Sonari Mystery: खौफनाक अंत, जमशेदपुर में पत्नी की हत्या कर भागे पति का नदी में मिला शव, सोनारी मर्डर मिस्ट्री का दुखद क्लाइमेक्स
जमशेदपुर के सोनारी में स्वर्णरेखा नदी से बिरसानगर निवासी उमंग मुखी का शव मिलने के बाद सनसनी फैल गई है। 2 जनवरी को पत्नी सलोनी की संदिग्ध मौत के बाद फरार चल रहे आरोपी पति के इस खौफनाक कदम और इस मर्डर-कम-सुसाइड के पीछे छिपी असली वजहों की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस 'अधूरे न्याय' की दास्ताँ कभी नहीं जान पाएंगे।
जमशेदपुर/सोनारी, 6 जनवरी 2026 – लौहनगरी के सोनारी थाना क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी के किनारे सोमवार की शाम एक ऐसी खबर आई, जिसने पंचवटी नगर मर्डर मिस्ट्री को एक डरावने मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। पिछले चार दिनों से फरार चल रहे आरोपी पति उमंग मुखी का शव नदी से बरामद किया गया है। 2 जनवरी को अपनी पत्नी सलोनी मुखी की मौत के बाद से लापता उमंग का इस तरह अंत होना कई अनसुलझे सवालों को जन्म दे रहा है। पुलिस इसे पत्नी की हत्या के बाद बदनामी और कानून के डर से की गई आत्महत्या मान रही है। जिस कहानी की शुरुआत एक बंद कमरे में फंदे से हुई थी, उसका अंत नदी की लहरों के बीच 'लाश' के रूप में हुआ।
स्वर्णरेखा से मिला शव: मौत का खौफनाक सच
थाना प्रभारी मधुसूदन दे के नेतृत्व में सोमवार देर शाम पुलिस ने नदी से एक युवक का शव बाहर निकाला, जिसकी पहचान बिरसानगर के उमंग मुखी के रूप में हुई।
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हत्या का आरोप: बता दें कि 2 जनवरी को सलोनी मुखी का शव उसके कमरे में पंखे से लटका मिला था। सलोनी की बहन सारथी ने सीधे तौर पर उमंग पर अपनी बहन की हत्या का आरोप मढ़ा था।
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फरार पति का सुराग: वारदात के बाद से ही उमंग गायब था। पुलिस की टीमें उसकी तलाश में दबिश दे रही थीं, लेकिन उसने गिरफ्तारी से पहले ही मौत को गले लगाना बेहतर समझा।
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आत्मग्लानि या डर: पुलिस का मानना है कि पत्नी की मौत के बाद सामाजिक बहिष्कार और जेल जाने के डर से उमंग ने नदी में छलांग लगा दी होगी।
घर-जमाई बनकर रहता था उमंग, विवादों में बीता आखिरी वक्त
उमंग मुखी की कहानी किसी फिल्मी ट्रेजेडी से कम नहीं है।
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अकेलापन: उमंग के माता-पिता का निधन पहले ही हो चुका था। वह पूरी तरह से अपने ससुराल पर निर्भर था और पंचवटी नगर में 'घर-जमाई' के रूप में रह रहा था।
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कलह की शुरुआत: पिछले कुछ महीनों से पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी। छोटी-छोटी बातों पर होने वाला विवाद 2 जनवरी को अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया।
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वो आखिरी फोन कॉल: गौर करने वाली बात यह है कि घटना के दिन उमंग ने ही अपनी साली को फोन कर सलोनी के फंदे से लटके होने की सूचना दी थी और उसके बाद मोबाइल बंद कर रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया था।
सोनारी केस डायरी: मौत का घटनाक्रम (Case Timeline)
| तारीख | घटना | विवरण |
| 02 जनवरी | पत्नी की मौत | सलोनी मुखी का शव पंखे से लटका मिला |
| 02 जनवरी शाम | पति फरार | उमंग मुखी ससुराल से गायब हो गया |
| 03-04 जनवरी | पुलिस तलाश | बिरसानगर और रिश्तेदारों के यहाँ छापेमारी |
| 05 जनवरी रात | शव बरामद | स्वर्णरेखा नदी से उमंग की लाश मिली |
| 06 जनवरी | जांच जारी | पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार |
इतिहास और समाज: जमशेदपुर में बढ़ते 'डोमेस्टिक वॉयलेंस' का दाग
जमशेदपुर के सोनारी और बिरसानगर जैसे श्रमिक बाहुल्य इलाकों में पारिवारिक विवादों के हिंसक होने का इतिहास पुराना रहा है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, उमंग जैसे लोग जो आर्थिक या सामाजिक रूप से ससुराल पर निर्भर होते हैं, उनमें 'हीन भावना' (Inferiority Complex) अक्सर हिंसक रूप ले लेती है। 1990 के दशक में भी कोल्हान क्षेत्र में ऐसे कई मामले सामने आए थे जहाँ विवाद के बाद पति या पत्नी ने चरम कदम उठाए। 2026 की यह घटना दर्शाती है कि समाज में अब भी काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की भारी कमी है, जिसके अभाव में छोटी रंजिशें 'डबल डेथ' में बदल रही हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है पुलिस की नजर
सोनारी थाना पुलिस अब मामले की हर एंगल से पड़ताल कर रही है।
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मर्डर या सुसाइड: क्या सलोनी ने सच में सुसाइड किया था या उमंग ने उसकी हत्या कर फंदे से लटकाया? और क्या उमंग ने खुदकुशी की या उसके साथ कोई अनहोनी हुई? इन सब राजों से पर्दा पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही उठाएगी।
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साक्ष्यों का मिलान: पुलिस उमंग के आखिरी मोबाइल लोकेशन और नदी के पास मिले साक्ष्यों का मिलान कर रही है।
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कानूनी प्रक्रिया: उमंग के शव को एमजीएम अस्पताल के शीतगृह में रखा गया है, जहाँ मंगलवार को परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया जाएगा।
रिश्तों का खूनी अंत
सोनारी की इस घटना ने दो परिवारों को उजाड़ दिया है। उमंग और सलोनी के बीच जो भी विवाद था, उसका समाधान मौत नहीं हो सकता था। आज एक घर बंद है और दूसरा गमगीन। यह मर्डर मिस्ट्री अब पुलिस फाइलों में 'बंद' होने की कगार पर है, लेकिन पीछे छोड़ गई है कई कड़वे सबक।
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