Ranchi Murder: खूनी साजिश, रांची में रेलवे ट्रैक पर मिली लाश का खुलासा, ढाई लाख के लिए दोस्त ही बना कातिल
रांची के बुढ़मू में पीयूष उर्फ इबरार अंसारी की सनसनीखेज हत्या का सच सामने आ गया है। महज ढाई लाख रुपये के कर्ज ने कैसे एक गहरे रिश्ते को कत्ल की खूनी वारदात में बदल दिया और पुलिस ने 48 घंटे में हथियारों के जखीरे के साथ कातिलों को कैसे दबोचा, इसकी पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी राजधानी के इस खौफनाक हत्याकांड की हकीकत नहीं जान पाएंगे।
रांची, 3 जनवरी 2026 – झारखंड की राजधानी रांची के ग्रामीण इलाके बुढ़मू में हुए पीयूष उर्फ इबरार अंसारी हत्याकांड ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी। लेकिन रांची पुलिस ने अपनी पेशेवर दक्षता दिखाते हुए महज 48 घंटे के भीतर इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझा ली है। शनिवार को ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर ने एक प्रेस वार्ता में इस खौफनाक साजिश का पर्दाफाश किया। पुलिस ने हत्या में शामिल चार शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से देशी पिस्तौल, कट्टा और जिंदा कारतूसों का जखीरा बरामद हुआ है। यह मामला न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि यह रिश्तों के बीच पनपे लालच और भरोसे के कत्ल की एक दर्दनाक कहानी भी है।
रेलवे ट्रैक पर मिला था लहूलुहान शव: चाचा की शिकायत पर एक्शन
वारदात की शुरुआत 30 दिसंबर को हुई थी, जब सरईदाह करमबोहा नदी पर बने रेलवे पुल के पास एक युवक की लाश मिली थी।
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अज्ञात हमलावर: मृतक के चाचा मोहम्मद एकराम ने पुलिस को बताया कि उनके भतीजे पीयूष की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है।
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साजिश की जगह: शव को रेलवे ट्रैक के पास फेंक दिया गया था ताकि इसे कोई हादसा या किसी गैंगवार का रूप दिया जा सके।
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विशेष टीम का गठन: एसएसपी के निर्देश पर खलारी डीएसपी के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई, जिसने मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों को आधार बनाकर अपराधियों का पीछा करना शुरू किया।
दोस्त ने ही दागी थी सीने में गोली: ढाई लाख का खूनी कर्ज
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान समीर अंसारी, साहिल टुडू, राम मुर्मू और नरेश मरांडी के रूप में हुई है। पूछताछ में जो सच सामने आया, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया।
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उधार का बोझ: मुख्य आरोपी समीर अंसारी ने मृतक पीयूष से करीब छह महीने पहले ढाई लाख रुपये उधार लिए थे।
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धमकी का डर: पीयूष अपने पैसे वापस मांगने के लिए समीर पर लगातार दबाव बना रहा था और उसे अंजाम भुगतने की धमकी भी दे रहा था।
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कत्ल का प्लान: कर्ज चुकाने के बजाय समीर ने अपने साथियों के साथ मिलकर पीयूष को ही रास्ते से हटाने का प्लान बनाया और उसे बहाने से बुलाकर मौत के घाट उतार दिया।
बुढ़मू मर्डर केस: बरामदगी और गिरफ्तारी (Action Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| गिरफ्तार अपराधी | समीर, साहिल, राम मुर्मू और नरेश मरांडी |
| हथियार बरामद | देशी पिस्तौल (मैगजीन युक्त), देशी कट्टा |
| जिंदा कारतूस | 09 (7.65 और 315 बोर के) |
| अन्य बरामदगी | 05 मोबाइल और 01 मोटरसाइकिल |
| हत्या की वजह | ₹2,50,000 का लेनदेन विवाद |
इतिहास और रंजिश: बुढ़मू-खलारी बेल्ट का क्राइम रिकॉर्ड
ऐतिहासिक रूप से रांची का बुढ़मू और खलारी क्षेत्र कोयला तस्करी और लेवी (उगाही) के लिए कुख्यात रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में यहाँ आपसी लेनदेन और 'जमीन विवाद' के चलते हत्या की घटनाओं में इजाफा हुआ है। पीयूष की हत्या जिस तरह से रेलवे ट्रैक के पास की गई, वह अपराधियों की पुरानी 'मोडस ऑपरेंडी' (कार्यशैली) रही है ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके। 1990 के दशक में इस क्षेत्र में उग्रवादी संगठनों का प्रभाव था, लेकिन अब पेशेवर अपराधियों ने उनकी जगह ले ली है, जो छोटे-छोटे रुपयों के विवाद में अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करने से नहीं कतराते।
हजारीबाग में छिपाया था मौत का सामान
पुलिस ने जब समीर और साहिल को दबोचा, तो उन्होंने एक और बड़ा राज उगला।
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नरेश मरांडी की भूमिका: हत्या के बाद वारदात में इस्तेमाल हुए हथियारों को गायब करने की जिम्मेदारी नरेश मरांडी को दी गई थी।
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हजारीबाग रेड: नरेश ने इन हथियारों को हजारीबाग स्थित अपने पुश्तैनी घर में छिपा रखा था। रांची पुलिस ने वहां छापेमारी कर हथियारों और कारतूसों को सुरक्षित बरामद कर लिया।
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जेल की राह: शनिवार को चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
अपराधियों के लिए खुली चेतावनी
ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर ने साफ कर दिया है कि रांची पुलिस 'जीरो टॉलरेंस' मोड में है। 48 घंटे के भीतर इस हत्याकांड का खुलासा यह साबित करता है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दें, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुँच ही जाएंगे। पीयूष को तो इंसाफ मिल गया, लेकिन यह घटना समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि पैसों का लेनदेन कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकता है।
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