Sahara Scam Investigation: झारखंड सरकार ने सहारा घोटाले की जांच के लिए बड़ा कदम उठाया, निवेशकों को मिलेगा उनका पैसा?
झारखंड सरकार ने सहारा घोटाले की जांच के लिए बड़ा कदम उठाया! निवेशकों को मिलेगा उनका पैसा? जांच आयोग करेगा घोटाले की गहराई से जांच। जानें पूरी खबर।

झारखंड सरकार ने सहारा समूह द्वारा किए गए घोटाले और धोखाधड़ी की गहन जांच के लिए एक जांच आयोग गठित करने का फैसला किया है। यह आयोग उन हजारों निवेशकों की समस्याओं को हल करने के लिए काम करेगा, जो सहारा में अपना पैसा फंसा चुके हैं और वर्षों से न्याय की उम्मीद में बैठे हैं।
कैसा होगा जांच आयोग?
सरकार ने इस आयोग को पूरी तरह से स्वतंत्र और पारदर्शी बनाने के लिए झारखंड हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश को इसका अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला किया है।
सदस्य सचिव – झारखंड सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी होंगे।
अन्य सदस्य – एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और एक अधिवक्ता भी इसमें शामिल होंगे।
पुलिस मुख्यालय – आयोग के गठन की प्रक्रिया में शामिल होगा और ड्राफ्ट तैयार करेगा।
सरकार जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 3 के तहत यह जांच आयोग गठित करेगी।
कौन हैं सबसे ज्यादा प्रभावित?
सहारा समूह के इस घोटाले ने लाखों लोगों को आर्थिक रूप से तोड़ कर रख दिया। खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार, जिन्होंने सहारा की अलग-अलग योजनाओं में अपने जीवनभर की जमा पूंजी लगा दी थी।
सबसे ज्यादा नुकसान इन निवेशकों को हुआ:
जिनका पैसा फंसा हुआ है, लेकिन वे सीआरसीएस सहारा रिफंड पोर्टल पर अपना दावा नहीं कर पा रहे।
जिनके पास सहारा समूह द्वारा जारी किए गए निवेश के सारे दस्तावेज नहीं हैं।
जिनके दावे पोर्टल पर खारिज कर दिए गए।
जिन परिवारों के सदस्य सहारा घोटाले की वजह से आत्महत्या करने को मजबूर हुए।
कैसे मिलेगा निवेशकों को उनका पैसा?
यह जांच आयोग सहारा घोटाले के सभी पीड़ितों का एक व्यापक डेटा तैयार करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जिन निवेशकों का पैसा सहारा समूह में फंसा है, उन्हें उनकी राशि वापस दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
मृत निवेशकों के कानूनी उत्तराधिकारियों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया तैयार की जाएगी।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पीड़ितों की शिकायतों को दर्ज किया जाएगा।
ग्रामीण और अशिक्षित निवेशकों के लिए विशेष हेल्पलाइन और शिविर लगाए जाएंगे।
यदि SEBI या CRCS पैसा लौटाने में असमर्थ रहते हैं, तो झारखंड सरकार अंतरिम राहत दे सकती है।
कैसे हुआ था सहारा घोटाला?
सहारा समूह भारत के सबसे बड़े चिटफंड घोटालों में से एक का केंद्र रहा है। 2010 में SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने पाया कि सहारा समूह ने गलत तरीके से करोड़ों रुपए जुटाए और निवेशकों को गुमराह किया।
2014 में, सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अभी तक सभी निवेशकों को उनका पैसा वापस नहीं मिला। SEBI के पास 25,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की सहारा निवेशकों की रकम जमा है, लेकिन निवेशकों को इसे हासिल करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या सरकार वाकई पैसा दिला पाएगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आयोग सहारा के निवेशकों को उनका हक दिला पाएगा?
क्या SEBI और CRCS निवेशकों के पैसे वापस करने के लिए तैयार होंगे?
अगर SEBI पैसा देने में असमर्थ होता है, तो क्या राज्य सरकार निवेशकों को राहत देगी?
क्या सरकार सहारा समूह की अन्य संपत्तियों को जब्त करके पीड़ितों को मुआवजा देगी?
आगे क्या होगा?
झारखंड सरकार का यह फैसला उन लाखों निवेशकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस योजना को पूरी तरह से लागू कर पाती है या यह सिर्फ एक चुनावी रणनीति बनकर रह जाएगी।
What's Your Reaction?






