Palamu Murder: पलामू में 'ओझा' की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या, घर के बाहर खून से लथपथ मिला बुजुर्ग का शव, नक्सल प्रभावित इलाके में फैली दहशत
पलामू के मनातू में एक बुजुर्ग ओझा की लाठी-डंडों से पीटकर की गई हत्या की रूह कंपा देने वाली रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। रंगेया गांव में फैली दहशत और पुलिस की जांच में सामने आए आपसी रंजिश के एंगल की पूरी कहानी विस्तार से पढ़िए वरना आप झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में बढ़ते इस खौफनाक अपराध का सच जानने से चूक जाएंगे।
पलामू/मनातू, 27 जनवरी 2026 – झारखंड के पलामू जिले से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। मनातू थाना क्षेत्र के रंगेया गांव अंतर्गत धांगरडीह टोला में सोमवार की सुबह उस वक्त कोहराम मच गया, जब एक 60 वर्षीय बुजुर्ग का शव उनके ही घर के बाहर लहूलुहान हालत में पड़ा मिला। मृतक की पहचान फागुनी के रूप में हुई है, जो गांव में ओझा-गुणी का काम करते थे। इस जघन्य हत्याकांड ने न केवल इलाके में सनसनी फैला दी है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण ग्रामीणों के बीच एक गहरे डर का माहौल पैदा कर दिया है।
हत्या का खौफनाक मंजर: लाठी-डंडों से किया हमला
परिजनों के अनुसार, जब वे सुबह घर से बाहर निकले तो फागुनी का शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था।
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हमले के निशान: बुजुर्ग के शरीर पर लाठी-डंडों से किए गए प्रहार के गहरे और स्पष्ट निशान पाए गए हैं।
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पीट-पीटकर हत्या: मौके पर पहुँचे मनातू थाना प्रभारी विक्की कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला पीट-पीटकर हत्या करने का लग रहा है।
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मातम का माहौल: घटना के बाद से ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव के लोग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
पुलिस की कार्रवाई: पुरानी रंजिश या कुछ और?
सूचना मिलते ही पुलिस बल ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को संभाला और जांच प्रक्रिया शुरू की।
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पोस्टमार्टम: पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए मेदिनीनगर भेज दिया है।
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जांच के बिंदु: प्रारंभिक जांच में पुलिस इसे आपसी दुश्मनी या किसी पुरानी रंजिश का परिणाम मान रही है।
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शीघ्र गिरफ्तारी का आश्वासन: थाना प्रभारी ने परिजनों को भरोसा दिलाया है कि दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
मनातू हत्याकांड: केस फाइल पर एक नजर (Case Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Facts) |
| मृतक का नाम | फागुनी (उम्र करीब 60 वर्ष) |
| व्यवसाय | ओझा-गुणी (Bhumka/Ojha) |
| स्थान | धांगरडीह टोला, रंगेया गांव, पलामू |
| हत्या का हथियार | लाठी-डंडे |
| क्षेत्र की स्थिति | नक्सल प्रभावित इलाका |
दहशत के साये में रंगेया गांव
चूंकि यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित माना जाता है, इसलिए किसी भी बड़ी वारदात के बाद यहाँ सन्नाटा पसर जाना स्वाभाविक है। ग्रामीण फिलहाल कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की हर एंगल से सूक्ष्म जांच हो ताकि कोई भी निर्दोष न फंसे और असली अपराधी बच न सके।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगा। फिलहाल, गांव में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह के तनाव को रोका जा सके।
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