Telangana Rescue: तेलंगाना की सुरंग में फंसे झारखंड के 4 श्रमिकों का क्या होगा? जानिए बचाव अभियान की पूरी अपडेट!
झारखंड के 4 मजदूर तेलंगाना की निर्माणाधीन टनल में फंसे, बचाव कार्य जारी! मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर परिजन तेलंगाना रवाना। जानिए ताजा अपडेट!

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर तेलंगाना की निर्माणाधीन टनल में फंसे श्रमिकों के परिजनों को लेकर प्रशासनिक टीम रवाना हो गई है। गुमला जिला प्रशासन के नेतृत्व में चार परिवारों के एक-एक सदस्य, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक कर्मी बिरसा मुंडा हवाई अड्डे से तेलंगाना के लिए उड़ान भर चुके हैं। वहीं, राज्य के श्रम विभाग के अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और बचाव अभियान की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।
टनल में कैसे फंसे मजदूर?
तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में स्थित श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल टनल में कुल 8 श्रमिक फंसे हुए हैं, जिनमें झारखंड के 4, उत्तर प्रदेश के 2, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के 1-1 मजदूर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी मजदूर जयप्रकाश एसोसिएट्स एलटीआईएस कंपनी के तहत निर्माण कार्य में लगे थे, जब अचानक सुरंग में भू-स्खलन जैसी स्थिति बनी और वे अंदर फंस गए।
राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम मौके पर तैनात है और मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, झारखंड प्रशासन ने तेलंगाना सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील की है, ताकि किसी भी अनहोनी से पहले मजदूरों को सुरक्षित निकाला जा सके।
झारखंड सरकार की पहल, परिजन तेलंगाना रवाना
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर झारखंड सरकार ने न केवल मजदूरों की सुरक्षा के लिए तेलंगाना प्रशासन के साथ संपर्क साधा है, बल्कि परिजनों को भी वहां भेजा है। गुमला जिला प्रशासन की अगुवाई में चार परिवारों के सदस्य, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक कर्मचारी तेलंगाना पहुंचे हैं, जहां वे बचाव अभियान की स्थिति पर नजर रखेंगे।
नियंत्रण कक्ष ने एडिशनल लेबर ऑफिसर और नागरकुरनूल प्रशासन से संपर्क किया है। साथ ही, उन श्रमिकों से भी बातचीत की गई है जो इस प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे लेकिन इस हादसे में फंसे नहीं हैं।
टनल प्रोजेक्ट: झारखंड के मजदूरों का तेलंगाना में संघर्ष!
तेलंगाना के श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल टनल प्रोजेक्ट देश के सबसे बड़े सिंचाई परियोजनाओं में से एक है, जिसमें झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के मजदूर काम कर रहे हैं। झारखंड से हर साल हजारों श्रमिक बेहतर रोजगार की तलाश में दक्षिण भारत के राज्यों में जाते हैं, लेकिन वहां सुरक्षा की कमी और अनिश्चित कार्य स्थितियों की वजह से वे अक्सर जोखिम में पड़ जाते हैं।
इससे पहले भी झारखंड के प्रवासी मजदूर केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में निर्माणाधीन परियोजनाओं में दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। लेकिन अब सवाल ये है कि क्या झारखंड सरकार भविष्य में इन मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी?
बचाव कार्य जारी, मजदूरों को कब तक निकाला जाएगा?
NDRF की टीम लगातार मलबा हटाने का काम कर रही है। अभी तक मजदूरों से संपर्क नहीं हो पाया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाल लिए जाएंगे। झारखंड प्रशासन भी बचाव कार्यों की निगरानी कर रहा है और जैसे ही मजदूरों को बाहर निकाला जाएगा, उन्हें झारखंड वापस लाने की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार की जवाबदेही और भविष्य की सुरक्षा उपाय!
इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड सरकार को चाहिए कि वह न केवल मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, बल्कि दक्षिण भारत में काम कर रहे झारखंडी श्रमिकों का एक डेटाबेस तैयार करे, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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