Parliament Waqf Bill: लोकसभा में पेश होने से पहले घमासान, विपक्ष ने बताया 'साजिश'
लोकसभा में पेश होने जा रहे Waqf Amendment Bill पर जबरदस्त सियासी घमासान मचा हुआ है। सरकार इसे पारदर्शिता के लिए जरूरी बता रही है, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक आजादी पर हमला मान रहा है। जानें क्या है पूरा मामला।

नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को पेश होने जा रहे Waqf Amendment Bill पर सियासी पारा चढ़ चुका है। सरकार का दावा है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रशासन और पारदर्शिता के लिए लाया जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे संविधान के खिलाफ और राजनीतिक एजेंडा से प्रेरित बता रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), DMK, तृणमूल कांग्रेस (TMC), शिवसेना (UBT), आम आदमी पार्टी (AAP), NCP (SP) और AIMIM सहित पूरा विपक्ष सरकार के खिलाफ लामबंद हो चुका है।
विपक्ष का आरोप: ‘धार्मिक अधिकारों पर हमला’
INDIA गठबंधन ने बिल को मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और कानूनी अधिकारों के खिलाफ बताया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे ‘न्याय और समानता के खिलाफ’ बताते हुए कहा कि सरकार इस बिल के जरिए वक्फ संपत्तियों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे ‘संविधान पर हमला’ बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार समाज की बहुसांस्कृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाना चाहती है।
सरकार का पक्ष: ‘वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता जरूरी’
केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह संशोधन बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों, अवैध कब्जों, मिसमैनेजमेंट और कानूनी अड़चनों को खत्म करेगा। सरकार का कहना है कि "एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ" की परिभाषा को लेकर लंबे समय से विवाद हैं, क्योंकि इसमें कोई न्यायिक निगरानी नहीं थी। वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों को ऊपरी अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती थी, जिससे गड़बड़ियों को बढ़ावा मिला।
सरकार ने यह भी कहा कि एक डिजिटल पोर्टल और डेटाबेस के जरिए वक्फ संपत्तियों की ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन, सर्वेक्षण, लीजिंग और ऑडिट की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके अलावा, धारा 32(4) के तहत वक्फ बोर्ड को यह अधिकार मिलेगा कि वे वक्फ जमीनों पर स्कूल, बाजार और आवासीय परियोजनाएं विकसित कर सकें।
इतिहास में वक्फ कानून और विवाद
भारत में वक्फ संपत्तियों का इतिहास मुगल काल से जुड़ा है। वक्फ का मतलब ऐसी संपत्ति से है, जिसे किसी धार्मिक या सामाजिक कल्याणकारी कार्य के लिए स्थायी रूप से समर्पित किया जाता है। 1954 में पहला वक्फ कानून लाया गया था, जिसे 1995 में संशोधित किया गया। समय-समय पर वक्फ बोर्डों पर संपत्तियों की हेराफेरी, अवैध कब्जे और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।
संशोधन पर विपक्ष की आपत्तियां
विपक्ष के अनुसार, सरकार वक्फ से जुड़े संस्थानों की स्वायत्तता खत्म करना चाहती है। कांग्रेस ने बिल को पांच बड़े बिंदुओं पर ‘गलत’ बताया है:
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वक्फ प्रबंधन से जुड़े संस्थानों की स्वायत्तता घटाई जा रही है।
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वक्फ संपत्ति दान करने की प्रक्रिया को जटिल बनाया जा रहा है।
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‘वक्फ-बाय-यूजर’ की परंपरा खत्म की जा रही है।
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कलेक्टर और राज्य सरकार को वक्फ संपत्तियों पर ज्यादा अधिकार दिए जा रहे हैं।
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अवैध कब्जाधारियों को कानूनी सुरक्षा दी जा रही है।
संशोधन से कौन होगा प्रभावित?
अगर यह बिल पास होता है तो इसका असर देशभर की लाखों वक्फ संपत्तियों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि यह पारदर्शिता और न्यायिक निगरानी लाएगा, जबकि विपक्ष को डर है कि इससे धार्मिक संस्थानों पर सरकारी दखल बढ़ जाएगा।
बिल पर सियासी घमासान जारी
संशोधित वक्फ बिल पर संसद में जबरदस्त बहस होने की संभावना है। जहां सरकार इसे ‘सुधारात्मक कदम’ बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘धार्मिक आजादी पर हमला’ करार दे रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि यह बिल पास होता है या संसद में जोरदार विरोध के चलते इसे रोक दिया जाता है।
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