Jamshedpur Tribute: बलदेव बस्ती में जिंदा हुई रतन टाटा की विरासत, वंचित बच्चों के बीच मनाया जन्मदिन, ईवाईए फाउंडेशन का अनोखा जज्बा
जमशेदपुर की बलदेव बस्ती में भारत रत्न श्री रतन टाटा जी का जन्मदिवस बेहद भावुक तरीके से मनाया गया। ईवाईए फाउंडेशन द्वारा वंचित बच्चों के साथ केक काटकर और सेवा कार्य कर महान उद्योगपति को दी गई इस अनोखी श्रद्धांजलि की पूरी कहानी यहाँ दी गई है वरना आप भी मानवता और समर्पण के इस प्रेरणादायक पल को जानने से चूक जाएंगे।
जमशेदपुर, 29 दिसंबर 2025 – लौहनगरी जमशेदपुर आज केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक भावना के रूप में उमड़ पड़ी है। मौका है भारत के अनमोल रत्न और टाटा समूह के मार्गदर्शक श्री रतन टाटा जी के जन्मदिवस का। इस पावन अवसर पर जहाँ पूरी दुनिया उन्हें याद कर रही है, वहीं जमशेदपुर की बलदेव बस्ती में मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की गई, जिसे देखकर हर शहरवासी की आंखें नम और गर्व से भर गईं। ईवाईए (EYA) फाउंडेशन ने इस विशेष दिन को चकाचौंध के बीच नहीं, बल्कि उन नन्हे बच्चों के बीच मनाया जिनके पास संसाधनों की कमी है, लेकिन आँखों में बड़े सपने हैं।
बस्ती में गूँजा 'हैप्पी बर्थडे': खुशियों का नया पता
रविवार की सुबह बलदेव बस्ती के बच्चों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं थी। ईवाईए फाउंडेशन के सदस्य जब केक और खुशियां लेकर बस्ती पहुँचे, तो बच्चों के चेहरों पर जो मुस्कान खिली, वही रतन टाटा जी के लिए सच्ची श्रद्धांजलि साबित हुई।
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केक और संवेदना: बच्चों के साथ मिलकर केक काटा गया और रतन टाटा जी के दीर्घायु (स्मृति) और उनके विचारों पर चर्चा हुई।
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सेवा का संकल्प: फाउंडेशन ने बच्चों को केवल उपहार नहीं दिए, बल्कि उनके साथ समय बिताकर उन्हें यह अहसास कराया कि समाज का एक बड़ा हिस्सा उनके साथ खड़ा है।
दीपक मिश्रा का भावुक संदेश: "रतन टाटा मेरे लिए भगवान हैं"
इस कार्यक्रम के केंद्र में रहे ईवाईए फाउंडेशन के संस्थापक दीपक मिश्रा, जो खुद टाटा स्टील के इक्विपमेंट मेंटेनेंस विभाग में कार्यरत हैं। रतन टाटा जी के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया।
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आदर्श और भगवान: दीपक मिश्रा ने कहा, "मेरे लिए रतन टाटा केवल एक नाम या उद्योगपति नहीं हैं, वे मेरे आराध्य और भगवान के समान हैं। उनके सादगी भरे जीवन ने मुझे सिखाया है कि इंसान की असली सफलता उसके धन में नहीं, बल्कि उसके द्वारा किए गए समाज सेवा के कार्यों में है।"
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प्रेरणा का स्रोत: उन्होंने बताया कि वे रतन टाटा जी को अपना गुरु मानते हैं और उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते हुए कमजोर वर्गों की सेवा कर रहे हैं।
सेवा उत्सव: मुख्य विवरण (Event Summary)
| विवरण | जानकारी |
| अवसर | भारत रत्न श्री रतन टाटा जी का जन्मदिवस |
| आयोजन स्थल | बलदेव बस्ती, जमशेदपुर |
| आयोजक | ईवाईए (EYA) फाउंडेशन |
| मुख्य प्रेरणा | दीपक मिश्रा (संस्थापक) |
| उपस्थित सदस्य | उदित यादव, सुमित, अरविंद, हर्ष |
इतिहास और विरासत: जमशेदपुर और टाटा का अटूट बंधन
जमशेदपुर और रतन टाटा का रिश्ता सौ साल से भी पुराना और गहरा है। रतन टाटा जी ने हमेशा लाभ से ऊपर 'लोग' (People above Profit) को रखा। इतिहास गवाह है कि टाटा स्टील ने जमशेदपुर को केवल एक औद्योगिक शहर नहीं बनाया, बल्कि इसे एक ऐसा मॉडल दिया जहाँ 'कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी' (CSR) शब्द के जन्म से पहले ही समाज सेवा की जाती थी। बलदेव बस्ती में हुआ यह आयोजन उसी महान विरासत की एक छोटी सी कड़ी है, जो बताती है कि टाटा के मूल्य आज भी यहाँ के कर्मचारियों और युवाओं के रगों में दौड़ रहे हैं।
ईवाईए फाउंडेशन: मानवता का सशक्त हस्ताक्षर
ईवाईए फाउंडेशन लगातार समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के लिए काम कर रहा है। चाहे वह जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा हो, श्रमिकों के हक की बात हो या आपदा के समय मदद, यह संस्था एक मिसाल बनती जा रही है।
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टीम वर्क: इस कार्यक्रम को सफल बनाने में उदित यादव, सुमित सुमन, अरविंद चौधरी और हर्ष ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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मूल्यों की जीत: सदस्यों का कहना है कि श्री रतन टाटा जी का जीवन हमें सिखाता है कि करुणा ही सबसे बड़ी शक्ति है।
विचारों की अमरता
बलदेव बस्ती में केक कटने की आवाज शायद बहुत दूर तक न गई हो, लेकिन इसकी गूँज उन बच्चों के दिलों में हमेशा रहेगी। यह आयोजन महज एक जन्मदिन का जश्न नहीं था, बल्कि उन महान मूल्यों को जीवित रखने का प्रयास था जिसे रतन टाटा जी ने पूरी दुनिया को सिखाया है। जमशेदपुर की इस बस्ती से उठा यह सेवा का संदेश आज पूरे शहर को प्रेरित कर रहा है।
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