Jamshedpur Kidnapping: कैरव गांधी अपहरण कांड का सनसनीखेज खुलासा, खाकी वर्दी पहनकर आए थे लुधियाना और बिहार के 'इंटरस्टेट' किडनैपर्स, पूरे गैंग का अंत
जमशेदपुर के कारोबारी पुत्र कैरव गांधी अपहरण कांड में पुलिस ने लुधियाना और बिहार के खूंखार अपराधियों को दबोच लिया है। वर्दी पहनकर किडनैपिंग करने और 6 महीने तक शहर में छिपकर रेकी करने की पूरी फिल्मी साजिश यहाँ मौजूद है वरना आप जमशेदपुर की इस सबसे बड़ी क्राइम फाइल का खुलासा मिस कर देंगे।
जमशेदपुर/बिष्टुपुर, 21 फरवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर को दहला देने वाले कैरव गांधी अपहरण कांड में पुलिस ने एक ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसने अपराधियों के 'इंटरस्टेट सिंडिकेट' की कमर तोड़ दी है। बिष्टुपुर सीएच एरिया निवासी कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी का अपहरण कोई मामूली वारदात नहीं, बल्कि पंजाब और बिहार के अपराधियों द्वारा रची गई एक गहरी साजिश थी। पुलिस ने अब इस गिरोह के उन चेहरों को बेनकाब कर दिया है, जो लुधियाना से लेकर शेखपुरा तक फैले हुए थे। खाकी वर्दी का इस्तेमाल और 6 महीने की लंबी रेकी—इस केस की परतें किसी बॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं हैं।
साजिश का गढ़: साकची में 6 महीने तक छिपे रहे 'शिकारी'
इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अपहरणकर्ता कोई बाहरी अनजान नहीं थे, बल्कि वे शहर के बीचों-बीच रह रहे थे।
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सीक्रेट रेंटल: मुख्य साजिशकर्ता का सहयोगी अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह (लुधियाना) करीब 6 माह पहले ही जमशेदपुर आ गया था। उसने साकची में अमरिंदर के नाम से कमरा लिया और वहीं से कैरव की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी।
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पहचान छिपाने का खेल: मास्टरमाइंड ने इतनी शातिर चाल चली थी कि गैंग के सदस्यों को आपस में एक-दूसरे से मिलवाया ही नहीं गया था, ताकि अगर कोई एक पकड़ा जाए, तो पूरा गिरोह सुरक्षित रहे।
वर्दी पहनकर आए और स्कॉर्पियो में ले उड़े
13 जनवरी को कदमा-सोनारी लिंक रोड पर जो हुआ, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए थे।
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नकली पुलिस: अमरिंदर सिंह, गुड्डू, इमरान और रमीज पुलिस की वर्दी पहनकर मौके पर पहुँचे ताकि रास्ते में कोई उन्हें रोके नहीं।
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हाईवे पर अदला-बदली: अपहरण के बाद कैरव को स्कॉर्पियो से चांडिल गोलचक्कर ले जाया गया। वहां पुलिस को चकमा देने के लिए गाड़ियां बदली गईं और अलग-अलग रास्तों से अपराधी शहर से बाहर भागे।
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गया का 'सेफ हाउस': रांची और डोभी होते हुए कैरव को बिहार के गया जिले के बिसर गांव में छिपाकर रखा गया था।
कैरव गांधी केस: गिरफ्तार अपराधियों की प्रोफाइल (Arrest Dashboard)
| नाम | निवासी | भूमिका |
| अमरिंदर सिंह | लुधियाना, पंजाब | सह-साजिशकर्ता (रेकी मास्टर) |
| मनप्रीत सिंह सेखो | लुधियाना, पंजाब | वाहन चालक (किडनैपिंग कार) |
| राजकरण यादव | शेखपुरा, बिहार | सहयोगी (ऑन-स्पॉट सपोर्ट) |
| संतोष कुमार (विल्लेन) | शेखपुरा, बिहार | बैकअप टीम |
| गुरदीत शेर सिंह | लुधियाना, पंजाब | साजिश और लॉजिस्टिक्स |
देशव्यापी छापेमारी: दिल्ली से कोलकाता तक चला ऑपरेशन
कैरव की बरामदगी के बाद अपराधी देश के अलग-अलग कोनों में छिप गए थे।
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SIT की कामयाबी: जमशेदपुर पुलिस की विशेष टीम ने पंजाब, दिल्ली और कोलकाता में छापेमारी की।
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पकड़-धकड़: मनप्रीत और अमरिंदर को लुधियाना से, गुरदीत को कोलकाता से, संतोष को गाजियाबाद (दिल्ली NCR) से और राजकरण को बिहार से दबोचा गया।
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अगला निशाना: पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि गिरोह के ज्यादातर गुर्गे अंदर हैं, अब बस मुख्य मास्टरमाइंड की बारी है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें अभी भी कैंप कर रही हैं।
अपराधियों के लिए कड़ा संदेश
जमशेदपुर पुलिस ने जिस तरह से इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाया है, उससे कारोबारियों में सुरक्षा का भाव लौटा है। कैरव गांधी का सुरक्षित घर लौटना और पूरे गैंग का सलाखों के पीछे पहुँचना कानून की बड़ी जीत है।
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