Rambaran Kori Kashish Funeral : रामनगर मुक्तिधाम में सुपुर्द-ए-खाक हुए वरिष्ठ साहित्यकार रामबरन कोरी 'कशिश'
वरिष्ठ साहित्यकार रामबरन कोरी 'कशिश' का अंतिम संस्कार कहाँ और कब किया गया? जानिए उनके जीवन, योगदान और श्रद्धांजलि सभा की पूरी जानकारी।

रामनगर मुक्तिधाम में सुपुर्द-ए-खाक हुए वरिष्ठ साहित्यकार रामबरन कोरी 'कशिश'
भिलाई नगर, छत्तीसगढ़। साहित्य और खेल जगत से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार, हजलकार और फुटबॉल-वॉलीबॉल के जाने-माने रेफरी श्री रामबरन कोरी 'कशिश' का 1 अप्रैल 2025 की सुबह 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे काफी समय से बीमार चल रहे थे और अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए।
उनका अंतिम संस्कार 2 अप्रैल, बुधवार को उनके निवास 2डी, स्ट्रीट 16, सेक्टर 6, भिलाई नगर से निकाली गई अंतिम यात्रा के बाद रामनगर मुक्तिधाम में किया गया। इस दौरान परिवार, मित्र, साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी और खेल जगत से जुड़े उनके प्रशंसकों ने नम आंखों से विदाई दी।
साहित्य और खेल में अतुलनीय योगदान
श्री रामबरन कोरी 'कशिश' साहित्य जगत में अपने हजल लेखन के लिए जाने जाते थे। वे पोस्ट ऑफिस विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद भी साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उन्होंने खेल के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया और फुटबॉल और वॉलीबॉल के राष्ट्रीय स्तर के रेफरी रहे।
परिवार में छाई शोक की लहर
स्वर्गीय रामबरन कोरी के परिवार में उनकी पत्नी ललिता कोरी, बेटा संदीप कोरी, और बेटी शिल्पा प्रसाद हैं। उनके निधन से परिवार और उनके निकट संबंधियों में गहरा शोक है।
वे राम कुमार कोरी और रामाधार कोरी के भाई थे। उनके जाने से न केवल परिवार बल्कि साहित्य, पत्रकारिता और खेल जगत में भी एक शून्य उत्पन्न हो गया है।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
उनकी अंतिम यात्रा में साहित्य, खेल और पत्रकारिता जगत से जुड़ी कई जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया। सभी ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे:
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भिलाई नगर के विधायक देवेंद्र यादव
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प्रेस क्लब के अध्यक्ष सूर्या राव
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गोविंद पाल (प्रेसिडेंट, मुक्तकंठ साहित्य समिति भिलाई)
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प्रदीप भट्टाचार्य (संपादक, छत्तीसगढ़ आसपास पोर्टल न्यूज चैनल)
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शेफाली भट्टाचार्य (प्रबंध संपादक, छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज पोर्टल)
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वरिष्ठ कहानीकार लोक बाबू (प्रगतिशील साहित्य समिति)
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परमेश्वर वैष्णव, रजनीकांत श्रीवास्तव, सतीश चौहान, शायर मुमताज, यूसुफ सागर
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डा. संजय दानी, ओमप्रकाश जयसवाल, डा. नौशाद अहमद सिद्दीकी
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अनवर हुसैन खान, हाजी मिर्जा, ओमवीर करण, सुरेश बंछोर, विजय कश्यप
इसके अलावा, फुटबॉल और वॉलीबॉल खिलाड़ियों ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनमें डी. साजी कुमार, के. वेंकट राव, मुर्तजा खान, राजेंद्र राय, निर्मल सिंह, हेमप्रकाश नायक आदि शामिल थे।
दूर से भी दी गई श्रद्धांजलि
उनके निधन की खबर फैलते ही व्हाट्सएप और फोन कॉल्स के माध्यम से भी बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि देने वालों में साहित्यकारों, पत्रकारों और समाजसेवियों के नाम प्रमुख रूप से शामिल रहे, जैसे:
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डा. महेशचंद्र शर्मा, नलिनी श्रीवास्तव, उमेश दीक्षित, नरेंद्र सिक्केवाल, भूषण चिपड़े
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संतोष झांझी, विद्या गुप्ता, अनुराधा बख्शी, सूचि भवि, माला सिंह, प्रीति सरू
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बुद्धसेन शर्मा, अनिल श्रीवास्तव, हरीश, हुसैन मुजाहिर, समीर त्रिपाठी
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एडवोकेट एस.आर. यादव, राकेश अग्रवाल, डा. अलका, हीरालाल यादव, राजेश जैन राही
साहित्य जगत में उनकी यादें हमेशा रहेंगी जिंदा
वरिष्ठ साहित्यकार रामबरन कोरी 'कशिश' का इस दुनिया से जाना एक युग का अंत है। उन्होंने अपने जीवन में हजारों लोगों को प्रेरित किया, अपनी लेखनी से समाज को दिशा दी और खेल क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।
उनका योगदान हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा, और उनकी साहित्यिक एवं खेल उपलब्धियों को आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी।
ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। ????
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