Supaul Fire: मचा हाहाकार, सुपौल में जिंदा जलीं उम्मीदें, 41 घर राख, आधी रात को एक चिंगारी ने छिड़का कहर, खुले आसमान नीचे आया पूरा गांव
सुपौल के शाहपुर गांव में घूरे की एक चिंगारी ने 41 परिवारों की खुशियां जलाकर राख कर दी हैं। आधी रात को आई इस भीषण आपदा, बेघर हुए ग्रामीणों के दर्द और प्रशासन की सुस्त व्यवस्था की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी ग्रामीण इलाकों में छिपे इस बड़े खतरे और आपदा प्रबंधन की हकीकत को नहीं जान पाएंगे।
सुपौल, 29 दिसंबर 2025 – बिहार के सुपौल जिले से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। सरायगढ़ अंचल के शाहपुर गांव में रविवार की काली रात 41 परिवारों के लिए काल बनकर आई। ठंड से बचने के लिए जलाए गए 'घूरे' (अलाव) की एक मामूली सी चिंगारी ने देखते ही देखते पूरे टोले को श्मशान जैसी शांति और राख के ढेर में बदल दिया। आधी रात को जब लोग मीठी नींद सो रहे थे, तब आग की लपटों ने उनके आशियानों को लील लिया। आज शाहपुर की गलियों में सन्नाटा है और हवा में केवल जलते हुए सपनों की महक और सिसकियाँ बाकी हैं।
आधी रात का कयामत: जब बिस्तर छोड़ जान बचाने भागे लोग
शाहपुर गांव के उस टोले में अधिकांश घर कच्चे और फूस के थे, जो आग के लिए ईंधन का काम कर गए।
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अचानक भड़की लपटें: रात के सन्नाटे में अलाव से उठी चिंगारी ने फूस की छत पकड़ी और तेज हवाओं ने आग को पूरे गांव में फैला दिया।
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बदहवास ग्रामीण: जब तक लोगों की नींद खुलती, आग चारों तरफ फैल चुकी थी। ग्रामीण अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर बदहवास होकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागे।
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सब कुछ हुआ खाक: इस भीषण अग्निकांड में 41 परिवारों के घर, उनमें रखा साल भर का अनाज, गाढ़ी कमाई की नकदी, गहने, कपड़े और बच्चों की किताबें तक जलकर कोयला हो गईं।
प्रशासनिक मुआयना: मुआवजे का इंतजार और टूटी उम्मीदें
सोमवार सुबह जब सूरज उगा, तो शाहपुर की तस्वीर बदल चुकी थी। जहाँ कल तक हंसते-खेलते घर थे, वहाँ सिर्फ काला धुआं था।
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सर्वे शुरू: घटना की जानकारी मिलते ही अंचलाधिकारी (CO) के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम गांव पहुंची और नुकसान का आकलन शुरू किया।
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राहत सामग्री: प्रशासन ने पीड़ितों के बीच तत्काल राहत सामग्री (पॉलिथीन और सूखा राशन) का वितरण किया है।
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आश्वासन: अधिकारियों ने वादा किया है कि सरकारी प्रावधानों के तहत जल्द ही सभी प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि बैंक खातों में भेज दी जाएगी।
सुपौल अग्निकांड: मुख्य विवरण (Fire Incident Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| घटना स्थल | शाहपुर गांव, सरायगढ़ अंचल (सुपौल) |
| प्रभावित परिवार | 41 परिवार (पूरी तरह बेघर) |
| आग लगने का कारण | घूरे (अलाव) की चिंगारी |
| नुकसान | अनाज, नकदी, दस्तावेज और आशियाने |
| प्रशासनिक कार्रवाई | सर्वे जारी, तत्काल राहत वितरित |
इतिहास और लापरवाही: बार-बार क्यों सुलगता है कोसी का इलाका?
सुपौल और कोसी का यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से आगजनी की घटनाओं के लिए संवेदनशील रहा है। कच्चे मकान और घर के पास पुआल के ढेर यहाँ आम हैं। इतिहास गवाह है कि हर साल जाड़े और गर्मी के मौसम में लापरवाही की एक चिंगारी दर्जनों बस्तियों को उजाड़ देती है। इसके बावजूद, ग्रामीण इलाकों में फायर ब्रिगेड की पहुंच आज भी एक बड़ी चुनौती है। शाहपुर के ग्रामीणों का आक्रोश जायज है—उनका कहना है कि अगर गांव के पास अग्निशमन की छोटी इकाई भी होती, तो 41 घरों को जलने से बचाया जा सकता था। यह आपदा प्रबंधन के उस दावे पर तमाचा है जो हर साल सुरक्षा की बात करता है।
सर्दी की रात और खुला आसमान: अब क्या करेंगे ग्रामीण?
शाहपुर के पीड़ितों के पास अब तन ढकने के लिए कपड़े तक नहीं बचे हैं। भीषण ठंड के इस मौसम में बच्चों और मवेशियों को खुले आसमान के नीचे रखना किसी दूसरी बड़ी आपदा को निमंत्रण देने जैसा है।
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जनता का रोष: स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल कागजी सर्वे नहीं, बल्कि तत्काल पक्का आवास बनाने के लिए सहायता दी जाए।
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आपातकालीन व्यवस्था: ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर कब तक कोसी के लोग संसाधनों की कमी के कारण अपना सब कुछ खोते रहेंगे?
सबक लेने की घड़ी
शाहपुर की यह आग एक चेतावनी है उन सभी के लिए जो सर्दियों में अलाव जलाकर उसे बिना बुझाए सो जाते हैं। यह प्रशासन के लिए भी सबक है कि आपदा केवल बाढ़ नहीं है, बल्कि आगजनी भी एक ऐसी महामारी है जो एक झटके में दशकों की मेहनत स्वाहा कर देती है। फिलहाल, शाहपुर के 41 परिवार सरकारी इमदाद की आस में अपनी ही राख के पास बैठे हैं।
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