक्ट्री का बिहार एसटीएफ ने खुलासा किया है। बंद घर के चार ताले तोड़कर अंदर पहुंची पुलिस को मिले 16 अर्धनिर्मित पिस्टल और आधुनिक लेथ मशीनों की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें।
साहिबगंज/झारखंड, 07 मई 2026 – झारखंड के साहिबगंज जिले में सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी लापरवाही और बिहार एसटीएफ की मुस्तैदी का बड़ा मामला सामने आया है। रांगा थाना क्षेत्र के आमगाछी केंदुआ ईदगाह के पास एक साधारण से दिखने वाले बंद घर के भीतर सालों से 'मौत का सामान' तैयार किया जा रहा था। गुरुवार को जब बिहार एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से घर के चार ताले तोड़कर भीतर प्रवेश किया, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। सालों से चल रही इस मिनी गन फैक्ट्री की भनक स्थानीय पुलिस को हवा तक नहीं थी।
एसटीएफ की स्ट्राइक: ऐसे खुला 'बंद कमरे' का राज
इस पूरी कार्रवाई की पटकथा बिहार में कुछ अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद लिखी गई थी।
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बिहार से मिले सुराग: बिहार में हाल ही में पकड़े गए बदमाशों ने पूछताछ में साहिबगंज के इस ठिकाने का खुलासा किया। इसके बाद बिहार एसटीएफ ने साहिबगंज पुलिस से संपर्क साधा और गुप्त मिशन को अंजाम दिया।
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ताला तोड़कर एंट्री: पुलिस जब आमगाछी स्थित उस घर पर पहुँची, तो वह बाहर से बंद था। एक-एक कर चार ताले तोड़े गए। घर के भीतर आधुनिक लेथ मशीनें और पिस्टल बनाने के कई बड़े उपकरण मौजूद थे।
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हथियारों का जखीरा: मौके से 16 अर्धनिर्मित पिस्टल, भारी मात्रा में मैगजीन और हथियार बनाने वाले आधुनिक कटर व मशीनें बरामद की गईं। यह फैक्ट्री केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार के अंडरवर्ल्ड को भी हथियारों की सप्लाई कर रही थी।
पड़ोसियों की खामोशी और माफिया का नेटवर्क
हैरानी की बात यह है कि इस घनी आबादी वाले मुहल्ले में किसी को कानों-कान खबर नहीं थी।
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बाहरी लोगों का ठिकाना: स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मुहल्ले में अधिकतर जमीनें बाहर से आए लोगों ने खरीदी हैं। गृहस्वामी कौन है और घर के अंदर क्या चलता था, इसकी जानकारी पड़ोसियों को भी नहीं थी।
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अदृश्य फैक्ट्री: सालों से चल रही इस फैक्ट्री ने कभी कोई शोर या संदिग्ध गतिविधि बाहर नहीं आने दी, जिससे यह साहिबगंज पुलिस की रडार से बाहर रही।
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पुलिस का घेरा: छापेमारी के दौरान बरहड़वा एसडीपीओ नितिन खंडेलवाल और कई थाना प्रभारी मौजूद रहे। फिलहाल उस घर को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
सुरक्षा पर सवाल: खुफिया तंत्र की नाकामी?
यह घटना झारखंड पुलिस के खुफिया तंत्र (Intelligence) पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
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सालों का सन्नाटा: एक फैक्ट्री सालों तक चलती रही और स्थानीय पुलिस को पता तक नहीं चला, यह बड़ी चूक है।
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जांच का दायरा: पुलिस अब उस मकान मालिक की तलाश कर रही है जिसने यह घर किराए पर दिया था या जो इसका असली मालिक है। साथ ही उन कारीगरों की पहचान की जा रही है जो लेथ मशीनों पर पिस्टल गढ़ रहे थे।
साहिबगंज में मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ होना एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन यह इस बात का भी संकेत है कि अपराध की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। बिहार एसटीएफ की इनपुट ने एक बड़े खतरे को टाल दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या पुलिस उन 'सफेदपोश' लोगों तक पहुँच पाती है जो इस अवैध फैक्ट्री को फाइनेंस कर रहे थे। साहिबगंज की गलियों में छिपे ऐसे और भी राज हो सकते हैं जिन्हें बेनकाब करना अभी बाकी है।
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