Latehar Attack: मधुमक्खियों के डंक से दहला स्कूल, दो दर्जन से ज्यादा बच्चे घायल
झारखंड के लातेहार जिले में एक सरकारी स्कूल में मधुमक्खियों के हमले से मचा हड़कंप। दो दर्जन से अधिक स्कूली बच्चे घायल, सभी की हालत स्थिर। जानिए घटना की पूरी इनसाइड स्टोरी।

लातेहार (झारखंड)। चंदवा प्रखंड स्थित एक मध्य विद्यालय शुक्रवार को अचानक उस वक्त खबरों में आ गया जब वहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों पर मधुमक्खियों का झुंड टूट पड़ा। दोपहर के वक्त स्कूल प्रांगण में खेल रहे बच्चों पर यह हमला इतना अचानक हुआ कि कुछ समझने से पहले ही बच्चे दर्द से कराह उठे।
घटना मध्य विद्यालय सासंग की है, जो रांची-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग पर स्थित है। स्कूल की छत पर पहले से मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता था, लेकिन किसी ने कभी अंदाजा नहीं लगाया था कि यह कभी जानलेवा साबित हो सकता है। शुक्रवार को कुछ हलचल या तेज आवाज से उत्तेजित होकर मधुमक्खियां अचानक उड़ पड़ीं और प्रांगण में खेल रहे बच्चों पर हमला बोल दिया।
कौन-कौन हुए घायल?
इस हमले में 24 से ज्यादा बच्चे घायल हो गए। इनमें अजय भुइयां, अमीश यादव, आकाश कुमार, आयुष कुमार, नाहिद रजा, कृति कुमारी, आशिका कुमारी, माही कुमारी, उत्तम कुमार सोनी, पल्लवी, काजल कुमारी आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। घायल बच्चों को तुरंत चंदवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां डॉक्टर मनोज कुमार और प्रभारी डॉ. नीलिमा कुमारी ने टीम के साथ उनका इलाज शुरू किया।
डॉक्टरों के अनुसार राहत की बात यह है कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं और स्थिति नियंत्रण में है।
स्कूल प्रशासन की लापरवाही या अचानक हादसा?
विद्यालय की प्रभारी शिक्षिका ने बताया कि स्कूल की छत पर मधुमक्खियों ने कुछ हफ्ते पहले ही छत्ता बनाया था, लेकिन इसकी शिकायत या कार्रवाई की दिशा में कोई विशेष कदम नहीं उठाया गया था। यह घटना अब एक चेतावनी के तौर पर देखी जा रही है, जिससे साफ है कि ऐसे प्राकृतिक खतरों के प्रति स्कूलों को और अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है।
मधुमक्खियों के हमले: इतिहास क्या कहता है?
भारत में मधुमक्खियों के हमले कोई नई बात नहीं है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। लेकिन स्कूल जैसे संवेदनशील स्थानों पर यह चिंता का विषय बन जाता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अनुसार मधुमक्खी के डंक से कई बार गंभीर ऐलर्जी या शॉक की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से हर स्कूल में समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट, सफाई, और प्राकृतिक खतरों की पहचान अनिवार्य होनी चाहिए।
क्या होनी चाहिए अगली रणनीति?
-
स्कूल भवन की नियमित जांच – छतों, खिड़कियों और कोनों की गहन जांच
-
प्राकृतिक खतरों पर अलर्ट सिस्टम – मधुमक्खी, सांप, बिच्छू आदि की समय पर पहचान
-
स्थानीय प्रशासन का सहयोग – फायर ब्रिगेड या वन विभाग से समय पर मदद
-
बच्चों को सिखाई जाए जागरूकता – क्या करें जब ऐसी स्थिति हो
शिक्षा के साथ सुरक्षा भी जरूरी
लातेहार की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक सीख है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। प्राकृतिक खतरे जैसे मधुमक्खी का छत्ता, सांपों का प्रवेश या अन्य जंगली जीवों की मौजूदगी, इन सबकी निगरानी अब स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी बननी चाहिए।
झारखंड सरकार और जिला प्रशासन को चाहिए कि वे हर स्कूल में ऐसी घटनाओं की समीक्षा करें और “स्कूल सुरक्षा गाइडलाइन” को और प्रभावी बनाएं।
What's Your Reaction?






