Chandil Disaster: रेलवे ट्रैक पर गिरते-गिरते बचा ट्रक, बाल-बाल बची सैकड़ों यात्रियों की जान!
चांडिल में रेलवे ट्रैक के पास खाई में गिरते-गिरते बचा ट्रक, अगर नीचे गिरता तो बड़ा रेल हादसा हो सकता था। जानें, रेलवे और प्रशासन की तत्परता ने कैसे टाला बड़ा संकट?

झारखंड के चांडिल थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा डिवीजन अंतर्गत टाटानगर-चांडिल रेलखंड पर मानीकुई के समीप एक ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गया।
गनीमत रही कि ट्रक रेलवे ट्रैक तक नहीं पहुंचा, वरना सैकड़ों यात्रियों की जान पर बन आती। रेलवे प्रशासन तुरंत हरकत में आया और रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। आखिर यह हादसा कैसे हुआ? अगर ट्रक रेल लाइन पर गिर जाता, तो क्या यह भारत के सबसे भीषण रेल हादसों में से एक हो सकता था? आइए, इस घटना की पूरी कहानी जानते हैं।
कैसे हुआ हादसा? क्या ड्राइवर की गलती थी या सड़क की खतरनाक स्थिति?
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यह यूपी-21सीटी-0829 नंबर का ट्रक टाटानगर से चांडिल की ओर जा रहा था।
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अचानक मानीकुई के पास ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में पलट गया।
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खाई में गिरने के बाद ट्रक बीच में ही अटक गया।
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अगर ट्रक थोड़ा और नीचे फिसलता, तो सीधे रेलवे ट्रैक पर गिर सकता था, जिससे भयानक ट्रेन दुर्घटना हो सकती थी।
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रेलवे प्रशासन को जैसे ही घटना की सूचना मिली, आद्रा डिवीजन की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची और ऑपरेशन शुरू किया।
इस हादसे के बाद एक सवाल उठता है – क्या इस जगह पर पहले भी सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं? रेलवे ट्रैक के किनारे इतनी खतरनाक सड़क होने का क्या कोई समाधान निकाला गया है?
रेलवे को भारी नुकसान से कैसे बचाया गया?
ट्रक के रेलवे ट्रैक तक न पहुंचने की गनीमत रही, लेकिन रेलवे प्रशासन ने कोई जोखिम नहीं लिया।
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रेलवे ने तुरंत इस रूट पर ट्रेनों के संचालन में सावधानी बरतनी शुरू कर दी।
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युद्धस्तर पर ट्रक को निकालने का काम शुरू हुआ।
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रेलवे अधिकारी डीआरएम तरुण हुरिया खुद मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
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रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी, और चांडिल व कांड्रा पुलिस की टीम भी वहां मौजूद रही।
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रेलवे की रेस्क्यू टीम ने पूरी रात ऑपरेशन चलाया ताकि रेल ट्रैक को किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सके।
क्या हुआ ड्राइवर का? मौत के मुंह से कैसे बची जान?
इस खतरनाक हादसे के बावजूद ट्रक का ड्राइवर बाल-बाल बच गया।
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जब ट्रक खाई में गिरा, तो ड्राइवर किसी तरह कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहा।
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यह एक चमत्कार से कम नहीं था, क्योंकि ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर ट्रक सीधा रेल ट्रैक पर गिरता, तो ट्रेनों की टक्कर से सैकड़ों यात्री मारे जा सकते थे।
रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस अब जांच कर रही है कि आखिर ट्रक अनियंत्रित कैसे हुआ?
क्या होता अगर ट्रक रेल ट्रैक पर गिर जाता?
अगर यह ट्रक रेलवे लाइन पर गिर जाता, तो न केवल रेलवे को बड़ा नुकसान होता बल्कि कई यात्रियों की जान भी जा सकती थी।
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इस रूट से रोजाना कई महत्वपूर्ण ट्रेनें गुजरती हैं, जैसे हावड़ा-मुंबई मेल, टाटा-आसनसोल एक्सप्रेस, और लोकल ट्रेनें।
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अगर ट्रक ट्रैक पर गिरता, तो अचानक ब्रेक लगाना असंभव हो जाता और एक बड़ा हादसा हो सकता था।
रेलवे ने इस घटना के बाद सुरक्षा उपायों को और कड़ा करने का फैसला किया है।
क्या पहले भी इस इलाके में हुए हैं ऐसे हादसे?
यह पहला मौका नहीं है जब रेलवे ट्रैक के किनारे वाहनों के गिरने का खतरा बना हो।
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इससे पहले भी कई बार तेज रफ्तार ट्रक या बसें रेल पटरियों के करीब गिर चुकी हैं।
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कई हादसों में रेल लाइन क्षतिग्रस्त हुई है, जिससे ट्रेनों के संचालन में घंटों देरी हुई।
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यह सवाल उठता है कि क्या रेलवे प्रशासन इस जगह पर सुरक्षा दीवार बनाएगा?
रेलवे और सड़क विभाग को इस जगह पर सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसा हादसा दोबारा न हो।
रेलवे और पुलिस प्रशासन की सतर्कता ने बचाई सैकड़ों यात्रियों की जान
रेलवे प्रशासन और पुलिस की तत्परता से यह हादसा एक बड़े रेल दुर्घटना में बदलने से बच गया।
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रेलवे की पूरी टीम रातभर ऑपरेशन में जुटी रही।
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डीआरयूसीसी मेंबर दिवाकर सिंह ने कहा कि रेलवे हर कदम पर सतर्कता बरत रहा है ताकि किसी भी तरह का खतरा न हो।
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ट्रेनों का संचालन अब पूरी तरह सुरक्षित कर दिया गया है।
क्या सबक मिला इस हादसे से?
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रेलवे ट्रैक के पास सुरक्षा के और कड़े उपाय करने होंगे।
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ट्रक और भारी वाहनों के लिए इस इलाके में स्पीड लिमिट तय करनी होगी।
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प्रशासन को यह देखना होगा कि सड़कों की स्थिति बेहतर हो ताकि इस तरह की घटनाएं न हों।
यह हादसा एक चेतावनी है कि अगर समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
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