Jamshedpur Breakthrough: टाटा स्टील की पहली महिला फायर-फाइटर्स बैच ने रचा इतिहास, जानें कैसे बदलेगा परिदृश्य!

टाटा स्टील ने पहली महिला फायर-फाइटर्स बैच की पासिंग आउट परेड आयोजित कर नया इतिहास रच दिया। जानें कैसे यह कदम फायर सर्विसेज में बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा!

Feb 27, 2025 - 17:45
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Jamshedpur Breakthrough: टाटा स्टील की पहली महिला फायर-फाइटर्स बैच ने रचा इतिहास, जानें कैसे बदलेगा परिदृश्य!
Jamshedpur Breakthrough: टाटा स्टील की पहली महिला फायर-फाइटर्स बैच ने रचा इतिहास, जानें कैसे बदलेगा परिदृश्य!

झारखंड के जमशेदपुर में टाटा स्टील ने फायर सर्विसेज के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। कंपनी ने अपनी पहली महिला फायर-फाइटर्स बैच की पासिंग आउट परेड का आयोजन किया, जो भारत में इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने का संकेत दे रही है।

कैसे हुआ यह ऐतिहासिक बदलाव?

टाटा स्टील की यह पहल एक सामाजिक क्रांति से कम नहीं है। अब तक, फायर-फाइटिंग एक पुरुष प्रधान क्षेत्र माना जाता था, लेकिन "फ्लेम्स ऑफ चेंज" इनिशिएटिव के तहत टाटा स्टील ने इस सोच को बदलने का बीड़ा उठाया। इस विशेष बैच को जमशेदपुर स्थित फायर एंड सिक्योरिटी ट्रेनिंग सेंटर में गहन प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद, इन्हें एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, कोलकाता के सहयोग से 16 सप्ताह का विशेष सर्टिफिकेशन कोर्स भी कराया गया।

कौन-कौन रहा इस ऐतिहासिक पल का गवाह?

इस कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट कारपोरेट सर्विसेज चाणक्य चौधरी, वीपी एचआरएम अतरई सान्याल, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी टुन्नु, चीफ लर्निंग एंड डेवलपमेंट व चीफ डाइवर्सिटी ऑफिसर जया सिंह पांडा समेत अन्य अधिकारी शामिल थे।

टाटा स्टील के चीफ सिक्योरिटी एंड ब्रांड प्रोटेक्शन अरविंद कुमार सिन्हा ने इन महिला फायर-फाइटर्स का स्वागत किया और बताया कि यह कदम लैंगिक समानता और कार्यस्थल पर विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

"फ्लेम्स ऑफ चेंज" क्यों है खास?

"फ्लेम्स ऑफ चेंज" टाटा स्टील की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान फायर सर्विसेज में सांस्कृतिक बदलाव लाने के लिए उठाया गया है। इस पहल के तहत न केवल महिलाओं को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिला, बल्कि उन्हें अत्याधुनिक फायर-फाइटिंग और रेस्क्यू ऑपरेशंस के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण भी दिया गया।

कैसा रहा महिला फायर-फाइटर्स का प्रदर्शन?

पासिंग आउट परेड में इन महिला फायर-फाइटर्स का अनुशासन, समर्पण और दक्षता देखने लायक थी। वीपी एचआरएम अतरई सान्याल ने इन महिलाओं को कार्य और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी और उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की।

इस मौके पर चाणक्य चौधरी ने भी इन महिला फायर-फाइटर्स और उनके परिवारों का धन्यवाद करते हुए कहा कि,
"फायर-फाइटिंग में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए नियमित मॉक ड्रिल बेहद जरूरी है।"

महिला फायर-फाइटर्स को दिया गया सम्मान

इस विशेष आयोजन के दौरान सर्वश्रेष्ठ और द्वितीय सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षुओं को सम्मानित किया गया, साथ ही उन प्रशिक्षकों को भी विशेष रूप से सराहा गया, जिन्होंने इन महिला फायर-फाइटर्स को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्या कहता है इतिहास?

अगर हम इतिहास की बात करें तो फायर-फाइटिंग हमेशा से एक कठिन और जोखिमभरा पेशा रहा है, जिसे ज्यादातर पुरुषों का ही क्षेत्र माना जाता था। लेकिन दुनिया में कई जगहों पर महिलाओं ने इस पेशे में कदम रखकर मिसाल कायम की है। भारत में यह पहला मौका है जब किसी बड़ी कंपनी ने अपने स्तर पर महिला फायर-फाइटर्स को प्रशिक्षित कर इस क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

क्या बदल सकता है यह कदम?

टाटा स्टील की इस पहल से यह साफ है कि आने वाले समय में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ ऑफिस डेस्क तक सीमित नहीं रहेगी। अब वे उन क्षेत्रों में भी मजबूती से आगे बढ़ेंगी, जिन्हें कभी सिर्फ पुरुषों के लिए उपयुक्त माना जाता था।

टाटा स्टील का यह कदम सिर्फ एक बैच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आने वाले वर्षों में भारत के फायर-फाइटिंग सेक्टर में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की नींव रखेगा। इससे भविष्य में अन्य कंपनियों और सरकारी एजेंसियों को भी महिला सशक्तिकरण की दिशा में इस तरह के कदम उठाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

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Nihal Ravidas निहाल रविदास, जिन्होंने बी.कॉम की पढ़ाई की है, तकनीकी विशेषज्ञता, समसामयिक मुद्दों और रचनात्मक लेखन में माहिर हैं।