Jamshedpur Tragedy: भिख मांगकर पालता था परिवार! सुबह 5 बजे सड़क पर थी सुधा दूध की तेज रफ्तार गाड़ी, टक्कर से विकलांग रामचंद की दर्दनाक मौत!
जमशेदपुर के सिदगोड़ा बागुनहातु में शनिवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा। दूध सप्लाई करने वाली तेज रफ्तार गाड़ी ने विकलांग व्यक्ति रामचंद (50) को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। रामचंद भीख मांगकर अपने दो बच्चों का भरण-पोषण करता था। स्थानीय लोगों ने सप्लाई वाहनों की गति पर नियंत्रण की मांग की।
Jamshedpur Tragedy: इस्पात नगरी जमशेदपुर से एक ऐसी हृदय विदारक खबर सामने आई है, जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं है, बल्कि गरीबी और लापरवाही की टक्कर है, जिसने एक लाचार परिवार के एकमात्र सहारे को छीन लिया है। सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के बागुनहातु में शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में लगभग 50 वर्षीय विकलांग व्यक्ति की मौत हो गई।
परिवार का इकलौता सहारा था रामचंद
मृतक की पहचान रामचंद (उम्र लगभग 50 वर्ष) के रूप में हुई है, जो बागुनहातु फुटबॉल मैदान के पास क्वार्टर संख्या 16/967, सी ब्लॉक का निवासी था। सबसे मार्मिक पहलू यह है कि रामचंद विकलांग थे और वह भीख मांगकर अपने दो छोटे बच्चों और परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनका यह संघर्ष ही उनके परिवार के लिए जीवन का आधार था।
रोज की तरह, रामचंद शनिवार सुबह करीब 5 बजे अपने घर से निकले थे—शायद दिन की शुरुआत करने या अपनी जरूरत पूरी करने के लिए। लेकिन उन्हें क्या पता था कि सुबह की वह सड़क उनके जीवन की आखिरी मंजिल साबित होगी।
सुबह 5 बजे की 'तेज रफ्तार' और 'भीषण टक्कर'
सुबह के उस शांतिपूर्ण समय में, जब सड़क पर यातायात कम होता है, एक सुधा दूध की सप्लाई करने वाली गाड़ी ने तेज रफ्तार में उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। विकलांग होने के कारण रामचंद खुद को संभाल नहीं पाए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसा होते ही स्थानीय लोग तुरंत दौड़े और गाड़ी चालक को रोका। मानवता दिखाते हुए, बाद में गाड़ी मालिक खुद रामचंद को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल (MGM Hospital) लेकर पहुँचे।
हालांकि, टक्कर इतनी भीषण थी कि अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने जाँच के बाद रामचंद को मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
खबर मिलते ही, सिदगोड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की। वहीं, हादसे की खबर पाकर परिजन एमजीएम अस्पताल पहुँचे। अपने घर के इकलौते सहारे को इस तरह खो देने के सदमे में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। उनके लिए यह सिर्फ एक मौत नहीं है, बल्कि भविष्य की अनिश्चितता और भुखमरी का डर है।
सप्लाई वाहनों की गति पर सवाल
स्थानीय लोगों ने इस घटना के बाद प्रशासन से गंभीर मांग की है। उनका कहना है कि सुबह के समय अक्सर दूध और अन्य सप्लाई वाहन (Supply Vehicles) तेज गति से चलते हैं ताकि समय पर डिलीवरी हो सके। इस लापरवाही भरी रफ्तार के कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन सुबह के समय इन सप्लाई वाहनों की गति पर नियंत्रण रखे और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराए, ताकि रामचंद जैसी दर्दनाक घटना दोबारा न हो।
पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि कमजोर लोगों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल है।
क्या आप जमशेदपुर में सुबह के समय सप्लाई वाहनों के लिए गति सीमा (Speed Limit) के बारे में जानना चाहेंगे?
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