Venezuela Attack: महायुद्ध शुरू, वेनेजुएला पर अमेरिकी मिसाइल हमला, रूस-चीन ने दी परमाणु जंग की चेतावनी
वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर अमेरिका के भीषण मिसाइल हमलों ने दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। रूस के S-300 मिसाइल सिस्टम और चीन की घातक रडार तकनीक के बीच फंसते अमेरिकी इरादों की पूरी खौफनाक रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी महाशक्तियों के इस 'महाविनाशकारी' टकराव से अनजान रह जाएंगे।
काराकास/वॉशिंगटन, 3 जनवरी 2026 – दक्षिण अमेरिका का शांत आकाश अचानक मिसाइलों की गड़गड़ाहट से दहल उठा है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला की राजधानी काराकास और प्रमुख सैन्य ठिकानों पर की गई 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इन हमलों को "साम्राज्यवादी कायराना हरकत" करार देते हुए पूरे देश में 'इमरजेंसी' लागू कर दी है। लेकिन यह जंग अब केवल दो देशों के बीच नहीं रह गई है। रूस और चीन ने इस हमले के खिलाफ अपनी ढाल आगे कर दी है, जिससे लैटिन अमेरिका 'कोल्ड वॉर 2.0' का सबसे खतरनाक रणक्षेत्र बन गया है। काराकास में गिरती हर अमेरिकी मिसाइल अब मॉस्को और बीजिंग के सब्र का इम्तिहान ले रही है।
पुतिन की दोटूक चेतावनी: "दोस्त को अकेला नहीं छोड़ेंगे"
रूस ने अमेरिका के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून का कत्ल और 'काउबॉय बर्ताव' बताया है।
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सीधी चुनौती: रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि वेनेजुएला की संप्रभुता को और नुकसान पहुँचाया गया, तो रूस मूकदर्शक नहीं रहेगा।
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तेल का खेल: रूस का मानना है कि अमेरिका ड्रग्स के खात्मे के नाम पर दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश पर कब्जा करना चाहता है।
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रूसी हथियारों का जाल: वेनेजुएला की सुरक्षा के लिए रूस ने पहले ही वहां अपना सबसे घातक S-300VM (Antey-2500) मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात कर रखा है, जो अमेरिकी फाइटर जेट्स को 250 किमी दूर ही राख करने की ताकत रखता है।
मादुरो का 'बोलिवेरियन' संकल्प: "जनता उठाए हथियार"
हमले के तुरंत बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने सरकारी टेलीविजन पर आकर देश को संबोधित किया।
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सशस्त्र संघर्ष: मादुरो ने अपनी सेना (FANB) के साथ-साथ 40 लाख नागरिकों (Milicia Nacional) को भी युद्ध के लिए लामबंद होने का आदेश दिया है।
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गुरिल्ला रणनीति: मादुरो ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सेना जमीन पर उतरी, तो उन्हें घने जंगलों में ऐसे 'गुरिल्ला युद्ध' का सामना करना पड़ेगा जिसकी कल्पना वॉशिंगटन ने भी नहीं की होगी।
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आत्मरक्षा का अधिकार: वेनेजुएला ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने का ऐलान किया है।
वेनेजुएला संकट: महाशक्तियों का सैन्य जमावड़ा (Power Snapshot)
| शक्ति | मुख्य हथियार/भूमिका | सामरिक महत्व |
| अमेरिका | F-15, F-16 जेट्स, क्रूज मिसाइलें | सत्ता परिवर्तन (Regime Change) |
| रूस | S-300 मिसाइल, सुखोई Su-30MK2, वैगनर ग्रुप | सैन्य ढाल और एयर डिफेंस |
| चीन | JYL-1 और JY-27 'स्टील्थ' रडार | ऊर्जा सुरक्षा (तेल) और निगरानी |
| वेनेजुएला | 40 लाख मिलिशिया बल, Buk-M2 सिस्टम | राष्ट्रीय संप्रभुता और गुरिल्ला युद्ध |
इतिहास और कड़वाहट: क्यों वेनेजुएला बना 'नया वियतनाम'?
वेनेजुएला और अमेरिका के बीच तनाव का इतिहास दशकों पुराना है। 1999 में ह्यूगो शावेज के सत्ता में आने के बाद से ही वेनेजुएला ने अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देना शुरू कर दिया था। ऐतिहासिक रूप से देखें तो वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार (300 बिलियन बैरल से अधिक) है, जो उसे अमेरिका की आंखों की किरकिरी बनाता है। रूस और चीन ने पिछले दो दशकों में यहाँ अरबों डॉलर का निवेश किया है। रूस के लिए यह पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के पिछवाड़े में अपना सबसे मजबूत किला है। यही कारण है कि आज काराकास में गिरा एक भी बम 'तीसरे विश्व युद्ध' की चिंगारी बन सकता है।
चीन की कूटनीतिक 'आंखें': रडार से घिरे अमेरिकी जेट्स
चीन ने इस युद्ध में अपनी तकनीक को वेनेजुएला के लिए ढाल बना दिया है।
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स्टील्थ किलर: चीन ने वेनेजुएला को ऐसे आधुनिक रडार दिए हैं जो अमेरिका के 'अदृश्य' (Stealth) विमानों को भी ट्रैक कर सकते हैं।
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आर्थिक चोट: बीजिंग ने चेतावनी दी है कि लैटिन अमेरिका को युद्धक्षेत्र बनाने के गंभीर परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने होंगे, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा दांव पर है।
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UN में वाकयुद्ध: संयुक्त राष्ट्र की आपातकालीन बैठक में अमेरिका ने जहाँ मादुरो को 'ड्रग माफिया' कहा, वहीं रूस और चीन ने अमेरिकी नाकेबंदी को 'मानवाधिकारों का उल्लंघन' करार दिया है।
दुनिया के लिए सबसे खतरनाक मोड़
विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी रूप से अमेरिका भले ही शक्तिशाली हो, लेकिन S-300 और सुखोई जेट्स की मौजूदगी इसे एक 'महंगा युद्ध' (Costly War) बना देगी। यदि अमेरिकी हमलों में रूसी तकनीशियन मारे जाते हैं, तो मॉस्को की जवाबी कार्रवाई को कोई नहीं रोक पाएगा। फिलहाल काराकास का धुआं पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति को लीलने की ओर बढ़ रहा है।
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