STF Action: इनामी माओवादी मोतीलाल गिरफ्तार, AK-47 से चलता था कैदी वाहन कांड में शामिल था
झारखंड-बिहार सीमा पर एसटीएफ का बड़ा संयुक्त अभियान। 20 साल से फरार इनामी नक्सली मोतीलाल किस्कू गिरफ्तार। जानिए वह चिराग के दस्ते में क्या काम करता था और 16 साल पुराने कैदी वाहन कांड में उसकी क्या भूमिका थी।
गिरिडीह, 12 दिसंबर 2025 – झारखंड और बिहार की सीमा पर सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। बिहार विशेष कार्य बल (STF) ने अर्धसैनिक बलों के सहयोग से झारखंड के गिरिडीह की कैदी वाहन घटना में शामिल इनामी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के नक्सली मोतीलाल किस्कू को गिरफ्तार कर लिया है। पिछले 20 वर्षों से फरार यह नक्सली देवरी थाना क्षेत्र में आराम फरमाते समय पकड़ा गया।
संयुक्त अभियान में मिली बड़ी सफलता
गुप्त सूचना के आधार पर चकाई पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के एक संयुक्त दल ने गुरुवार रात में मोतीलाल को देवरी थाना क्षेत्र से दबोच लिया।
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नक्सली का परिचय: मोतीलाल झारखंड के गिरिडीह का नहीं, बल्कि जमुई जिले के चकाई थाना क्षेत्र के चिहरा इलाके के हरनी गाँव का मूल निवासी है।
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20 साल की सक्रियता: वह पिछले 20 वर्षों से नक्सली संगठन में सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था और कई गंभीर अपराधों में शामिल रहा है।
पुलिस के अनुसार, मोतीलाल पर जमुई के जीवलाल पासवान हत्याकांड सहित जमुई और गिरिडीह के कई थानों में नक्सली घटनाओं के मामले दर्ज हैं।
AK-47 लेकर चलता था और चिराग के दस्ते में था शामिल
मोतीलाल किस्कू की गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि वह एक समय में मुठभेड़ (Encounter) में मारे गए क्षेत्रीय समिति के सदस्य और इनामी नक्सली चिराग के दस्ते का हिस्सा था।
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हथियार का इस्तेमाल: वह दस्ते में बड़ा हथियार (AK-47) लेकर चलता था, जो उसकी दस्ते में अहम भूमिका को दर्शाता है।
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कैदी वाहन कांड: 16 साल पहले गिरिडीह में हुए सनसनीखेज कैदी वाहन कांड में भी इसका नाम सामने आ रहा है। पुलिस इस मामले में उसकी भूमिका की गहन जाँच कर रही है।
गुप्त हथियारों की जानकारी से चल रहा सर्च अभियान
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले मोतीलाल किस्कू को गिरिडीह और जमुई के सीमावर्ती इलाके के पोझा बरमोरिया में नक्सलियों की ओर से छिपाए गए हथियारों की पुख्ता जानकारी है।
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वर्तमान कार्यवाही: मोतीलाल की गिरफ्तारी के बाद से ही पूरे इलाके में सुरक्षा कर्मियों ने सघन खोज अभियान चला रखा है। पुलिस को उम्मीद है कि इसकी पूछताछ से नक्सली संगठन और हथियारों के बारे में कई महत्वपूर्ण खुलासे होंगे।
सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिससे नक्सली गतिविधियों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
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