Latehar Firing: एक रात, दो हमले और दहशत में पूरा इलाका! पीएलएफआई ने छोड़ा चेतावनी पत्र
झारखंड के लातेहार में पीएलएफआई उग्रवादियों ने एक ही रात में ईंट भट्ठा और क्रशर पर हमला कर दिया। गोलीबारी में मजदूर घायल, चेतावनी भरा पर्चा छोड़ उग्रवादी फरार। जानिए पूरी कहानी।

झारखंड का लातेहार जिला एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह बनी है चंदवा प्रखंड में हुई पीएलएफआई उग्रवादियों की गोलीबारी की दोहरी वारदात। शुक्रवार की रात, जब लोग चैन की नींद सो रहे थे, चंदवा क्षेत्र के हड़गढ़वा में ईंट भट्ठा और क्रशर साइट पर आतंक का साया मंडरा रहा था।
गौरतलब है कि झारखंड की धरती लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों की चपेट में रही है, लेकिन हाल के वर्षों में पुलिस की कार्रवाई के कारण इन घटनाओं में कमी आई थी। ऐसे में एक साथ दो जगहों पर हुई यह ताजा घटना फिर से चिंता का विषय बन गई है।
ईंट भट्ठे पर हमला, मजदूर को लगी गोली
रात करीब साढ़े नौ बजे, आधा दर्जन से ज्यादा हथियारबंद उग्रवादियों ने पहले फिरोज अहमद के ईंट भट्ठे को निशाना बनाया। वहां मौजूद मजदूरों से मोबाइल फोन छीन लिए गए और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। इसी दौरान लोहरदगा निवासी मजदूर अलीम अंसारी को गोली लग गई, जो गंभीर रूप से घायल हो गया।
क्रशर साइट पर भी मचा कहर
ईंट भट्ठे के बाद उग्रवादियों का अगला निशाना बना संतोष कंस्ट्रक्शन का क्रशर प्लांट। यहां भी मोबाइल फोन छीनने के बाद कर्मियों से मारपीट की गई और कई राउंड फायरिंग की गई। जाते-जाते उग्रवादियों ने पीएलएफआई संगठन के सूर्या कुजूर उर्फ तूफान जी के नाम से एक चेतावनी पत्र छोड़ा, जिसमें लिखा था — “बिना बात किए काम नहीं करना है”।
इलाके में फैला डर, पुलिस कर रही जांच
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायल मजदूर को चंदवा सीएचसी लाया गया। यहां से उसे बेहतर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठा किए हैं और मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।
झारखंड में उग्रवाद: एक ऐतिहासिक नजर
झारखंड की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति के कारण यह इलाका लंबे समय से नक्सल और उग्रवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। विशेषकर लातेहार, गढ़वा, पलामू जैसे जिलों में पीएलएफआई, टीएसपीसी जैसे संगठन वर्षों से सक्रिय रहे हैं। सरकार और सुरक्षा बलों ने लगातार प्रयासों से इन गतिविधियों पर काफी हद तक काबू पाया है, लेकिन हाल की घटनाएं दिखाती हैं कि अभी भी चुनौतियां बाकी हैं।
नई चुनौती, नई रणनीति की दरकार
इस घटना ने एक बार फिर सरकार, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि झारखंड के ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा के लिए अधिक प्रभावी रणनीति की आवश्यकता है। साथ ही, स्थानीय उद्योगों और मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सहायता और गश्ती व्यवस्था को मजबूत करना होगा।
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