Ranchi Celebration: सरहुल पर्व में रांची में आस्था और उल्लास की छटा, क्या होगी इस बार बारिश?
रांची में सरहुल पर्व की धूम, आदिवासी समुदाय ने पूजा अर्चना के साथ की बारिश की भविष्यवाणी, क्या इस साल होगी अच्छी बारिश?

Ranchi Celebration: सरहुल पर्व में रांची में आस्था और उल्लास की छटा, क्या होगी इस बार बारिश?
रांची में इस समय सरहुल पर्व की धूम मची हुई है। पूरे राज्य में आदिवासी समुदाय इस प्राकृतिक पर्व को धूमधाम से मना रहा है। इस अवसर पर रांची समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उल्लास का वातावरण है। सिरमटोली सरना स्थल पर इस पर्व की खास पूजा विधि से की जा रही है, और इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी श्रद्धा के साथ पूजा में शामिल हुए।
सरहुल महापर्व की शुरूआत और उपवास की परंपरा
सरहुल पर्व की शुरुआत सोमवार को उपवास के साथ हुई। आदिवासी समुदाय के लोग इस दिन प्राकृतिक देवताओं और अपने पूर्वजों से अच्छी फसल और अच्छी बारिश की कामना करते हैं। यह पर्व न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का उत्सव है, बल्कि यह समुदाय की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। इस दिन से लेकर पूरे तीन दिन तक, आदिवासी समाज अपने परंपराओं को जीवित रखते हुए प्रकृति के साथ गहरे संबंध को मनाता है।
पाहन रोहित की बारिश की भविष्यवाणी
इस खास पर्व के मौके पर सिरमटोली सरना स्थल के प्रमुख पाहन रोहित ने एक रोचक भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा कि इस साल झारखंड में अच्छी बारिश होगी। यह भविष्यवाणी उस वक्त की गई, जब रोहित पाहन ने जलरखाई पूजा के दौरान एक नए घड़े में तालाब से पानी भरा और इस पानी को देखकर भविष्यवाणी की। उनके अनुसार, इस साल किसानों को उत्साहित करने वाली बारिश मिलेगी, जो उनकी फसलों के लिए फायदेमंद साबित होगी। इस भविष्यवाणी से गांव में खुशी का माहौल है, क्योंकि आदिवासी समुदाय बारिश को प्रकृति का वरदान मानता है।
सोमवार की परंपराएं और मंगलवार का आयोजन
सोमवार को जहां उपवास के बाद पूजा की विधि से इस पर्व की शुरुआत हुई, वहीं मंगलवार को सरहुल शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा। यह शोभायात्रा पूरे क्षेत्र में एक आध्यात्मिक जश्न की तरह निकलेगी, जिसमें आदिवासी समुदाय के लोग पारंपरिक संगीत और नृत्य के साथ भाग लेंगे। इस शोभायात्रा के दौरान लोग अपने-अपने घरों से प्राकृतिक तत्वों जैसे फूल, फल, और जल लेकर चलते हैं।
इसके अलावा, सोमवार को पाहन रोहित ने तालाब में मछली और केकड़ा पकड़ने की पुरानी परंपरा को निभाया। यह परंपरा आदिवासी जीवनशैली का एक अहम हिस्सा है, जो प्राकृतिक संसाधनों के साथ सामंजस्य स्थापित करने का प्रतीक है।
सरहुल पर्व का समापन: फूलखोंसी की परंपरा
सरहुल पर्व का समापन बुधवार को फूलखोंसी के साथ होगा, जो इस पर्व की शांति और समृद्धि की आशा का प्रतीक है। इस दिन आदिवासी समुदाय के लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ मिलकर एक-दूसरे को प्राकृतिक सौंदर्य का आशीर्वाद देते हैं और एक साथ खुशियां मनाते हैं। फूलखोंसी को लेकर आदिवासी समाज के बीच उत्सव का माहौल रहेगा, जिसमें सब लोग एक दूसरे से संबंधों की मजबूती की कामना करते हैं।
पारंपरिक पर्व का सामाजिक महत्व
सरहुल पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक सद्भाव का प्रतीक भी है। यह पर्व आदिवासी समाज के लिए प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान और उनके जीवन की सादगी और संघर्ष को दर्शाता है। यह पर्व आध्यात्मिक और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का एक जरिया है, जो विभिन्न पीढ़ियों को जोड़ता है।
इस पर्व से यह संदेश भी मिलता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य और समाज की एकता का कितना महत्व है। आदिवासी समाज इसे संस्कृति और जीवन के प्रति सम्मान के रूप में मानता है, जो न केवल उन्हें प्रकृति से जोड़ता है बल्कि उन्हें अपने पूर्वजों और संस्कृति के साथ भी एक गहरे जुड़ाव की भावना देता है।
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