Bagbera Garbage Survey : घर-घर कचरा उठाने के लिए सर्वे शुरू, जिला पार्षद की पहल पर बदला कॉलोनी का चेहरा, जानें क्या है पूरी योजना
बागबेड़ा कॉलोनी में स्वच्छता मिशन के तहत घर-घर कचरा उठाने का सर्वे शुरू हो गया है। जिला पार्षद डॉ. कविता परमार की इस बड़ी पहल और शुल्क से जुड़ी पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/बागबेड़ा, 10 अप्रैल 2026 – लौहनगरी के व्यस्ततम रिहाइशी इलाकों में शुमार बागबेड़ा कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों को गंदगी से मुक्त करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) के निर्देशानुसार, बागबेड़ा में 'घर-घर कचरा उठाओ' अभियान को धरातल पर उतारने के लिए व्यापक सर्वे का काम शुक्रवार से शुरू हो गया। जिला पार्षद डॉ. कविता परमार के निरंतर प्रयासों और प्रशासनिक बैठकों के बाद, अब बागबेड़ा की गलियों में कचरा प्रबंधन की नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। इस सर्वे के शुरू होते ही स्थानीय ग्रामीणों और कॉलोनी वासियों में एक नई उम्मीद जगी है।
ग्राउंड जीरो पर सर्वे: रोड नंबर 2 और 5 से हुई शुरुआत
शुक्रवार, 10 अप्रैल को जिला पार्षद, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रखंड अधिकारियों की मौजूदगी में सर्वे टीम ने मोर्चा संभाला।
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प्रमुख क्षेत्र: सर्वे का आगाज मध्य बागबेड़ा पंचायत के रोड नंबर 5 और बागबेड़ा कॉलोनी के रोड नंबर 2 से किया गया। यह क्षेत्र घनी आबादी वाले हैं, जहाँ कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।
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डाटा कलेक्शन: सर्वे के दौरान हर घर का नंबर, परिवार के सदस्यों की संख्या और संपर्क सूत्र दर्ज किए जा रहे हैं।
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सहमति और शुल्क: कचरा उठाने के बदले लिए जाने वाले नाममात्र शुल्क पर ग्रामीणों की मौखिक सहमति ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि लोग इस योजना के लिए शुल्क देने को सहर्ष तैयार हैं, ताकि उन्हें गंदगी से निजात मिल सके।
प्रशासनिक तालमेल: बीडीओ और पंचायत प्रतिनिधियों ने संभाली कमान
यह अभियान केवल एक सर्वे नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच बढ़ते भरोसे का प्रतीक है।
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अधिकारियों का सहयोग: प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) सुमित कुमार, कनीय अभियंता विजय भूषण और सहायक अभियंता व्यक्तिगत रूप से सर्वे की निगरानी कर रहे हैं।
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मुखिया और वार्ड सदस्यों की टीम: इस मुहिम में मुखिया राजकुमार, उमा मुंडा, पंचायत समिति राजू सिंह और वार्ड सदस्यों की पूरी टीम घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही है।
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समाजसेवियों का साथ: सर्वे के दौरान भोला झा, सतीश सिंह और रवि शंकर सिंह जैसे प्रमुख समाजसेवी भी ग्रामीणों को इस योजना की बारीकियां समझा रहे हैं ताकि शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित की जा सके।
रेलवे कॉलोनी से लेकर 'स्वच्छता संघर्ष' तक की गाथा
बागबेड़ा का इलाका जमशेदपुर के विकास के साथ-साथ बसा, लेकिन यहाँ की नागरिक सुविधाओं का इतिहास हमेशा संघर्षपूर्ण रहा है।
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टाटा स्टील और रेलवे का संगम: बागबेड़ा का एक बड़ा हिस्सा रेलवे टाउनशिप और टाटा स्टील के प्रभाव क्षेत्र के पास है। ऐतिहासिक रूप से यहाँ जल निकासी और कचरा निस्तारण की कोई संगठित सरकारी व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण बारिश के दिनों में यहाँ नरकीय स्थिति बन जाती थी।
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बदलती तस्वीर: पिछले एक दशक में बागबेड़ा ने कई बड़े जनांदोलन देखे हैं, चाहे वह 'बागबेड़ा जलापूर्ति योजना' हो या सड़कों का निर्माण। अब 'स्वच्छता मिशन' के तहत घर-घर कचरा उठाने की यह पहल इस क्षेत्र के शहरीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
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पंचायत स्तर पर बदलाव: 2010 के बाद से पंचायत चुनाव शुरू होने के बाद स्थानीय प्रतिनिधियों ने कचरा प्रबंधन जैसे बुनियादी मुद्दों को जिला मुख्यालय तक पहुँचाया, जिसका परिणाम आज इस सर्वे के रूप में दिख रहा है।
अगली कार्रवाई: डस्टबिन वितरण और रूट चार्ट तैयार करना
सर्वे पूरा होने के बाद इस योजना के दूसरे चरण पर काम शुरू होगा, जो बागबेड़ा की सूरत बदल देगा।
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रूट चार्ट निर्माण: सर्वे के डाटा के आधार पर कचरा वाहनों का रूट चार्ट तैयार किया जाएगा ताकि कॉलोनी की संकरी गलियों में भी गाड़ियां समय पर पहुँच सकें।
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संसाधनों की व्यवस्था: बीडीओ सुमित कुमार ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही पंचायतों को कचरा उठाने वाले वाहन और डस्टबिन उपलब्ध कराए जाएंगे।
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जागरूकता अभियान: कचरे को गीला और सूखा (Wet and Dry) अलग-अलग करने के लिए वार्ड स्तर पर ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे ताकि बागबेड़ा को 'जीरो वेस्ट' जोन बनाया जा सके।
बागबेड़ा कॉलोनी में कचरा प्रबंधन के लिए शुरू हुआ यह सर्वे एक स्वच्छ भविष्य की नींव है। जिला पार्षद डॉ. कविता परमार की जिद और अधिकारियों की तत्परता ने यह साबित कर दिया है कि यदि जनप्रतिनिधि सक्रिय हों, तो सरकारी योजनाएं फाइलों से निकलकर सड़कों तक पहुँच सकती हैं। रोड नंबर 2 और 5 से उठी यह लहर जल्द ही पूरे बागबेड़ा को अपनी चपेट में लेगी। स्थानीय लोगों का उत्साह यह बता रहा है कि वे अब कचरे के ढेर के बीच रहने को तैयार नहीं हैं। फिलहाल, सर्वे टीम घर-घर पहुँच रही है और बागबेड़ा वासी अपनी कॉलोनी को 'स्मार्ट' बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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