Jamshedpur Dog Attack – जमशेदपुर में कुत्तों का आतंक, 2024 में 13 हजार से ज्यादा लोगों को किया घायल
जमशेदपुर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ रहा है। 2024 में 13,161 लोगों को कुत्तों ने काटा। जानिए इसके पीछे के कारण, इतिहास और समाधान।
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। वर्ष 2024 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 13,161 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हुए। जमशेदपुर के सिविल सर्जन साहिल पाल ने बताया कि समय पर एंटी रेबीज़ वैक्सीन देकर लोगों को इलाज मुहैया कराया गया, लेकिन समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है।
कुत्तों के हमले: बढ़ती घटनाओं के पीछे क्या कारण?
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, उनके प्राकृतिक पर्यावास का सिमटना, और पर्यावरणीय बदलाव उनकी आक्रामकता को बढ़ा रहे हैं। जमशेदपुर जैसे शहरी इलाकों में भोजन और पानी के सीमित संसाधनों के लिए कुत्तों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है।
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प्राकृतिक पर्यावास का नुकसान:
- तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आवारा कुत्तों के लिए सुरक्षित जगहें कम हो रही हैं।
- बढ़ते वायु प्रदूषण से उनकी श्वसन प्रणाली पर असर पड़ रहा है, जिससे वे चिड़चिड़े हो रहे हैं।
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धरती के तापमान में वृद्धि:
शोधों के अनुसार, तापमान में बढ़ोतरी के साथ कुत्तों में आक्रामकता बढ़ती है। गर्मी के मौसम में उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित होती है, जिससे वे हिंसक हो सकते हैं।
समस्या का प्रभाव: लोग त्राहिमाम
आवारा कुत्तों के कारण जमशेदपुर में लोगों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को इनसे सबसे ज्यादा खतरा है। सिविल सर्जन का कहना है कि कुत्तों को न छेड़ना और उनसे दूरी बनाए रखना ही बचाव का सबसे अच्छा उपाय है।
इतिहास से सीख: कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने का प्रयास
भारत में आवारा कुत्तों की समस्या कोई नई नहीं है। पिछले कुछ दशकों में देशभर में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) और टीकाकरण अभियानों के जरिए इस समस्या को हल करने का प्रयास किया गया। हालांकि, यह योजना बड़े शहरों तक ही सीमित रही।
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झारखंड का प्रयास:
- झारखंड सरकार ने आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण पर जोर दिया है।
- इसके बावजूद, उचित बजट और संसाधनों की कमी के कारण ये योजनाएं व्यापक स्तर पर लागू नहीं हो पा रहीं।
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क्या कहती हैं रिपोर्ट्स?
पशु कल्याण संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार, कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए नियमित नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाना जरूरी है।
समस्या का समाधान क्या हो सकता है?
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कुत्तों की नसबंदी:
- कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए नियमित नसबंदी कार्यक्रम आवश्यक है।
- सरकार और गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर काम करना होगा।
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शहरों में पशु कल्याण केंद्र:
- कुत्तों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बनाए जाने चाहिए।
- घायल और आक्रामक कुत्तों के लिए विशेष देखभाल केंद्र खोले जाएं।
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लोगों की जागरूकता:
- कुत्तों के प्रति लोगों को संवेदनशील बनाना जरूरी है।
- बच्चों को कुत्तों के साथ सुरक्षित तरीके से पेश आने की जानकारी दी जानी चाहिए।
जमशेदपुर में स्थिति सुधारने की जरूरत
पूर्वी सिंहभूम जिले में कुत्तों के हमले की बढ़ती घटनाएं सिर्फ एक चेतावनी हैं कि हमें इस समस्या को गंभीरता से लेना होगा। सरकारी आंकड़ों से यह साफ है कि कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके प्राकृतिक पर्यावास के नुकसान के कारण यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।
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