Ranchi Bribery: हड़कंप मचा, सीएम हेमंत सोरेन ने वीडियो किया रीपोस्ट और नाप दिए गए दो ट्रैफिक पुलिसकर्मी
रांची के टाटीसिलवे में रिश्वत लेते कैमरे में कैद हुए दो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कड़े रुख के बाद गाज गिर गई है। परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ के हस्तक्षेप और सिटी एसपी द्वारा आरोपी पुलिसकर्मियों की पहचान किए जाने की पूरी सनसनीखेज हकीकत यहाँ दी गई है वरना आप भी सिस्टम में मचे इस बड़े हड़कंप से अनजान रह जाएंगे।
रांची, 23 दिसंबर 2025 – झारखंड की राजधानी में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐसी डिजिटल स्ट्राइक हुई है, जिसने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। सोमवार की शाम एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैला, जिसमें दो ट्रैफिक पुलिसकर्मी नियमों का उल्लंघन करने वालों से कथित तौर पर 'लेन-देन' करते कैमरे में कैद हुए। मामला तब और गंभीर हो गया जब खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल से रीपोस्ट कर दिया। मुख्यमंत्री की इस सक्रियता के बाद रांची पुलिस ने महज चंद घंटों में दोनों पुलिसकर्मियों की शिनाख्त कर ली है और अब उन पर बर्खास्तगी जैसी बड़ी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
इतिहास: झारखंड पुलिस की छवि और 'कैमरा सर्विलांस' का दौर
ऐतिहासिक रूप से रांची के ट्रैफिक पॉइंट्स, विशेषकर टाटीसिलवे और बैंक मोड़, औद्योगिक और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए कुख्यात रहे हैं। 2000 में झारखंड गठन के बाद से ही पुलिस बल में पारदर्शिता लाने के लिए कई सुधार किए गए, लेकिन सड़क पर होने वाली 'अवैध वसूली' एक पुराने दाग की तरह सिस्टम से चिपकी रही। हालांकि, पिछले पांच वर्षों में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उदय ने आम जनता को 'सिटिजन जर्नलिस्ट' बना दिया है। 2021 के बाद से झारखंड में यह तीसरी बड़ी घटना है जब किसी वायरल वीडियो के आधार पर सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय ने दखल दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि अब वर्दी के पीछे छिपकर भ्रष्टाचार करना नामुमकिन होता जा रहा है।
टाटीसिलवे बैंक मोड़: वो 30 सेकंड का वीडियो जिसने खेल बिगाड़ दिया
यह पूरी घटना रांची के टाटीसिलवे थाना क्षेत्र के बैंक मोड़ की बताई जा रही है।
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वीडियो का सच: वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों को रोककर उनके कागजात चेक करने के बजाय, उनसे कुछ 'गुपचुप' तरीके से लिया जा रहा है।
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दिनेश्वर पटेल की हिम्मत: इस वीडियो को सबसे पहले हजारीबाग के एक सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश्वर पटेल ने साझा किया था। उन्होंने दावा किया कि जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह लूटना बंद होना चाहिए।
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सियासी हलचल: वीडियो देखते ही परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मुख्यमंत्री और रांची डीसी मंजुनाथ भजंत्री को टैग करते हुए लिखा कि ऐसे कर्मचारी राज्य की छवि धूमिल कर रहे हैं।
सिटी एसपी की कार्रवाई: पहचान हुई, अब सस्पेंशन की बारी
मुख्यमंत्री के रीपोस्ट करने के बाद रांची के सिटी एसपी अजीत कुमार ने मामले की कमान खुद संभाली।
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पहचान की पुष्टि: एसपी ने 'पीटीआई भाषा' को पुष्टि की है कि वीडियो में दिख रहे दोनों ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की पहचान कर ली गई है। वे उस वक्त टाटीसिलवे बैंक मोड़ पर तैनात थे।
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कानूनी प्रक्रिया: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू कर दी गई है। प्रथम दृष्टया साक्ष्य इतने मजबूत हैं कि उन्हें जल्द ही निलंबित किया जा सकता है।
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सिस्टम को चेतावनी: सिटी एसपी ने स्पष्ट किया है कि वर्दी पहनकर भ्रष्टाचार करने वालों के लिए रांची पुलिस में कोई जगह नहीं है।
रिश्वतकांड का पूरा घटनाक्रम (Timeline of Action)
| समय | गतिविधि |
| सोमवार दोपहर | टाटीसिलवे में रिश्वत का वीडियो रिकॉर्ड हुआ |
| सोमवार शाम | दिनेश्वर पटेल ने वीडियो सोशल मीडिया पर डाला |
| रात 8:00 बजे | परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने कार्रवाई की मांग की |
| रात 9:30 बजे | सीएम हेमंत सोरेन ने वीडियो रीपोस्ट कर हड़कंप मचाया |
| मंगलवार सुबह | सिटी एसपी ने दोनों पुलिसकर्मियों की पहचान की |
भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' का संदेश
इस घटना ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों को एक कड़ा संदेश दिया है। परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने साफ कर दिया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की सरकार भ्रष्टाचार के किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेगी। टाटीसिलवे बैंक मोड़ जैसे संवेदनशील पॉइंट्स पर अब सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने और पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्म कैमरों (Body-worn Cameras) की अनिवार्यता पर विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
जनता की जीत और पुलिस का सबक
रांची का यह 'रिश्वतकांड' साबित करता है कि जनता की सतर्कता और सोशल मीडिया की ताकत बड़े से बड़े भ्रष्ट अधिकारी को घुटनों पर ला सकती है। मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी ने पुलिस विभाग को जवाबदेह बनाया है। अब देखना यह है कि पहचान के बाद इन पुलिसकर्मियों को कानून के कटघरे में कितनी कड़ी सजा मिलती है।
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