Patamda Accident : हाइवा की चपेट में मजदूर की मौत, सड़क जाम से मचा हंगामा
पटमदा में बालू लदे हाइवा की चपेट में बाइक सवार मजदूर की दर्दनाक मौत, गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दी। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल।
जमशेदपुर के पटमदा थाना क्षेत्र से सोमवार की सुबह एक दर्दनाक खबर सामने आई। जलडहर पेट्रोलपंप के पास सुबह करीब 7:30 बजे एक तेज रफ्तार हाइवा ने बाइक सवार को कुचल दिया। इस भीषण दुर्घटना में बाइक चालक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान लावा पंचायत के कियाबोहाल गांव निवासी 30 वर्षीय गंगासागर टुडू के रूप में हुई है।
हादसे के बाद सड़क जाम
घटना के तुरंत बाद गुस्साए ग्रामीणों ने टाटा-पटमदा मुख्य सड़क को जाम कर दिया। मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। कई यात्री बसों को रूट बदलना पड़ा। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी, जिनमें थाना प्रभारी करमपाल भगत, बीडीओ शशि नीलिमा डुंगडुंग और मुखिया कानूराम बेसरा शामिल थे, तुरंत मौके पर पहुंचे और आक्रोशित भीड़ को शांत करने का प्रयास किया।
गंगासागर टुडू की अधूरी ज़िंदगी
गंगासागर टुडू एक दिहाड़ी मजदूर थे। रोज़ की तरह सोमवार सुबह भी वह अपनी बाइक से जमशेदपुर जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उन्होंने हेलमेट भी पहन रखा था, लेकिन हादसा इतना भीषण था कि उसका कोई असर नहीं हुआ। रांगामाटी से बालू लेकर आ रहा अनियंत्रित हाइवा तेज रफ्तार में गलत दिशा से आया और गंगासागर को बुरी तरह कुचल दिया। बाइक और युवक दोनों कई फीट तक घसीटते चले गए।
दुर्घटना के बाद का दृश्य इतना भयावह था कि लोग देखते ही सिहर उठे। गंगासागर का सिर बुरी तरह कुचला गया था, जिससे पहचानना भी मुश्किल हो गया। उनकी बाइक पूरी तरह से चकनाचूर हो गई थी।
हाइवा का कहर – पुराना दर्दनाक इतिहास
स्थानीय लोगों का कहना है कि पटमदा-टाटा मुख्य मार्ग पर हाइवा और भारी वाहनों का परिचालन लंबे समय से खतरे का कारण बना हुआ है। अक्सर बालू से लदे ट्रक इस सड़क से गुज़रते हैं और नो-एंट्री या स्पीड ब्रेकर जैसी व्यवस्थाओं की पूरी तरह अनदेखी होती है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की दुर्घटना हुई है। पिछले कुछ वर्षों में कई निर्दोष लोग इन हाइवाओं की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। इतिहास गवाह है कि इस इलाके में सड़क सुरक्षा को लेकर बार-बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन प्रशासन की उदासीनता ने हालात को और बिगाड़ दिया है।
प्रशासन पर सवाल
गुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त नाराज़गी जताई। उनका कहना है कि स्पीड ब्रेकर की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। साथ ही, पुलिस पर भी लापरवाही का आरोप लगाया जा रहा है कि वह नो-एंट्री नियम का पालन कराने में नाकाम है और हाइवाओं के अवैध परिचालन को रोकने में नाकाफी कदम उठा रही है।
आंदोलन और मांग
मुखिया कानूराम बेसरा ने स्पष्ट कहा कि यह हादसा पूरी तरह से हाइवा चालक की लापरवाही का नतीजा है। चालक गलत दिशा से आ रहा था और इतनी तेज रफ्तार में था कि युवक को कुचलते हुए कई फीट तक घसीटता चला गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी चालक और संबंधित ट्रांसपोर्ट कंपनी पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही, सड़क पर तत्काल स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं और भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन पर रोक लगाई जाए।
पुलिस की कार्रवाई
फिलहाल पुलिस ने हाइवा चालक को हिरासत में ले लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रशासन ने आंदोलनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक निर्दोष लोग प्रशासन की लापरवाही और हाइवाओं के कहर का शिकार बनते रहेंगे? सड़क सुरक्षा और सख्त नियमों का पालन अब सिर्फ कागज़ी कार्रवाई नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर लागू करना होगा।
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