Jamshedpur Awareness: आपदा के समय युवाओं की बड़ी भूमिका, प्रशासन ने दिया अहम संदेश!
जमशेदपुर में "आपदा में युवाओं की भूमिका" पर संगोष्ठी का आयोजन, युवाओं को आपदा प्रबंधन में उनकी जिम्मेदारी बताई गई। जानिए पूरी खबर!

जमशेदपुर: किसी भी संकट की घड़ी में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, चाहे वह प्राकृतिक आपदा हो या मानव-निर्मित संकट। इसी विषय पर बिष्टुपुर के माइकल जॉन ऑडिटोरियम में "आपदा में युवाओं की भूमिका" पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस संगोष्ठी में प्रशासनिक अधिकारियों, स्वयंसेवी संगठनों और सिविल डिफेंस के विशेषज्ञों ने भाग लिया। युवाओं को आपदा प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराते हुए उन्हें इसके लिए तैयार रहने का संकल्प दिलाया गया।
आपदा प्रबंधन में क्यों जरूरी है युवाओं की भागीदारी?
इस कार्यक्रम में डीडीसी अनिकेत सचान और धालभूम एसडीओ शताब्दी मजूमदार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। डीडीसी ने अपने संबोधन में बताया कि किसी भी आपदा के समय युवाओं की भूमिका सबसे अधिक प्रभावी होती है, क्योंकि उनमें साहस, ऊर्जा और तकनीकी समझ होती है।
युवाओं को प्रशिक्षित किया गया कि वे आपातकालीन स्थितियों में किस तरह प्रशासन और राहत टीमों की सहायता कर सकते हैं। उन्हें यह भी बताया गया कि कैसे आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर वे बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
आपदा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां
आपातकालीन स्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देना क्यों जरूरी है?
कैसे स्थानीय स्तर पर बचाव और राहत कार्यों में भाग लिया जा सकता है?
भूकंप, बाढ़, अग्निकांड और महामारी जैसी आपदाओं में युवाओं की सक्रिय भागीदारी कैसे हो?
सिविल डिफेंस के प्रशिक्षकों ने युवाओं को आपातकाल के दौरान राहत कार्यों की रणनीति और उनकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इतिहास भी गवाह है – युवाओं ने हमेशा संकट में निभाई बड़ी भूमिका!
भारत में जब भी कोई बड़ा संकट आया, युवाओं ने समाज की मदद के लिए आगे बढ़कर अहम योगदान दिया।
2001 का गुजरात भूकंप: हजारों युवा स्वयंसेवकों ने राहत कार्यों में हिस्सा लिया।
2013 की केदारनाथ त्रासदी: स्थानीय युवाओं ने बचाव दलों के साथ मिलकर लोगों की मदद की।
2020 का कोविड-19 संकट: देशभर में युवाओं ने ऑक्सीजन सिलेंडर, भोजन और दवाओं की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज के डिजिटल युग में युवा तकनीकी सहायता और सोशल मीडिया के माध्यम से भी आपदा प्रबंधन में योगदान दे सकते हैं।
युवाओं ने लिया संकल्प – आपदा के समय रहेंगे तैयार!
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्राएं, स्वयंसेवी संगठनों के सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
युवाओं ने संकल्प लिया कि वे किसी भी आपदा के समय प्रशासन और राहत दलों की सहायता करेंगे।
आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग लेकर समाज की सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएंगे।
झारखंड में क्यों बढ़ रहा है आपदाओं का खतरा?
झारखंड राज्य भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के कारण विभिन्न आपदाओं के खतरे से घिरा हुआ है।
- भूकंप का खतरा: राज्य का बड़ा हिस्सा सीस्मिक ज़ोन III में आता है।
- बाढ़ और सूखा: मानसून के दौरान कई जिले बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं, जबकि गर्मियों में सूखा पड़ता है।
- खनन क्षेत्र में दुर्घटनाएं: राज्य में कई अवैध खनन क्षेत्र हैं, जहां भूस्खलन जैसी घटनाएं होती रहती हैं।
सरकार और प्रशासन की क्या योजना है?
युवाओं को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग देने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
स्कूल-कॉलेजों में आपदा प्रबंधन को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाएगा।
सिविल डिफेंस और एनडीआरएफ के साथ युवाओं को जोड़ा जाएगा।
अब सवाल उठता है – क्या आप तैयार हैं?
अगर आपके क्षेत्र में कोई आपदा आती है, तो क्या आप राहत कार्यों में भाग लेने के लिए तैयार हैं?
क्या आपने कभी आपदा प्रबंधन से जुड़ी कोई ट्रेनिंग ली है?
क्या प्रशासन को युवाओं के लिए और ज्यादा जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए?
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