Jharkhand Tourism Boost: अब सिर्फ रील बनाइए और पाइए ₹10 लाख तक की इनाम राशि – झारखंड सरकार लाई देश की पहली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीति
झारखंड सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों को 10 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने की योजना बनाई है। जानिए क्या है पूरी नीति, कौन उठा सकता है इसका फायदा और किन स्थलों को प्रमोट किया जाएगा।
झारखंड की वादियों में अब सिर्फ पर्यटक ही नहीं, कंटेंट क्रिएटर्स भी दिखेंगे। हेमंत सोरेन सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखी और देश में पहली बार अपनाई जा रही नीति का ऐलान किया है। अब सोशल मीडिया पर रील बनाकर झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्थलों को प्रमोट करने वाले इन्फ्लुएंसर को ₹10 लाख तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
क्या है नीति की खास बात?
राज्य सरकार की योजना के अनुसार, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग एक सोशल मीडिया नीति लागू करने जा रहा है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही प्रभाव में लाया जाएगा। इसका उद्देश्य झारखंड के 528 से अधिक पर्यटन स्थलों को डिजिटल माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमोट करना है।
किसे मिलेगा फायदा?
यदि आप एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं और आपके पास कैमरा, क्रिएटिविटी और कंटेंट है—तो आपके लिए यह सुनहरा अवसर है। हर इन्फ्लुएंसर साल में एक बार इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन कर सकता है।
क्या मिलेंगी सुविधाएं?
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दो दिन का फ्री स्टे झारखंड टूरिज्म के होटलों में
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आवागमन के साधन सरकार की तरफ से
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फॉरेस्ट टूरिज्म को प्रमोट करने के लिए जॉइंट फॉरेस्ट कमेटियों को एक्टिव किया जाएगा
रील के लिए क्या जरूरी है?
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हर रील का कंटेंट यूनिक और प्रभावशाली होना चाहिए
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रील पर कॉपीराइट नहीं होगा, लेकिन निर्माता को श्रेय जरूर मिलेगा
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गलत या आपत्तिजनक कंटेंट पर सरकार सख्ती से कार्रवाई करेगी
प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की लिस्ट भी तैयार:
नीति के तहत 528 पर्यटन स्थलों को चार श्रेणियों में बांटा गया है:
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श्रेणी A (37 स्थल): देवघर का वैद्यनाथ धाम, त्रिकुट पहाड़, मलूटी मंदिर, बासुकीनाथ धाम आदि
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श्रेणी B (57 स्थल), C (112 स्थल), और D (322 स्थल) में अनेक वन क्षेत्र, जलप्रपात, सांस्कृतिक उत्सव स्थल शामिल हैं
झारखंड की संस्कृति भी होगी प्रमोट:
राज्य की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, जीवनशैली और परंपराएं—जैसे सरहुल, सोहराय, करमा और रामनवमी—रील्स के माध्यम से सामने लाई जाएंगी। साथ ही, देवघर, पारसनाथ, रजरप्पा, लुगु बुरु जैसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थल भी इस नीति का हिस्सा होंगे।
पर्यटन से बढ़ेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था:
जैसे-जैसे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, स्थानीय उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा होगा। स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और आत्मनिर्भर झारखंड का सपना साकार होगा।
क्यों है यह पहल ऐतिहासिक?
पहली बार किसी राज्य सरकार ने सोशल मीडिया के प्रभाव को सीधे तौर पर पर्यटन नीति में शामिल किया है। यह पहल झारखंड को डिजिटल इंडिया की यात्रा में एक सशक्त और अग्रणी राज्य बनाएगी।
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