Meghalaya Tragedy: मौत की सुरंग में तबाही, मेघालय की कोयला खदान में जोरदार धमाका, 16 मजदूरों के उड़े चीथड़े, अवैध रैट-होल माइनिंग ने फिर ली बलि

मेघालय के ईस्ट जैंतिया हिल्स में अवैध कोयला खदान में हुए भीषण धमाके और 16 मजदूरों की दर्दनाक मौत की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। एनजीटी के बैन के बावजूद चल रहे मौत के इस खेल और रेस्क्यू ऑपरेशन की हर जानकारी विस्तार से पढ़िए वरना आप इस बड़ी त्रासदी के सच से चूक जाएंगे।

Feb 5, 2026 - 20:49
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Meghalaya Tragedy: मौत की सुरंग में तबाही, मेघालय की कोयला खदान में जोरदार धमाका, 16 मजदूरों के उड़े चीथड़े, अवैध रैट-होल माइनिंग ने फिर ली बलि
Meghalaya Tragedy: मौत की सुरंग में तबाही, मेघालय की कोयला खदान में जोरदार धमाका, 16 मजदूरों के उड़े चीथड़े, अवैध रैट-होल माइनिंग ने फिर ली बलि

ईस्ट जैंतिया हिल्स, 5 फरवरी 2026 – मेघालय के पहाड़ों में एक बार फिर 'काले सोने' की भूख ने मासूम मजदूरों के खून से होली खेली है। ईस्ट जैंतिया हिल्स जिले के थांगस्कू इलाके में स्थित ताशखाई कोयला खदान गुरुवार को श्मशान में तब्दील हो गई। खदान के भीतर हुए एक भीषण धमाके ने 16 मजदूरों की मौके पर ही जान ले ली। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की जमीन कांप उठी। सूचना मिलते ही मेघालय पुलिस, जिला प्रशासन और SDRF की टीमें मौके पर पहुँचीं, लेकिन मंजर इतना खौफनाक था कि बचाव दल के भी रोंगटे खड़े हो गए।

खदान में बिछ गईं लाशें: असम के रहने वाले थे मजदूर

जानकारी के अनुसार, जब यह धमाका हुआ, उस समय खदान की गहराई में कई मजदूर कोयला निकालने का काम कर रहे थे।

  • धमाके का शिकार: अब तक 16 शव बाहर निकाले जा चुके हैं, और आशंका है कि कई अन्य मजदूर अभी भी मलबे और जहरीली गैसों के बीच फंसे हुए हैं।

  • पहचान: मरने वाले सभी मजदूर पड़ोसी राज्य असम के बताए जा रहे हैं, जो रोजी-रोटी की तलाश में इन जानलेवा सुरंगों में उतरे थे।

  • DGP का बयान: मेघालय की DGP आई नोंगरंग ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन खदान की संकरी बनावट के कारण काफी मुश्किलें आ रही हैं।

रैट-होल माइनिंग: मौत का वह संकरा रास्ता

शुरुआती जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह यह है कि यह एक 'रैट-होल' (Rat-hole) खदान थी। यह वही तकनीक है जिसे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने साल 2014 में ही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था।

रैट-होल माइनिंग में जमीन के अंदर महज 3 से 4 फीट ऊंची बेहद पतली सुरंगें खोदी जाती हैं। मजदूर रेंगते हुए इन सुरंगों के अंदर जाते हैं और कोयला निकालते हैं। सुरक्षा के नाम पर यहाँ कुछ नहीं होता, बस मौत हर पल सिर पर मंडराती रहती है।

मेघालय खदान हादसा: मुख्य विवरण (Tragedy Spotlight)

विवरण प्रमुख जानकारी (Key Facts)
स्थान ताशखाई खदान, थांगस्कू (ईस्ट जैंतिया हिल्स)
हादसे का समय गुरुवार सुबह
मृतकों की संख्या 16 (बढ़ने की आशंका)
खदान का प्रकार अवैध रैट-होल माइनिंग
बचाव दल SDRF, स्थानीय पुलिस और प्रशासन

धमाके की वजह: गैस रिसाव या लापरवाही?

पुलिस धमाके के असली कारणों की जांच कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि खदान के अंदर मीथेन गैस का जमाव या अवैध रूप से इस्तेमाल किए जा रहे विस्फोटक इस तबाही की वजह हो सकते हैं। बिना किसी सुरक्षा ऑडिट और वेंटिलेशन के चल रही ये खदानें किसी 'टाइम बम' से कम नहीं हैं।

कब रुकेगा अवैध खनन का खेल?

16 परिवारों के चिराग बुझ चुके हैं। प्रशासन अब जांच की बात कर रहा है, लेकिन सवाल वही है—जब खनन पर बैन है, तो आखिर किसकी शह पर ये खदानें धड़ल्ले से चल रही हैं? क्या ये मजदूर सिर्फ आंकड़े बनकर रह जाएंगे या फिर इस बार अवैध माफियाओं पर कोई ऐतिहासिक कार्रवाई होगी?

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।