Barkagaon Distribution: रामनवमी पर बड़कागांव में बांटे गए अस्त्र-शस्त्र, अखाड़ों को मिला खास संदेश!
बड़कागांव में रामनवमी महासमिति ने अखाड़ों के बीच अस्त्र-शस्त्र बांटे, शांति और भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील, जानें इस आयोजन की खास बातें।

बड़कागांव: रामनवमी महापर्व की तैयारियां जोरों पर हैं, और इसी कड़ी में रामनवमी महासमिति ने बड़कागांव के 13 अखाड़ों के बीच अस्त्र-शस्त्र का वितरण किया। महासमिति के अध्यक्ष विवेक सोनी ने इस दौरान सभी अखाड़ा प्रमुखों और क्लब प्रतिनिधियों को 11-11 लाठियां और 2-2 तलवारें प्रदान कीं। इस आयोजन में शांति और सौहार्द्र का संदेश दिया गया, साथ ही अखाड़ों को परंपरागत कला और लाठी-तलवार के करतब दिखाने का निर्देश भी दिया गया।
रामनवमी और अखाड़ों की ऐतिहासिक परंपरा
रामनवमी केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण पर्व है। झारखंड समेत पूरे भारत में रामनवमी के दौरान अखाड़ों की परंपरा सदियों पुरानी है। यह परंपरा धार्मिक श्रद्धा और शारीरिक कौशल दोनों का संगम मानी जाती है। खासकर बड़कागांव जैसे क्षेत्रों में लाठी, तलवार और शस्त्र संचालन का प्रदर्शन एक पारंपरिक कला के रूप में देखा जाता है। इस बार भी महासमिति के मार्गदर्शन में अखाड़ों को अस्त्र-शस्त्र वितरित कर इस परंपरा को आगे बढ़ाया गया।
शांति और सौहार्द्र का संदेश
इस मौके पर विवेक सोनी ने सभी अखाड़ों को शांति और भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की। उन्होंने कहा,
"रामनवमी सिर्फ शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सभी धर्मों और जातियों के प्रति सम्मान का पर्व है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि जुलूस में किसी प्रकार का तनाव न हो और हम अपने करतबों के जरिए समाज में सकारात्मक संदेश दें।"
क्या खास रहा इस आयोजन में?
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13 अखाड़ों को अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए गए।
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हर अखाड़े को 11 लाठियां और 2 तलवारें दी गईं।
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सभी प्रमुख अखाड़ा प्रमुख और क्लब के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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रामनवमी के दौरान पारंपरिक करतब दिखाने का निर्देश दिया गया।
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अखाड़ों से सौहार्द्रपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील की गई।
उत्साह और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर
रामनवमी के दौरान झांकी जुलूस और अखाड़ों के करतब लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। इस आयोजन में भी सभी प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। सुरक्षा को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि जुलूस और उत्सव के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो।
उपस्थित प्रमुख लोग
इस अवसर पर मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष रंजीत कुमार, महासमिति के सचिव बैजनाथ महतो, कोषाध्यक्ष दिनेश सिन्हा, उपाध्यक्ष पंकज कुमार, सुरेंद्र कुमार, उपसचिव अभिषेक तिवारी, सरोज कुमार, नरेंद्र कुमार राम, सोनू कुमार, वीरेंद्र कुमार, अनु विश्वकर्मा, रवि पासवान, चोहन साव, बसंत कुमार साहू, पवन रजक, अंगेश राणा, आशीष सोनी, रवि ठाकुर और सुरेंद्र शाह सहित कई अन्य गणमान्य लोग शामिल थे।
रामनवमी जुलूस और पारंपरिक महत्व
रामनवमी का जुलूस भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। प्राचीन काल से ही यह परंपरा चली आ रही है, जहां राम भक्त अपने शौर्य और भक्ति को प्रदर्शित करते हैं। खासकर झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में लाठी और तलवार के करतब रामनवमी का मुख्य आकर्षण होते हैं। यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं को शारीरिक दक्षता और संस्कारों की सीख देने का भी एक जरिया है।
समाज को एकजुट करने का पर्व
रामनवमी सिर्फ भगवान राम की जयंती ही नहीं, बल्कि यह समाज में एकता, शांति और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का भी अवसर है। यही कारण है कि महासमिति ने इस बार विशेष रूप से अखाड़ों से सौहार्द्र और भाईचारे का संदेश देने की अपील की है।
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