Ramgarh Protest : युवती के अपहरण पर सांसद का बड़ा कदम, सड़क जाम से प्रशासन पर दबाव!
रजरप्पा थाना क्षेत्र से 15 दिन पहले अगवा हुई युवती का अब तक सुराग नहीं, सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने सड़क जाम कर प्रशासन पर दबाव बनाया। पढ़ें पूरी खबर!

रजरप्पा थाना क्षेत्र से एक युवती के अपहरण का मामला अब तूल पकड़ चुका है। घटना को हुए 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक लड़की बरामद नहीं हुई है। इसको लेकर जनता में गुस्सा है और प्रशासन की सुस्ती पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थिति को देखते हुए सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने आंदोलन की अगुवाई करते हुए मंगलवार सुबह 6 बजे रामगढ़-बोकारो राष्ट्रीय राजमार्ग-23 को जाम कर दिया।
कैसे बढ़ा विवाद?
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब प्रशासन द्वारा लड़की की बरामदगी में देरी होती रही। सांसद चौधरी ने पहले प्रशासन को 72 घंटे की मोहलत दी थी, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने 24 फरवरी को मशाल जुलूस निकालकर प्रशासन को चेतावनी दी। इसके बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने का निर्णय लिया।
चक्का जाम के कारण सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जनता का गुस्सा चरम पर था, और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख डीसी चंदन कुमार और एसपी अजय कुमार मौके पर पहुंचे और सांसद से वार्ता की। अंततः प्रशासन ने 72 घंटे के भीतर युवती को बरामद करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद सड़क जाम समाप्त हुआ।
क्या है पूरा मामला?
करीब 15 दिन पहले रजरप्पा थाना क्षेत्र से एक युवती का अपहरण हो गया था। परिजनों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, पुलिस की निष्क्रियता से जनता में आक्रोश बढ़ता गया।
इस घटना ने रामगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में तनाव पैदा कर दिया। समाज में कई तरह की अफवाहें फैलने लगीं, जिससे माहौल और गरमाने लगा। सांसद चौधरी ने आरोप लगाया कि अगर पुलिस शुरू से ही गंभीर होती, तो जनता को सड़क पर नहीं उतरना पड़ता।
सांसद की सख्त चेतावनी
सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि युवती 72 घंटे के भीतर नहीं मिलती है, तो आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि "यह सिर्फ एक लड़की का मामला नहीं है, यह पूरे समाज की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। प्रशासन को ऐसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि दोबारा इस तरह की वारदात न हो।"
प्रशासन पर सवाल, जनता में गुस्सा
इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर पुलिस पहले ही सख्त कार्रवाई करती, तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होते। जनता का आरोप है कि प्रशासन की ढिलाई और सुस्ती के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।
इससे पहले भी झारखंड में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अपहरण के बाद पुलिस कार्रवाई में देरी हुई और इसका खामियाजा पीड़ित परिवारों को भुगतना पड़ा।
शहर में बढ़ा तनाव, फ्लैग मार्च से माहौल शांत करने की कोशिश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने रामगढ़ जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच किलोमीटर तक फ्लैग मार्च किया। पुलिस ने बाजारों में जाकर व्यापारियों को दुकानें खोलने की अपील की और इलाके में गश्त बढ़ा दी।
जहां से युवती का अपहरण हुआ, उस मोहल्ले में भी पुलिस ने फ्लैग मार्च कर शांति व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया।
क्या अब मिलेगी युवती?
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। पुलिस के पास सिर्फ 72 घंटे का समय है, और जनता यह देखने के लिए इंतजार कर रही है कि क्या प्रशासन अपने वादे पर खरा उतरता है या नहीं।
अगर इस समय सीमा के भीतर लड़की बरामद नहीं होती, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है, और जनता का गुस्सा उग्र आंदोलन में बदल सकता है।
रजरप्पा का यह मामला अब सिर्फ एक अपहरण का नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन की लापरवाही और जनता के बढ़ते आक्रोश का मुद्दा बन चुका है। अगर जल्द ही युवती नहीं मिलती, तो इस आंदोलन का रूप और भी बड़ा हो सकता है।
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