Jamshedpur Nightmare: एलिवेटेड कॉरिडोर से गिरा सैकड़ों किलो का एंगल, कार सवार परिवार बाल-बाल बचा
जमशेदपुर के मानगो में एलिवेटेड कॉरिडोर से सैकड़ों किलो का एंगल गिरकर कार पर जा लगा। परिवार सवार था, गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। जानिए पूरा मामला।
जमशेदपुर: इस्पात नगरी में एक बार फिर निर्माण कार्य में लापरवाही ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं। मानगो के डिमना चौक से बिग बाजार जाने वाले मार्ग पर चल रहे एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण स्थल पर गुरुवार को वह भयानक घटना घटी, जिसे देखकर आसपास के लोग दहल गए। ओम टावर के सामने निर्माणाधीन ढांचे से कई सौ किलो वजनी एक विशाल एंगल सीधे सड़क पर खड़ी एक कार पर जा गिरा। कार में एक पूरा परिवार सवार था। गनीमत यह रही कि इस भीषण हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन कार का काफी नुकसान हो गया।
पलक झपकते ही कार बर्बाद, परिवार सहम गया
घटना के वक्त कार में मौजूद परिवार के लोगों के होश उड़ गए। आसमान से अचानक आई इस आफत ने उनकी रूह कंपा कर रख दी। चश्मदीदों के मुताबिक, जोरदार आवाज हुई और अगले ही पल कार का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय लोग तुरंत मौके पर जुट गए। अगर यह एंगल कार के शीशे को तोड़कर अंदर घुस जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। परिवार वाले किसी तरह बाहर निकले और उनकी चीखों से पूरा इलाका गूंज उठा।
सुरक्षा मानकों की खुली अनदेही
यह कोई पहली घटना नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण में सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। मजदूर बिना हेलमेट के काम कर रहे हैं, ऊपर से लगातार छोटे-मोटे सामान गिरते रहते हैं, लेकिन आज बड़ा हादसा हो गया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कल कोई बड़ी जान भी जा सकती है।
घटना के तुरंत बाद मौके पर साइट इंजीनियर और सेफ्टी इंचार्ज को बुलाने की मांग उठी, लेकिन काफी देर तक कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे आक्रोशित लोगों ने सड़क पर बैरिकेड लगाकर यातायात बाधित कर दिया।
जमशेदपुर का इतिहास और बढ़ते निर्माण हादसे
जमशेदपुर, जिसे टाटा ने बसाया था, कभी अपनी नियोजित बनावट और सुरक्षा व्यवस्था के लिए मशहूर था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां अनियोजित निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के मामले बढ़े हैं। मानगो क्षेत्र तो इन दिनों निर्माण कार्यों का गढ़ बना हुआ है। एलिवेटेड कॉरिडोर का यह प्रोजेक्ट काफी समय से चल रहा है, लेकिन गति और सुरक्षा दोनों ही दृष्टिकोण से यह कमियों से भरा है।
इतिहास गवाह है कि इससे पहले भी जमशेदपुर में कई निर्माण स्थलों पर हादसे हो चुके हैं। दीमना चौक से लेकर बिष्टुपुर तक, हर जगह यही कहानी है – निर्माण कंपनियों की लापरवाही और प्रशासन की मूकदर्शकता।
प्रशासन की मौन मुहर
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के बाद लंबे समय तक प्रशासन या पुलिस का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जब लोगों ने सड़क जाम किया, तब कहीं जाकर पुलिस ने हल्का सा संज्ञान लिया। लोगों का सवाल है कि अगर समय पर प्रशासन सख्ती नहीं करेगा तो ऐसे हादसे रुकेंगे कैसे?
एक स्थानीय दुकानदार ने बताया, "हम पिछले कई महीनों से शिकायत कर रहे हैं कि ऊपर से लोहे के सामान और मलबा गिरता है, लेकिन किसी ने सुनी ही नहीं। आज बड़ा हादसा हो गया। अब तो जागो प्रशासन।"
सड़क जाम, लोगों में रोष
घटना के बाद से ही डिमना चौक से बिग बाजार जाने वाला मार्ग पूरी तरह जाम हो गया। वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोगों ने मौके पर ही निर्माण एजेंसी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने किसी तरह बैरिकेड हटवाए और यातायात बहाल कराया, लेकिन निर्माण कार्य में सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर रखा है।
जमशेदपुर का यह मामला आपको भी सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या हम सड़कों पर चलते हुए भी सुरक्षित हैं? अपनों को सतर्क करें और यह खबर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं ताकि प्रशासन की नींद खुल सके।
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