Chhatrapati Shivaji Jayanti: हिंदवी स्वराज्य के वो अनसुने किस्से, जिसने मुगलों के गुरूर को मिट्टी में मिला दिया, 15 की उम्र में फतह किया था पहला किला

छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उनके शौर्य और रणनीतियों का वो सच यहाँ मौजूद है जिसने भारतीय नौसेना की नींव रखी और मुगलों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। 15 साल की उम्र में तोरणा किला जीतने और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की पूरी वीरगाथा यहाँ पढ़ें वरना आप इतिहास का सबसे प्रेरणादायक अध्याय मिस कर देंगे।

Feb 19, 2026 - 17:18
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Chhatrapati Shivaji Jayanti: हिंदवी स्वराज्य के वो अनसुने किस्से, जिसने मुगलों के गुरूर को मिट्टी में मिला दिया, 15 की उम्र में फतह किया था पहला किला
Chhatrapati Shivaji Jayanti: हिंदवी स्वराज्य के वो अनसुने किस्से, जिसने मुगलों के गुरूर को मिट्टी में मिला दिया, 15 की उम्र में फतह किया था पहला किला

भारत/महाराष्ट्र, 19 फरवरी 2026 – आज पूरा देश अदम्य साहस और न्यायप्रियता के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मना रहा है। 19 फरवरी 1630 को पुणे के शिवनेरी दुर्ग में जन्मा यह बालक केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि एक ऐसा विचार था जिसने सदियों की दासता को झटक कर 'हिंदवी स्वराज्य' का सपना सच कर दिखाया। शिवाजी महाराज का नाम लेते ही रगों में दौड़ता खून और 'जय भवानी, जय शिवाजी' का उद्घोष आज भी हर भारतीय को गौरवान्वित करता है।

शिवनेरी से रायगढ़ तक: एक महानायक का उदय

शिवाजी महाराज का जन्म शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई के घर हुआ था। उनकी परवरिश में जीजाबाई ने रामायण और महाभारत के संस्कार भरे, जिसने उन्हें एक धर्मरक्षक और साहसी राजा बनाया।

  • साधारण शुरुआत, असाधारण लक्ष्य: शिवाजी किसी बड़े राजघराने के वारिस नहीं थे, बल्कि एक दरबारी के बेटे थे। लेकिन उनकी दूरदर्शी सोच ने उन्हें मराठा साम्राज्य का 'छत्रपति' बना दिया।

  • 15 साल की उम्र में इतिहास: जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद में व्यस्त होते हैं, उस 15 साल की उम्र में शिवाजी ने तोरणा किला जीतकर दुनिया को बता दिया कि मराठा शक्ति का उदय हो चुका है।

  • सर्वधर्म समभाव: शिवाजी महाराज ने हमेशा सभी धर्मों का सम्मान किया, लेकिन अपनी संस्कृति और स्वराज्य की रक्षा के लिए कभी समझौता नहीं किया।

मुगलों के लिए काल: गोरिल्ला युद्ध और सैन्य रणनीतियां

छत्रपति शिवाजी महाराज की युद्ध नीतियां आज भी दुनिया भर की सैन्य अकादमियों में पढ़ाई जाती हैं।

  1. छापामार युद्ध (Gorilla Warfare): कोंकण की पहाड़ियों और घने जंगलों का इस्तेमाल कर उन्होंने मुगलों और आदिलशाही सेनाओं की नाक में दम कर रखा था।

  2. भारतीय नौसेना के जनक: शिवाजी महाराज पहले ऐसे भारतीय शासक थे जिन्होंने समुद्र की शक्ति को पहचाना और एक मजबूत 'मराठा नौसेना' का निर्माण किया। इसीलिए उन्हें 'Father of Indian Navy' कहा जाता है।

  3. स्वभाषा का सम्मान: उन्होंने फारसी के प्रभुत्व को खत्म कर संस्कृत और मराठी को राजकाज की भाषा बनाया, जो उनकी सांस्कृतिक दूरदर्शिता का प्रमाण है।

छत्रपति शिवाजी महाराज: गौरवशाली जीवन यात्रा (Timeline)

मुख्य घटना विवरण (Details)
जन्म तिथि 19 फरवरी 1630 (शिवनेरी दुर्ग)
पिता और माता शाहजी भोंसले एवं जीजाबाई
प्रथम विजय 1645 में तोरणा किला फतह (मात्र 15 वर्ष की आयु)
मुख्य लक्ष्य हिंदवी स्वराज्य की स्थापना
महाप्रयाण 3 अप्रैल 1680 (रायगढ़ किला)

आज की प्रासंगिकता: शिवाजी महाराज का संदेश

3 अप्रैल 1680 को रायगढ़ में उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनके विचार आज भी अमर हैं।

  • आत्मविश्वास की शक्ति: सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी ताकतों से लड़ने का हौसला।

  • महिला सम्मान: दुश्मन की बहू-बेटियों को भी माता के समान सम्मान देना उनकी महानता का शिखर था।

  • स्वराज का अर्थ: स्वराज यानी केवल अपनी सत्ता नहीं, बल्कि आम आदमी की भलाई और न्याय।

युगपुरुष को नमन

शिवाजी महाराज जयंती 2026 पर हमें उनके शौर्य के साथ-साथ उनके चारित्रिक गुणों को अपनाने की जरूरत है। वे केवल महाराष्ट्र के नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक आदर्श शासक हैं।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।