Chaibasa Police Raid: चक्रधरपुर में पिकअप वैन से 4 गोवंश जब्त, ओडिशा के दो तस्कर गिरफ्तार, एक फरार

पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पिकअप वैन से चार गोवंशीय पशु जब्त किए। दो आरोपी गिरफ्तार, एक फरार। ओडिशा से जुड़े तस्करी रैकेट का खुलासा।

Sep 26, 2025 - 20:26
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Chaibasa Police Raid: चक्रधरपुर में पिकअप वैन से 4 गोवंश जब्त, ओडिशा के दो तस्कर गिरफ्तार, एक फरार
Chaibasa Police Raid: चक्रधरपुर में पिकअप वैन से 4 गोवंश जब्त, ओडिशा के दो तस्कर गिरफ्तार, एक फरार

पश्चिमी सिंहभूम जिला की चक्रधरपुर थाना पुलिस ने शुक्रवार को अवैध पशु तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर एक पिकअप वैन को जब्त किया। इस वैन से चार गोवंशीय पशु बरामद किए गए। पुलिस ने मौके से चालक और खलासी को गिरफ्तार कर चाईबासा जेल भेज दिया है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार हो गया।

गुप्त सूचना ने बचाई मासूम जानें

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक पिकअप वैन से गोवंशों की तस्करी चक्रधरपुर से सोनुआ की ओर की जा रही है। सूचना की पुष्टि के बाद थाना प्रभारी ने वरीय अधिकारियों को जानकारी दी और कार्रवाई का प्लान तैयार किया।

सुबह करीब साढ़े सात बजे चक्रधरपुर थाना गेट के पास जैसे ही ओडी 04 एफ 5957 नंबर की पिकअप वैन दिखी, पुलिस ने उसे रोककर तलाशी ली। इसमें चार गोवंशीय पशु ठूंस-ठूंस कर लादे गए थे।

गिरफ्तार आरोपी ओडिशा के

पुलिस ने वैन के चालक शरत चंद्र महांता (41), निवासी- क्योंझर जिला, ओडिशा और खलासी लक्ष्मण बारिक (36), निवासी- जाजपुर जिला, ओडिशा को मौके पर गिरफ्तार कर लिया। दोनों को न्यायिक हिरासत में चाईबासा जेल भेजा गया है।

थाना प्रभारी अवधेश कुमार ने बताया कि इस मामले में एक तीसरा आरोपी नितीश यादव, निवासी कुदलीबाड़ी (चक्रधरपुर) फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी अभियान जारी है।

मामला दर्ज, जांच तेज

चक्रधरपुर थाने में इस मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने वैन और उसमें लदे सभी चार गोवंशों को जब्त कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वे इन पशुओं को कहां ले जा रहे थे और इसके पीछे कौन-कौन शामिल है।

क्यों बढ़ रही है गोवंश तस्करी?

झारखंड-ओडिशा की सीमा लंबे समय से पशु तस्करी का हॉटस्पॉट मानी जाती है। ग्रामीण इलाकों से पशुओं को अवैध रूप से पकड़कर छोटे ट्रकों और पिकअप वैन में भरकर सीमा पार ले जाया जाता है। वहां से इन्हें बंगाल और असम तक भेजा जाता है।

इतिहास पर नजर डालें तो, 2015 और 2019 में भी चाईबासा पुलिस ने इसी तरह की कार्रवाई में दर्जनों गोवंशीय पशुओं को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया था। हर बार गिरफ़्तारी होती है, लेकिन कुछ दिनों बाद वही नेटवर्क फिर सक्रिय हो जाता है।

पुलिस की सतर्कता और स्थानीय चुनौती

चक्रधरपुर थाना पुलिस की यह कार्रवाई स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की तस्करी अक्सर रात के अंधेरे में होती है। कई बार लोगों ने शिकायत की, लेकिन तस्कर बच निकलते थे। इस बार पुलिस ने सतर्कता दिखाई और वैन को पकड़ने में सफलता हासिल की।

अवैध तस्करी का बड़ा नेटवर्क

विशेषज्ञ बताते हैं कि पशु तस्करी महज एक अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है, जिसमें स्थानीय स्तर से लेकर सीमावर्ती राज्यों तक के लोग शामिल होते हैं। पुलिस को अक्सर सीमावर्ती जिलों में इस नेटवर्क से जूझना पड़ता है।

प्रशासन का संदेश

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फरार आरोपी की गिरफ्तारी जल्द होगी और रैकेट से जुड़े अन्य लोगों तक भी पुलिस की पहुंच बनेगी।

चक्रधरपुर में हुई यह कार्रवाई केवल चार गोवंशों की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस संगठित रैकेट पर चोट है जो वर्षों से इस इलाके में सक्रिय है। अब देखना होगा कि क्या पुलिस इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंच पाती है या फिर यह तस्करी एक बार फिर नए रास्ते तलाश लेगी।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।