Chakulia Accident: खौफनाक छलांग, चाकुलिया स्टेशन पर चलती गीतांजलि एक्सप्रेस से कूदी छात्रा, गलती पड़ी भारी, मची अफरा-तफरी
चाकुलिया रेलवे स्टेशन पर एक छात्रा ने गलती से एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ने के बाद घबराहट में चलती गाड़ी से छलांग लगा दी है। ट्रैक के पास लहूलुहान हालत में मिली कविता नायक और उसकी सहेली की आँखों देखी खौफनाक दास्ताँ यहाँ दी गई है वरना आप भी रेल सफर के दौरान होने वाली इस जानलेवा गलती के अंजाम से बेखबर रह जाएंगे।
चाकुलिया, 3 जनवरी 2026 – दक्षिण पूर्व रेलवे के चाकुलिया रेलवे स्टेशन पर शनिवार की दोपहर एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। यहाँ एक कॉलेज छात्रा ने महज एक गलत ट्रेन चुनने की सजा अपनी जान जोखिम में डालकर भुगती। चाकुलिया प्रखंड के लोहामालिया गांव की रहने वाली और घाटशिला कॉलेज की सेमेस्टर-3 की छात्रा कविता नायक चलती डाउन गीतांजलि एक्सप्रेस से प्लेटफॉर्म संख्या तीन पर कूद गई। ट्रेन की रफ्तार और जमीन से होने वाली जोरदार टक्कर के कारण कविता गंभीर रूप से घायल होकर ट्रैक के पास ही तड़पने लगी। इस मंजर को देखकर स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और स्थानीय लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
गलत ट्रेन और वह एक 'जानलेवा' फैसला
यह पूरी घटना घबराहट और जल्दबाजी का नतीजा थी। कविता अपनी सहेली पूजा नायक के साथ घाटशिला स्टेशन से अपने घर लौटने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रही थी।
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भूलवश चढ़ीं एक्सप्रेस में: स्थानीय पैसेंजर ट्रेन की जगह दोनों सहेलियां गलती से सुपरफास्ट गीतांजलि एक्सप्रेस पर सवार हो गईं। उन्हें लगा कि शायद यह चाकुलिया पर रुकेगी।
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नहीं रुकी रफ्तार: गीतांजलि एक्सप्रेस का चाकुलिया स्टेशन पर स्टॉपेज नहीं है। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर तीन से बिना रुके तेजी से गुजरने लगी, कविता के होश उड़ गए।
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खौफनाक छलांग: घबराहट में कविता ने अपनी सहेली की बात अनसुनी कर दी और स्टेशन छूटने के डर से चलती ट्रेन से बाहर छलांग लगा दी। कविता तो नीचे गिर गई, लेकिन उसकी सहेली पूजा ट्रेन के भीतर ही रह गई।
मददगार बने स्थानीय युवक: टेंपो से पहुँचाया अस्पताल
हादसे के तुरंत बाद ट्रैक के पास खून से लथपथ पड़ी छात्रा को देखकर स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई।
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देवदूत बने युवा: मौके पर मौजूद स्थानीय युवकों ने हिम्मत दिखाई और बिना वक्त गंवाए एक टेंपो का इंतजाम किया। कविता को तुरंत चाकुलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुँचाया गया।
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सहेली का फोन: ट्रेन के भीतर से ही पूजा नायक ने रोते हुए कविता के परिजनों को फोन किया और पूरी घटना की जानकारी दी।
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डॉक्टरों की टीम: अस्पताल में तैनात मेडिकल टीम ने घायल छात्रा का प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया है। कविता के शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
चाकुलिया ट्रेन हादसा: घटना का ब्योरा (Incident Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| छात्रा का नाम | कविता नायक (लोहामालिया गांव) |
| कॉलेज/सेमेस्टर | घाटशिला कॉलेज, सेमेस्टर-3 |
| ट्रेन का नाम | डाउन गीतांजलि एक्सप्रेस |
| घटना स्थल | प्लेटफॉर्म संख्या 3, चाकुलिया स्टेशन |
| प्राथमिक उपचार | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चाकुलिया |
इतिहास और भूगोल: चाकुलिया और टाटानगर-खड़गपुर रेल खंड
टाटानगर और खड़गपुर के बीच स्थित चाकुलिया स्टेशन ऐतिहासिक रूप से झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा का एक महत्वपूर्ण जंक्शन रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय यहाँ का हवाई पट्टी और रेलवे नेटवर्क काफी चर्चा में रहा था। वर्तमान में यह खंड भारी ट्रैफिक और एक्सप्रेस ट्रेनों की तेज आवाजाही के लिए जाना जाता है। गीतांजलि एक्सप्रेस जैसी 'सुपरफास्ट' ट्रेनों की रफ्तार यहाँ अक्सर 100-110 किमी प्रति घंटा होती है। रेल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रियों में अक्सर यह गलतफहमी होती है कि एक्सप्रेस ट्रेनें स्टेशन के पास थोड़ी धीमी होंगी, लेकिन बिना स्टॉपेज वाली ट्रेनें अपनी पूरी रफ्तार में रहती हैं। कविता के साथ हुई यह घटना इसी भौगोलिक और तकनीकी अनभिज्ञता का परिणाम है।
RPF की जांच: सुरक्षा व्यवस्था पर नजर
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के सब-इंस्पेक्टर (SI) करण सोरेन अपनी टीम के साथ अस्पताल पहुँचे।
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बयान दर्ज: आरपीएफ ने छात्रा की स्थिति का जायजा लिया और उसकी सहेली पूजा से भी संपर्क करने की कोशिश की है।
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जागरूकता की कमी: रेल अधिकारियों ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अक्सर पैसेंजर ट्रेन के लालच में छात्र-छात्राएं एक्सप्रेस ट्रेनों में चढ़ जाते हैं और फिर उतरने के चक्कर में अपनी जान गंवा बैठते हैं।
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: अस्पताल पहुँचते ही कविता के माता-पिता बदहवास हो गए। उनकी इकलौती उम्मीद, उनकी बेटी आज अस्पताल के बेड पर जिंदगी की जंग लड़ रही है।
एक भूल जो जिंदगी पर भारी पड़ी
चाकुलिया की यह घटना उन तमाम यात्रियों के लिए एक चेतावनी है जो चलती ट्रेन से चढ़ने या उतरने का साहस (या दुस्साहस) करते हैं। महज कुछ किलोमीटर आगे जाकर वापस आना आसान था, लेकिन उस एक छलांग ने कविता की पढ़ाई और भविष्य पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। डॉक्टरों की टीम हर संभव कोशिश कर रही है ताकि वह जल्द अपने पैरों पर खड़ी हो सके।
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